ब्लॉगसेतु

पृथ्वी की अनुमित जीवन अवधि तकरीबन साढ़े चार अरब बरस बतलाई गई है। गत चौवन करोड़ बरसों की अवधि में पृथ्वी से जीवों  का बड़े पैमाने पर पांच बार  सफाया हो चुका है। कारण ज्वालामुखी विस्फोट और सूर्य के गिर्द घूमते (परिक्रमाशील )क्षुद्र ग्रहों की टक्कर रहे हैं।फिलव...
रामचंद्र गुहा कहीं खुद को बुद्धिमान मानने की भूल तो नहीं कर रहे ?क्या वह स्वयं  को योग्य मान रहे हैं ?कैसी काहिली है जिन लोगों ने अपना इस्लामिक एजंडा खुलकर  देश के सामने रख दिया है  और अपने घर की औरतों को चौराहे पर लाकर बिठा दिया...
टीम मोदी बनाम ब्रांड मोदी (दैनिक हिन्दुस्तान १८ जनवरी २०२० )फतवे नुमा शीर्षक है। लेखक ने अपनी विचारधारा के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किये हैं लिहाज़ा यह  आग्रह मूलक आलेख शीर्षक का प्रतिपादन करता कहीं भी दिखलाई नहीं देता। लेखक को मोदी ,मोदी .....मोदी...
विरोध का चेहरा या महिलाएं बनीं मोहरा ?दिलों में विरोध की  आग गली -गली शाहीन बाग़ ?अधिकार तो चाहिए लेकिन कर्तव्य कौन निभाएगा ?सी.ए.ए कानून  डर या डराया गया ?हम अपने वाम भाइयों की तरह फतवा ज़ारी नहीं करेंगे ,सवाल उठायेंगे ,ज़वाब आप दें। नागरिकता संशोधन क़ानून य...
स्तम्भ ,धूप -छांव में प्रणव (परम )प्रियदर्शी !'इस दौर की सनसनी' (नभाटा ,नै -दिल्ली १६ जनवरी २०२० )चंद लिपे पुते चेहरे रास्ता रोक के बीच सड़क पर कहने लगें ये शाहीन बाग़ है यह ठीक वैसा ही होगा जैसे बीच सड़क पर नमाज़ पढ़ने वाले कहें ये जगह मस्जिद है क्योंकि मस्जिद किसी जगह...
सीएए क्यों अतार्किक और अनैतिक है (रामचंद्र गुहा ,अमर उजाला १२ जनवरी २०२० अंक )बिना विवेचन के ये लेफ्टिए ऐसे केची शीर्षक देकर प्रभावित करते हैं। ये ऐसे ही फतवे -नुमा वाक्य लिखते हैं। इन रक्तरंगियों को माँ के गर्भ से ही यह पढ़ाया जाता है तुम सर्वहारा हो दूसरा शोषक है।...
कहते हैं अफवाह के पर (पक्ष या पंख )नहीं होते यह बिना पर का पक्षी है जो और ऊंचा उड़ता ही जाता है। कुछ कुछ यही आलम आजकल नागरिकता संशोधन कानून को लेकर फैले भ्रम का है।   यह भ्रम प्रायोजित तरीके से फैलाया गया है। इसकी पटकथा लिखी है विपक्ष के सूत्रधारों ने जिनम...
पार्टियों की मुसीबत बनती बेकाबू जुबान (१५ जनवरी २०२० अंक ,नभाटा नई दिल्ली )सार्थक एवं सभी राजनीतिक पार्टियों  के लिए विचारणीय मुद्दे उठाता है।कांग्रेस के पतन का एक बड़ा कारण चुनिंदा नेताओं का बड़बोला पन और बदज़ुबानी भी रही है इसकी शुरुआत दिग्विजय सिंह से आरम...
खाते जाओ खाते ही जाओ (१३ जनवरी अंक ,नभाटा  नई -दिल्ली )मौजू सवाल उठाता है। इस संदर्भ में गौर तलब यह भी है हमारे पेट का वॉल्यूम हम जितना खाते हैं उसके अनुरूप हो जाता है। मसलन हमने कई बरस पहले लंच और डिनर में एक रोटी खानी शुरू की और धीरे -धीरे पूर्ण तृप्ति...
इंटरनेट का हक़ (नभाटा ११ जनवरी ,२०२० नई दिल्ली ,अंक )मौज़ू मुद्दे उठाता है। हमारा और हमारे साथ भारतधर्मी समाज का मानना है ,देश आज पहले से अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित है। देश इंटरनेट से बड़ा है देश की सुरक्षा जहां निशाने पे लेने वाले नेट का दुरपयोग करते हों और इस बात के...