ब्लॉगसेतु

पिछले कुछ अर्से से डायरी के कुछ अंश लगा रहा हूं. ये दस साल से ज्‍यादा पुराने हैं. हमारा वक्‍त बहुत तेजी से बदल रहा है, यह सच है पर बहुत कुछ वैसा ही है यह भी तो सच है. एक दिन शाम को दफ्तर से लौटते हुए सांताक्रूज से बस ड्राइवर पता नहीं किसी बात पर झल्लाया हुआ था या क...
 पोस्ट लेवल : डायरी
अचानक स्लिप डिस्क वाली दर्द उभर आई है। जुकाम तीसरे दिन भी शांत नहीं हुआ। जिस कारण दफ्तर नहीं गया। सोचा। होम्योपैथी दवाएं पढ़ीं। अमरकांत का उपन्यास सूखा पत्ता पढ़ना शुरू किया। डायरी लिखते समय एक ख्याल हमेशा आता है कि अमूमन डायरी रात में लिखने की धारणा क्यों है? या यह...
 पोस्ट लेवल : डायरी
बाल कवि बैरागी ने एक जगह कहा है, 'अकेली हिंदी ऐसी भाषा है, जिसके पास 14 सितंबर 1949 के कारण उसका जन्मदिन है, राजभाषा के तौर पर। ... किसी भी राजभाषा के पास अपना जन्मदिन नहीं है। यह इसे संविधान से मिला है।' जन्मदिन मनाना, एक भला विश्वास है। जन्मदिन मनाना और मगन रहना,...
 पोस्ट लेवल : हिंदी
इच्छा दब ही नहीं, शायद मर भी गई थी। एनसीपीए के फिल्म सेंटर की सदस्यता का नवीनीकरण तो करवा लिया था, पर देखने जाने की इच्छा नहीं होती थी। प्रभात चित्र मंडल की सदस्यता लेकर फिल्में देखने का ख्याल भी करने की हिम्मत नहीं होती थी। बचते चले जाने की मानसिकता बन गई थी।इस बा...
 पोस्ट लेवल : डायरी
सुमनिका से आज बात होने लगी पाठकता के बारे में, कि कविता के पाठक कवि लेखक ही हैं। वह भी मित्र कवि लेखक। उसने कहा कि नहीं पाठक हैं। अध्यापन यानि छात्रों के अनुभव के आधार पर यह कि उन्हें उपन्यास कहानी की बजाये कविता अच्छी लगती है। हालांकि कविता पढ़ने के लिए ट्रेनिंग क...
 पोस्ट लेवल : डायरी
यह पूरा अंक यहां रखा है.डायरी के कुछ अंश ऊना, हिमाचल प्रदेश से गुरमीत बेदी की पत्रि‍का पर्वत राग में छपे थे. उसके नए अंक की प्रतीक्षा है जो लीलाधर जगूड़ी पर केंद्रित है.  इतने लंबे अर्से के बाद यहां होना बता देता है, जीवन के क्या हाल हैं। यूं सब ठीकठ...
 पोस्ट लेवल : डायरी काव्‍य विचार
पिछली बरसात में छाते पर चर्चा चली थी. इस बीच हमारे बड़े भाई तेज जी ने वो पोस्‍ट देखी और छाते पर यह टिप्‍पणी भेजी - तुम्हारे ब्लाग में से मैंने "छाता" पढ़ा तो मुझे छत्तरोड़ू की बड़ी याद आई,  वो वचपन की सारी यादें... तुम्हें शायद याद होगा कि नहीं, ग्रामीण लोग "ऒ...
 पोस्ट लेवल : टिप्पणी
कवि सुंदर चंद ठाकुर नव भारत टाइम्‍स के मुंबई संस्‍करण के संपादक बने तो उन्‍होंने अखबार में साहित्‍य  कला के लिए थोड़ी जगह निकाली और पुस्‍तक समीक्षा का कालम भी शुरू किया. इसमें मुझे भी समीक्षा करने  का मौका मिला, हालांकि ऐसे क...
 पोस्ट लेवल : कवि बंधु
धर्मशाला, मेक्‍लोडगंज में दलाई लामा और तिब्‍बती रहते हैं. वहीं हैं कवि लासंग शेरिंग. एक दोस्‍त ने उनसे मुलाकात कराई, मैक्‍लोडगंज में ही, जहां शेरिंग बुक वर्म नाम का किताबों की दुकान चलाते हैं. इनका एक संग्रह है टुमारो एंड अदर पोइम्‍स, जो अब आउट आफ प्रिंट हो गया है...
 पोस्ट लेवल : कवि बंधु
लेबल ठीक करते करते न जाने क्‍या गड़बड़ हो गई कि दो पुरानी टिपपणियां सबसे ऊपर आकर चिपक गईं. इन्‍हें अपनी जगह वापस कैसे रखते हैं, यह समझ नहीं आ रहा, इसलिए क्षमा करें. अगर आप इन्‍हें पहले पढ़ चुके हैं तो कृपया नजरअंदाज़ कर दें और न पढ़ा हो तो पढ़कर कृतार्थ करें.
 पोस्ट लेवल : टिप्पणी