ब्लॉगसेतु

अहम का कोहरा कुछ लोगअपने आप से घिरे हैंअहम के कोहरे सेढके हैंमोहब्बत से परे हैंभ्रम में जी रहे हैंआइना देखने कीफुर्सत नहींआइना दिखाने मेंलगे हैंडा.राजेंद्र तेला,निरंतरअहम, जीवन42-26-05-2015Dr.Rajendra Tela"Nirantar" "निरंतर" की कलम से.....
 पोस्ट लेवल : जीवन अहम book
कहने को बातें बहुत हैंकहने को बातें बहुत हैंकहूँ जितना ही कम हैंमौसम से प्रारम्भ होगी देश विदेश,राजनीति  टीवी सिनेमा से होते हुए घर परिवार में पहुँच जाएंगीरास्ता भटक कर लोगों पर अटक जायेगीमन की कुंठा बाहर आएगीकिसी की प्रशंसाकिसी की बुराई होगीजुबां गन्दी हो जाय...
 पोस्ट लेवल : जीवन कहना बातें book
शब्दों का खेलना किसी कविता में दर्द होता हैना कोई गीतदुःख से भरा होता हैना प्यार मोहब्बतकिसी ग़ज़ल में होता है ना ही किसी नज़्म मेंजुदाई बेवफाई होतीसब शब्दों का खेल हैमन संवेदनशील भावनाओं से युक्त ना होमानवता का सोच न होकविता हो या ग़ज़लसब इकसार लगते हैंडा.राजेंद्र...
"मैं "बस गया हृदय में दूसरों में अवगुण ढूंढना स्वयं के अवगुण छुपाना मानवता की बात करना अमानवीय काम करना धर्म हो गया इंसान का धन संचय अहम स्वार्थ ईर्ष्या द्वेष होड़ में जीना लक्ष्य हो गया इंसान का "मैं "बस गया मन में समाहित हो गया हृदय में अब नहीं रहा इंसानजैसा चाहा...
सूरज तुम चमकना छोड़ दोगुलाब तुम महकना छोड़ दोइतनास्वार्थी हो गया इंसानमन ही मन कहता हैसूरज तुम चमकना छोड़ दोगुलाब तुम महकना छोड़ दोकिसी का सुख किसी की ख़ुशीअब स्वीकार नहीं उस कोमन पर अहम काआधिपत्य हो गयास्वयं के सिवाय कोईअच्छा लगता नहीं उस कोदिखाने को कहता हैप्रेम भाईचा...
सुकून से जीने दो दिन का उजाला तुम रख लोमुझे शाम का सांवलापन ही दे दोसारी ख्वाहिशें तुम पूरी कर लोमुझ पर खुदा कारहम ही रहने दोबड़ी इमारत में तुम रह लोमुझे छोटे से  घर में ही रहने दोनफरत रंजिश तुम कर लोमुझ को मोहब्बत करने दो बेचैनियों का सामान  तुम इकठ्ठा कर...
बहता पानी हूँबहता पानी हूँरोका तोअपने मेंसदा के लिएरुक जाऊंगारिश्ते नाते दोस्तसब भूल जाऊंगासंसार से दूर होताचला जाऊंगाएक दिनबुझ जाऊंगायादों मेंरह जाऊंगाडा,राजेंद्र तेला,निरंतरजीवन,36-11-05-2015Dr.Rajendra Tela"Nirantar" "निरंतर" की कलम से.....
 पोस्ट लेवल : जीवन book
काँटों के बीच रहता हूँ  काँटों के बीच रहता हूँ  लहूलुहान होता हूँदर्द में तड़पता हूँचुपचाप सहता हूँ कैक्टस सा जीता हूँईश्वर में आस्था रखता हूँ,धैर्य को लक्ष्य बना करनिरंतर हँसता हूँडा.राजेंद्र तेला,निरंतरआस्था,कैक्टस ,धैर्य,लक्ष्य,35-11-05-2015Dr.Rajendra...
माँ,तुम हो देवी अवतार माँ कहाँसे लायीं तुम ये प्रेम स्नेह ममत्व धैर्य कर्तव्य की अथाह धन सम्पदा किसने दिया तुम्हें सहनशीलता सहृदयता संवेदनशीलता का उपहार माँ तुम अहम अहंकार से पर हो जीवों में अतुल्य हो मुख से कुछ नहीं कहोगे तो भी  सच करो स्वीकारमाँ तुम हो देवी...
अजीबो गरीब है ये इंसानों की दुनिया अजीबो गरीब है ये इंसानों की दुनिया चंद लोगों को ही मिलती है धन दौलत सर छुपाने को कोठियांबीत जाती है झोंपड़ी फुटपाथ पर ज़िंदगियाँ ना दो वक़्त रोटी का पताना खेलने को मैदान बचपन में बुढ़ापा देख लेती हैं ज़िंदगियाँ बीमारी में सांस लेते लेत...