ब्लॉगसेतु

कल से इक विवादास्पद लेखक की अपने किसी कमेंट में कही इक बात बार बार हथौड़े सी चोट कर रही थी ...." कुछ बदमाश औरतों ने बात का बतंगड़ बना दिया ...."बस वहीं इस कविता का जन्म हुआ ....बदमाश औरत************औरतें बदमाश होती हैंजो उठाती हैं आवाज़ अन्याय के खिलाफ़उठा लेती हैं हथि...
ग़ज़ल********ले गया लूट कर दिल मेरा कौन हैदे गया ग़म नया,  बेवफ़ा कौन हैजात क्या,उम्र क्या, क्या ग़लत क्या सहीइश्क़ में सब भला सोचता कौन हैटूटकर था कभी दिल ने' चाहा जिसेचल दिए कह यही, तू मेरी कौन है ?इक मुद्दत बाद देखा अभी आइनापूछने है लगा,  तू बता कौन है ?कौन...
लो मैंने बो दिया हैइश्क़ का बीजकल जब इसमें फूल लगेंगेवो किसी जाति मज़हब के नहीं होंगेवो होंगे तेरी मेरी मुहब्बत के पाक ख़ुशनुमा फूलतुम उन अक्षरों से मुहब्बत की नज़्म लिखनामैं बूंदों संग मिल हर्फ़ हर्फ़ लिखूंगी इश्क़ के गीतक्या ख़बर कोई चनाब फ़िरलिख दे इतिहासतेरे मेरे इश्क़ क...
आज ब्लॉग दिवस की सबको शुभकामनाएं देते हुए ... बारिश की बूंदों में भीगी भीगी सी इक नर्म सी नज़्म .....बारिश की पहली बूंद .....*******************खुली हथेलियों पेजब से गिरी है बारिश की पहली बूँदबन्द खिड़कियाँ ...द्वार खटखटाने लगीं हैहवाओं में रह रह गूँजता है इक शब्ददेह...
आज़ राखी के कुछ हाइकु  …सभी भाइयों को राखी की हार्दिक शुभकामनाएँ  ....***********1-रिश्तों का प्यार लिए आया है द्वार राखी त्यौहार। 2-राखी है भाईलिए बहना आई बाँधे कलाई। 3-छूटे न कभी तेरा मेरा ये प्यार भैया हमार 4-राखी की मौली लिए आई बहना अक्षत - रोली। 5-रक्...
मुरझाये फूल ..... ****************** कभी चाहतों के धागे से लिखा था मुहब्बत का पहला गीत इक हर्फ़ बदन से झड़ता और इश्क़ की महक फ़ैल जाती हवाओं में देह की इक-इक सतर गाने लगती रंगों के मेले लगते बादलों की दुनियाँ बारिशों के संग गुनगुनाने लगती आस्मां दोनों हाथों से आलिं...
इश्क़ इक खूबसूरत अहसास  ....तुमने ही तो कहा था मुहब्बत ज़िन्दगी होती है और मैंने  ज़िन्दगी की तलाश में मुहब्बत के सारे फूल तेरे दरवाजे पर टाँक दिए थे  तुमने भी खुली बाहों से उन फूलों की महक को अपने भीतर समेट लिया था उन दिनों पेड़ों की छाती से फूल झरते थे...
आज़ादी से पहले कुछ सवाल  .... जब मैं यहाँ लिख रही थी आज़ादी की कविता तुम वहाँ बुन रहे थे साज़िशों जाल किस तरह रचा जाये शब्दों का चक्रव्यूह जिसमें कैद होकर मेरी कविता ख़ुद -ब ख़ुद दम तोड़ दे शायद तुम भाँप गए थे कमजोर होती मेरी शब्दों की जमीं … सहसा गिर कर टूटने ल...
मुहब्बत की तक़दीर ....... इक अनलिखी तक़दीर जिसे दर्द ने बार -बार लिखना चाहा अपने अनसुलझे सवालों को लेकर आज भी ज़िंदा खड़ी है  .... नहीं है उसके पास मुस्कानों का कोई पैबंद जीने योग्य रात की हँसीउगते सूरज की उजास भरी किरणें फड़फड़ाते सफ़्हों पर वह लिखती है अधलिखि नज़्मो...
काला गुलाब  .... औरत ने जब भी मुहब्बत के गीत लिखे काले गुलाब खिल उठे हैं उसकी देह पर रात ज़िस्म के सफ़हों पर लिख देती है उसके कदमों की दहलीज़ बेशक़ वह किसी ईमारत पर खड़ी होकर लिखती रहे दर्द भरे नग़में  पर उसके ख़त कभी तर्जुमा नहीं होते इससे पहले कि होंठों पर क़ो...