ब्लॉगसेतु

बहारों के मौसम में मन की उदासी दूर नहीं होती हँसने मुस्कारने से तकलीफें कम नहीं होती तकलीफ तो जब कम होनी होगी तब ही होगी उम्मीद रखने से बस कम लगती हैं खुदा की इबादत से लड़ने की हिम्मत बढ़ जाती है© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर460-21-31--08-2014तकलीफ, इबादत,खुदा,प्रार्थना...
मैं बंधन मेंतुम बंधन मेंना तुम को चैनना मुझको चैनकैसे हृदय केबंधन खोलेंकैसे प्रेम केप्याले पियें कैसे हम तुम साथ जियें प्रश्न बहुत विकट हैकरना बहुत कठिन हैकर्तव्य पथ सेभटक नहीं सकतेमोह का बंधनतोड़ नहीं सकतेकैसे प्रेम अगन कोशांत करेंकैसे मन क...
ह्रदय खोल कर तुम्हारे दिए घाव दिखा भी दूं तुम मीठे शब्दों में लिपटा हुआ माफ़ी का मलहम  लगा कर ठीक कर भी दो तो भी उनके निशान कैसे मिटा पाओगे मन ने जो दुःख भोगा उसकी भर पायी कैसे करोगे नेत्रों ने जो अश्रु बहाये वो कैसे लौटाओगे रातों को जो निद्रा खोयी उस क...
ना सवाल बन सके किसी का ना जवाब दे सके किसी को लाचारी में जीते रहे ना सवाल पूछने का वक़्त मिला ना जवाब देने का ज़िंदगी क्या है समझने में ही वक़्त गुजारते रहे लोगों को खुद से दूर करते रहे© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर457-18-29--08-2014सवाल,जवाब, लाचारी,वक़्त, शायरी, selected...
उसे धन दौलत आवरण गहने सुख सुविधा के साधन नहीं  प्रेम भरा आलिंगन उन्मुक्त जीवन परस्पर विश्वास स्नेहपूर्ण जीवन चाहिए था वह उसे मिल नहीं सका विवाह के पुरूस्कार में मिला तिरस्कार  अहंकार भरा व्यवहार नित्य की प्रताड़ना हवस का बंधन पुरुष की ताकत का...
हँस कर बोला था मन को खोला था तुमने प्रेम निवेदन समझ लिया कामुकता का दास मान कर  बात करना ही बंद कर दिया मैं तो मन से मन मिलाना चाहता था हृदय के पट खोल कर दिखाना चाहता था सच्चाई से भरा है पर भ्रम का शिकार है तुमने भी वही दिया जो लोगों से मिलता रहा अब...
पगडंडियां बूढी नहीं होतीबूढ़े हो जाते हैं उन पर चलने वाले लोगआस पास लगे वृक्ष उन पर लगे पत्तेजो पीले हो कर झड़ जाते हैंपगडंडियां टूटटी फूटती रहती हैंमगर नष्ट नहीं होती लोगों को लक्ष्य तक पहुंचाती रहती हैं थक जाती हैंपर हार नहीं मानतीकर्तव्य निभाती रहती हैं पगडंडिया...
ना सवाल बन सके किसी का ना जवाब दे सके किसी को लाचारी में जीते रहे ना सवाल पूछने का वक़्त मिला ना जवाब देने का ज़िंदगी क्या है समझने में ही वक़्त गुजारते रहे लोगों को खुद से दूर करते रहे© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर456-17-27--08-2014सवाल,जवाब,ज़िंदगी,वक़्त, selectedDr.Rajend...
समझ नहीं आता कहाँ सर छुपाऊँ दिन में लोग चेहरा पढ़ लेते हैं सवाल पर सवाल पूछते हैं रात में यादें तंग करती हैं पलक तक झपकने नहीं देती हैं सोचता हूँ चेहरे पर चेहरा चढ़ा लूं दिन भर हँसता रहूँ रात में खुद किसी की यादों में बस जाऊं© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर455-16-27--08-20...
 पोस्ट लेवल : सवाल selected ज़िंदगी यादें
तोड़ दे जितना भी तोड़ना चाहे ज़माना मुझको जुड़ना आता है हालात से लड़ना आता है जीता नहीं कभी तो हारा भी नहीं मुझे हर दौर में जीना आता है निरंतर ग़मों से दोस्ती रखी है अब डरता नहीं हूँ गम ही थक कर मुझसे तौबा कर लेंगे मेरा खुदा रोज़ मुझ से यही कहता है© डा.राजेंद्र तेला,निर...