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नज़्म भी जिसके आगोश में फ़ना हो गई कश्मीर ! जिसे दुनिया जन्नत पुकारती है ||सु-मन 
 पोस्ट लेवल : जन्नत कश्मीर
.....क्या खूब इन्सानियत की हस्ती हो गई हथियार बेशकीमती जिंदगी सस्ती हो गई !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : इन्सानियत जिन्दगी
.......फ़लक परभीगा ही होगा तुम्हारा दामनतेरी याद के साये नेआज जब छुआ मुझको बाबुल !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : बाबुल
......शाम ख़याल के सीने पर सोया हुआ नज़्म का एक टुकड़ा !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : ख़याल शाम
धुँधली होने लगी हैं उम्मीदें तारीकें भूलने लगी हूँ मैं .. !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : उम्मीद
खाली लम्हों को तेरे ख़यालों से जो सजाया हमने जाम-ए-सेहरा सा दिन इश्क-ए-समंदर में ढल गया !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : ख़याल वो लम्हें....
मैंने ख़यालों में रखी हैं कुछ मोहलतें तुम आकर रख जाना कुछ वक़्त मेरी ख़ातिर !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : ख़याल मोहलत वक़्त
मेरे दर्द की खबर भी न हुई ज़माने को दर्द मुझको और मैं दर्द को यूँ जीता रहा !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : दर्द
देर रात चाँद सोता रहा पलकों तलेचाँदनी तेरे ख्वाब को शबनमी करती रही !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : चाँदनी ख़्वाब
गिरा तेरी आँख से इक क़तरा अश्क कामेरा दामन यूँ सेहरा से सागर बन गया ।।सु-मन 
 पोस्ट लेवल : अश्क़ दामन