ब्लॉगसेतु

आत्म मंथन ठहरे जल को गंदगी दूषित कर सड़ने लगती बहती नदी में गंदगी मंझधार से हट कर किनारों पर चली जाती जल को दूषित होने सेबचाती निरंतर आत्म मंथन सेमन की गंदगी भीकिनारे पर चली जाती सोच को स्वच्छ आचार व्यवहार को मधुर बनाती डा.राजेंद्र तेला,निरंतरसोच,आत्ममंथन,जीवन, आचार...
खरा सिक्का सच को झूठ झूठ को सच कहना अब आम हो गया हैहोड़ के दौड़ में येन केन प्रकारेण जीतना ध्येय हो गया है जो जीत गया उस के सर पर ताज हैजो हार गया वो कमजोर खिलाड़ी हैजो चल गयावो खरा सिक्का हैजो ना चलाकितना भी अच्छा होखोटा सिक्का हैडा.राजेंद्र तेला,निरंतर31-09-05-2015स...
 पोस्ट लेवल : हार जीवन झूठ सच जीत book
(नेपाल में भूकम्प त्रासदी पर)त्रासदी प्रकृति के रौद्र परमानव संहार परहृदय व्यथितमन बेचैनसोच जड़कलम चुप हैनम आँखों सेमृत आत्माओं कोशत शत नमन हैनिश्छल हृदय सेश्रद्दांजलि अर्पण हैडा.राजेंद्र तेला,निरंतरभूकम्प,त्रासदी,प्राकृतिक विपदा30-09-05-2015Dr.Rajendra Tela"Niranta...
बड़े बूढ़ों की छत्र छाया में बड़े बूढ़ों की छत्र छाया में समय कितनी सरलता से गुजरा कभी अहसास तक नहीं हुआ उनके सब्र के पैमानेस्थितियों से निबटने के तरीके कभी सार्थक नहीं लगे आज जब वो नहीं हैंउनकी सार्थकता का पता चल रहा हैस्वयं पर क्रोध आ रहा हैउनके जीवन काल मेंउनके सोच...
किसे याद रहती हैं सिसकी गरीब की किसे याद रहती हैंसिसकी गरीब की किसने समझी  हैज़िन्दगी गरीब की किसने खाई हैरोटी गरीब कीकिसने पौछी हैअश्रुधारा गरीब की किसने भुगती है त्रासदी गरीब की किसने महसूस करीलाचारी गरीब की किसने देखी हैझोपडी गरीब कीकिसने लड़ी है लड़ाई गर...
 पोस्ट लेवल : गरीब गरीबी
नारी पुरुष के पीछे अर्धांगिनी बन कर खडी होती है नारी ,सुख दुःख में साथ देती है नारी सफलता में सहायक होती है नारी पुरुषों से अधिक सहनशील अधिक सहती है नारी  ममत्व में स्नेह की पराकाष्ठा होती है नारीशक्ति का रूप धैर्य का प्रतीक महान होती है नारीडा.राजेंद्र तेला,न...
 पोस्ट लेवल : नारी book
रूठना मनाना किस को मनाऊंकैसे मनाऊं मन को मनाऊं लोगों को मनाऊं मन को मनाऊं तो लोग नाराज़लोग नाराज़ तोनया दुश्मन बनाऊं  लोगों को मनाऊं तो मन नाराज़ मन नाराज़ तो जीना दुश्वार समझ नहीं आताकिस को मनाऊं कैसे मनाऊं डा.राजेंद्र तेला,निरंतर26-07-05-2015जीवन,रूठना मनानाDr.R...
 पोस्ट लेवल : जीवन रूठना मनाना book
सब कुछ हैफिर भी कुछ नहीं हैंघोड़े हैंतो मैदान नहींमैदान हैतो घोड़े नहींघोड़े भी हैंमैदान भी हैमगर मन नहींतो कुछ नहींसब कुछ हैफिर भी कुछ नहीं हैंडा.राजेंद्र तेला,निरंतरमन,जीवन25-07-05-2015Dr.Rajendra Tela"Nirantar" "निरंतर" की कलम से.....
 पोस्ट लेवल : जीवन मन book
What to say? What not to say?What to say?What not to say?When to say?When not to say?Always remainsA burning questionSaying anythingMay bePleasant for oneUnpleasantFor the otherSo wheneverOne has to sayBefore sayingOne has to thinkTwiceLearn the rightWay of sa...
 पोस्ट लेवल : communicate communication
अवरोधों की आँधियों के बीच वृक्ष के पत्ते सा फड़फड़ाया हूँनिराशा की गर्मी में झुलसा हूँअसफलता के आसूओं की वर्षा में भीगा हूँ अतिवृष्टि से त्रस्त पंछी जैसे सहमा हूँ कैक्टस जैसे ज़िया हूँभाग्य से लड़ता रहा हूँअवरोधों की आँधियों के बीच जीवन के मरुस्थल में अविचल खड़ा हूँविश्...