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संजय कुमार श्रीवास्तव  साहित्य कला में  ‘कल’ की कलाकारियांयंत्र का सभ्यता से बहुत पुराना संबंध है। हर युग में नए-नए यंत्र ईजाद हुए हैं। हमारा जीवन उनसे प्रभावित होता रहा है। यंत्र या मशीनें जीवन को आरामदेह बनाने के लिए बनती हैं। जब तक प्रकृति, मशीन औ...
बनास जन में छपी कविताओं की कड़ी में अंतिम कविता  ।।नीम बेहोशी।। मंत्री की गाड़ी के काफिले से डर लगता है। उनकी प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के प्रपंच से लोक लुभावन नीति से बकबकी उथली प्रीति से मितली आने गश खाने का डर लगता है। देश प्रेम के जबर जोश से मर जाएंग...
 बनास जन में छपी कविताओं में से एक और कविता पढ़िए।    ।।हलफनामा।।फंसा फंसा तो इसलिए लग रहा है क्‍योंकि दर्जी ने कमीज तंग सिल दी है यह कहना खतरे से बाहर नहीं है कि दर्जी किसकी सलाह पर चला है रेडीमेड से ही काम चलाना पड़ता है माप ले क...
 आपने बनास जन में छपी चार कविताओं में से एक कविता खेल कुछ दिन पहले पढ़ी थी। यह अंक ऑनलाइन ही छपा है। आज उन्हीं चार में से दूसरी कविता नया हाकिम पढ़िए। धीरे धीरे चारों कविताएं पढ़वाता हूं। ऊपर जलरंग में चित्रकृति कवि महेश वर्मा की है। ह...
 कागज पर जलरंग : महेश वर्मा यह कविता कोरोना काल से पहले की है। दरअसल कोरोना शरु होने के बाद मुझसे कोई कविता लिखी ही नहीं गई। अलबत्ता दो-एक टिप्पणियां और एक रेडियो नाटक जरूर लिखा। पर सारे लिखने-पढ़ने, सोचने-समझने पर एक धुआंसा सा छाया हुआ है। इस बीच बन...
छायांकन : हरबीर सिंह मनकू बजती हुई सांकल (विजय कुमार की तीन कविताओं पर एक टिप्पणी)कुछ को-सबको नहींसब में से बहुतों को भी नहींबल्कि बहुत कम को।नहीं गिन रही स्कूलों को, जहां जरूरी हैऔर खुद कवियों कोएक हजार में कोई दो लोगों को।  पसंद है- पर किसी को...
वीटी स्टेशन की धरोहर इमारत पर लगी मूर्ति मैंने कहानियां ज्यादा नहीं लिखीं हैं । जो लिखी हैं वे भी पचीस तीस साल पहले । रोटियां कहानी हिमाचल की ग्रामीण पृष्ठभूमि पर है, जो मधुमति में छपी थी । मुंबई के आवारा कुत्तों के पकड़ने की कुत्ताघर नाम की कहानी वर्तमान साहि...
 पोस्ट लेवल : कहानी अनूप सेठी
भारतीय विद्या भवन का मासिक कोरोना काल की घरबंदी के दौरान ऑनलाइन शाया हो गया है। संपादक विश्वनाथ सचदेव जी ने कोरोना आवरण कथा आयोजित करके भविष्य की दुनिया पर गंभीर बहस में योगदान दिया है । मेरा यह लेख नचनीत के इसी अंक में है ।     खलील जिब्रान की...
 पोस्ट लेवल : विमर्श अनूप सेठी लेख
मैंने कहानियां ज्यादा नहीं लिखीं हैं । जो लिखी हैं वो भी पचीस तीस साल पहले । रोटियां कहानी हिमाचल की ग्रामीण पृष्ठभूमि पर है, जो मधुमति में छपी थी । मुंबई के आवारा कुत्तों के पकड़ने की कुत्ताघर नाम की कहानी वर्ततान साहित्य में छपी थी । एक और  यह कहानी मुंबई के...
 पोस्ट लेवल : कहानी अनूप सेठी
सुमनिका द्वारा करीब पचीस साल पहले चारकोल से बनाया गया स्केच यह थकना भी कोई थकना है लल्लू! हम अजीबोगरीब वक्त में फंस गए हैं । एक तरह से सारी दुनिया ही ठहर सी गई है । आगे हम लोगों को जीवन कैसा होगा कुछ पता नहीं ।  कुछ लोग कोरोना के शिकार हो गए हैं, कुछ उन्ह...