ब्लॉगसेतु

अहम की नदी एक ही पलंग पर उसका मुंह उत्तर मेंमेरा मुंहदक्षिण में रहता थावो भी रात भरकरवटें बदलती रहतीमैं भी रात भरकरवटें बदलता रहताना वो सो पातीना मैं सो पातानींद नहीं आ रही है क्याथोड़ी थोड़ी देर में वो मुझसेमैं उससे पूछताना वो मुझे सुलाने काप्रयास करती ना मैं उसे सु...
लोगों केसवालों काउत्तर देते देतेथक गया हूँउनके शक कीबीमारी सेइतना डर गया हूँअब खुद पर भीशक करने लगा हूँकभी कभी खुद कोछू कर देखता हूँकभी आईने मेंझांकता हूँकभी मित्रो सेपूछता हूँमैं हूँ भी या नहींडा.राजेंद्र तेला,निरंतरशक,जीवन03-04-02-2015Dr.Rajendra Tela"Nirantar" "...
 पोस्ट लेवल : जीवन good शक
गम भी हैं मज़बूरियां भी हैं गम भी हैं मज़बूरियां भी हैंजब मुझे ही सहना हैमुझे ही करना है क्यों किसी को अहसास कराऊँ हँसते हँसते लड़ता रहूँसब्र से जीता रहूँ खुदा कीइबादत करता रहूँ यही बेहतर उपाय हैडा.राजेंद्र तेला,निरंतर    शायरी,सब्र,ज़िंदगी,गम,02-02-02-2...
 पोस्ट लेवल : good सब्र गम ज़िंदगी शायरी
रात गुजरी मगर बात नहीं गुजरीरात गुजरी मगरबात नहीं गुजरीहर शब्द की प्रतिध्वनिअब भी कानों में गूँज रही हैमन में विचारों कातांडव मचा रही हैह्रदय को झंझोड़ रही हैग्लानि सेआँखें नम हो रही हैंपुरुष होने पर शर्म आ रही थी उसके स्वर में याचना थीआँखों में दया की भीख थीइतना ही...
 पोस्ट लेवल : good स्त्री नारी अभागिन
इंसानियत तोतब ही मर चुकी थीजब इंसान इंसान सेनफरत करने लगा थास्वार्थ में इंसान नेहाथ मेंहल के स्थान परहथियार उठाया थाधरती कोपेड़ पौधों केस्थान पर खून सेरंगने लगा थाभाषा रंग जातिधर्म के नाम परदेश बनने लगे थेइंसानियत तोतब ही मर चुकी थीजब इंसान खुद कोईश्वर से बड़ासमझने ल...
कभी कभी मन को खुश कर लेता हूँसमय के कागज़ पर भावनाओं की कलम चला देता हूँकभी आड़ा तिरछा कभी सीधा सच्चा लिख देता हूँशब्दों से चित्र बनाता हूँकिसी को खुश किसी को नाराज़ कर देता हूँ कुंठाओं की अभिव्यक्ति कोतनाव मुक्त रहने का साधन  समझता हूँ© डा.राजेंद्र तेला,निर...
 पोस्ट लेवल : जीवन कुंठा तनाव कलम selected
कागज़का टुकडा नहीं हूँलिखा और फाड़ दिया जज़्बातों से भरा हूँ धडकते दिल का मालिक हूँनिरंतरमोहब्बत को तरसता हूँमोहब्बत में जीता हूँजिसका हो गया एक बारउसी का रहता हूँपुचकारे ये दुत्कारेशौक से सहता हूँ© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर543-06-26-11-2014मोहब्बत,ज़ज़्बात,शायरी,कागज़,boo...
चाहो तो जल कह दोचाहो तो पानी कह दो चाहो तो आँख के आसूं शरीर का पसीना कह दोनाम कोई भी दे दो नदी नाले में बहता हूँलहर बन कर समुद्र में उछलता मचलता हूँ कुए तालाब बांधों में सीमाओं में बंध जाता हूँ रात में ओस बन कर पत्तों पर छा जाता हूँ बादलों में बस कर धरती को भिगोता...
दिल करे तो क्या करेमन कहे तो किस से कहेकोई जिए तोकैसे जिएजब ख्वाहिशें अधूरी होचाहतों से दूरी होहसरतों की नाकामी होज़िंदगी दायरों में बंधी हो आँखों में नमी होलबों पर झूठी हँसी होदिल करे तो क्या करेमन कहे तो किस से कहे 541-04-15-11-2014© डा.राजेंद्र तेला,निरंतरज़िंदगी,...
ना तो अब दशरथ से पिता होते हैंना ही राम से पुत्र होते हैंकिसी को वनवास जाना पड़ेगा तो पिता को जाना पड़ेगा समय के साथ चलना पड़ेगा  पुत्र की हर बात को हँस कर मानना पड़ेगा बुढ़ापे का सहारा बनाना होगा संस्कारों का अर्थ बदलना होगा रामायण का नया रूप लिखना पड़ेगाअयोध्या को...