ब्लॉगसेतु

 माँ लक्ष्मी आईंखुशियाँ बरसायीं मन को भाईं !शुभ शगुनगणपति विराजेकलश साजे !मण्डप सजारिद्धि सिद्धि ले साथपधारो नाथ !राम पधारे शुभ शगुन सारेहँसी बधाई !खुशियाँ वारूँराम लखन जानकीछवि निहारूँ ! #निवी
मन्ज़िलविभा जैसे ज़िंदगी की जद्दोजहद से उबर कर शांत हो चुकी थी । वैभव की तरफ देखते हुए उसने पूछा ,"ले आये न ... कोई दिक्कत तो नहीं हुई न ... कोई उल्टे सीधे प्रश्न तो नहीं किये गए तुमसे ? " वैभव ने इंकार में सिर हिलाया । दोनों शांत बैठे ,बालकनी से झूमते पेड़ - पौध...
जब भी यात्रा की बात होती है ,तब सबसे पहली याद जिस स्थान की यात्रा की आती है ,सम्भवतः उस स्थान का नाम भी बहुत कम लोगों को ही पता होगा । यह भी बहुत बड़ा सच है कि उस यात्रा के बाद अनगिनत स्थानों पर गई हूँ पर उतना आनन्द और रोमांच किसी बार भी नहीं मिला । आज यात्रा की बात...
 कितना सफर है बाकी कहाँ तक चलना होगाकहाँ ठिठकनी है साँसबांया ठिठका रह जायेगा या दाहिना चलता जायेगा !फिर सोचती हूँक्यों उलझ के रह जाऊँगिनूँ क्यों साँस कितनी आ रहीआनेवाली साँस को नहीं बना सकतीगुनहगार जानेवाली साँस का !ऐ ठिठकते कदम ! गिनती भूल चला...
 आज सुबह सुबह बचपन की गलियाँ मन से चलती हुई आँखों पर पसर गयीं हैं, जैसे रातभर का सफर करती आयीं हों ... याद आ रही है नानी माँ की बनाई गुड़िया जिसको सहेजे पूरे घर में फुदकती रहती थी ... भाई को पढ़ाने आनेवाले चाचा ( तब घर आनेवाला कोई भी व्यक्ति चाचा / मामा / भ...
 सब पूछते रहतेसुनो न !तुम क्या करती हो ?अनसुना करने की एक नामालूम सी कोशिशऔर जवाब मेंसिर मेरा झुक जातानहीं ... कुछ नहीं करती !एक दिन लड़खड़ा गया पाँवदिन में दिखते चाँद तारेबिस्तर में पड़ा शरीरसाथ ही चन्द जुमलेसुनो ! मत उठना तुम वैसे भी क्या करना ही होगास्विगी करत...
 उमगती है आँधी ,उजड़ता है उपवनजब रिसती हैं आँखें, बरसता है मन !डगर रीत की , याद मीत कीटेसू उजाड़ गये ,हार जीत की बंसरी मूक हुई ,साँवरे छुप गएसिसकती है राधा ,सोच प्रीत की !कसकती हैं यादें ,छलकता है जतनजब रिसती हैं आँखें, बरसता है मन !माटी है मिलती ,माटी है ग...
 जाँच आँखों की जारी थीटेस्ट दर टेस्ट न जाने कितनी मशीनों की आनी बारी थीएक आँख बन्द कर देखिये क्या दिखता हैछटपटाहट में मन घबराया और झट दूसरी आँख नेअपनी रौशनी देनी चाही तभी आवाज़ आई नहीं ... बिल्कुल नहीं हर समय का सहारा नहीं अच्छाउसको भी खुद को आजमाने दोज़िन्दगी क...
 दिलों को दुखाना  महारत नहीं है मेरी आज तक भी अदावत नहीं है ।मुलाकात की बात हम भी क्यूँ करते यूँ मिलने मिलाने की आदत नहीं है ।शिकायत करें हम कहाँ तुम से झूठी बड़ी खुद से कोई अदालत नहीं है ।बग़ावत जमाने से हम करते कैसेहसीनों की ये तो रवायत नही...
अवगुंठन की ओट में ,गोरी खड़ी लजायेदूर देश प्रीतम गए ,ना जाने कब आये !हथेली हिना हँसने लगी ,चूड़ी खनक जायेपाँव महावर खिल गये ,पायल गुनगुन गाये !ऋतु बसन्त की आ गयी ,मदन चलाये तीरअँखियों में सपने सजे , भूल गयी सब पीर !कली मोगरे की खिली ,केशों में जा सँवरीसम्मुख प्रिय को...