ब्लॉगसेतु

कैद मुहब्बत ....तीखे दांतों से काटती है रात ....तेरे बिना जकड़ लेती है उदासीबेकाबू से हो जाते हैं ख्याल खिड़की से आती हवा सीने में दबे अक्षरों का पूछने लगती है अर्थ बता मैं उसे कैसे बताऊँ मुहब्बत की कोई सुनहरी सतररस्सियाँ तोड़ना चाहती है ....हीर ....(२)दरारे...
इक कोशिश ....ज़ख़्मी जुबान  मिटटी में नाम लिखती है कोई जंजीरों की कड़ियाँ तोड़ता  हैदर्द की नज़्म लौट आती है समंदर सेदरख्त फूल छिड़क कर मुहब्बत का ऐलान करते हैं मैं रेत से एक बुत तैयार करती  हूँ और हवाओं से कुछ सुर्ख रंग चुराकररख द...
मातृ दिवस पर कुछ हाइकु .........(१)संग है रोई हर दर्द मेरे माँदूजा  न कोई(२)माँ की ममतात्याग,तप,क्षमा की  रब्ब सी मूरत (३)इतनी प्यारी उसके आँचल में ज़न्नत सारी (४)गीत ग़ज़ल सबपर लुटाती प्रेम निश्छल (५ )माँ का कर्ज़ चुकाना है तुझको निभ...
मजदूर दिवस पर एक कविता .......भारत का मजदूर .... वह आता है सड़कों पर ठेले में बोरियां लादेभरी दोपहर और तेज धूप में पसीने से तर -बतर जलती है देह  ठेले पर नहीं है पानी से भरीकोई बोतल ..... वह आता है कमर झुकाए कोयले की खदानों से बीस मंजिल...
मित्रो , बेहद ख़ुशी की बात है आज मेरा पंजाबी का काव्य संग्रह .''खामोश चीखां '' ( खामोश चीखें ) छप कर आ गया है ....जोकि दिल्ली 'शिलालेख प्रकाशन' से प्रकाशित हुआ है .....इस पुस्तक के प्रकाशन का सम्पूर्ण श्रेय इमरोज़ जी को जाता है ...'शिलालेख प्रकाशन' से अब तक...
'अभिनव इमरोज़' पत्रिका  के अप्रैल अंक में मेरे कुछ हाइकू ......कुछ अन्य हाइकु .......1बिन रोए ही बहे आँखों से आँसू जख्मों की रात 2आँखों में बसी इक आग इश्क की प्यार ये कैसा ?3यह तो बता ऐ ! ठहरी ज़िन्दगी -‘जिऊँ  म...
 होली पर कुछ हाइकू ....उड़ा गुलाल ...........१उड़ा गुलालफिर आसमान में आई रे होली  ..!2रंग -रंगोलीमन हुआ फागुनी भांग की गोली ३ रंग प्रेम कामिल सारे रंग लोभुला दो बैर ।४दगाबाज तूखेलूँ न तुझ संगबैरी मैं होरी  ..! ( एक...
'महिला - दिवस' एक वेश्या की नज़र से     ....देर रात ....शराब पीकर लौटी है रात चेहरे पर पीड़ा के गहरे निशां मुट्ठियों में सुराख .चाँद के चेहरे पर भीथोड़ी कालिमा है आज उसके पाँव लड़खड़ायेआँखों से दो बूंद हथेली पे उतर आये भूख, गरीबी और मज़बूरी की मार ने...
'नव्या' पत्रिका में मेरी तीन कवितायेँ .... 'हीर' की तीन कविताएँ 27 Feb. 2013(1)       पत्थर  हुई औरत .... अनगिनत प्रार्थनाएं अनगिनत स्वर पर कोई भी शब्द स्पष्ट नहीं अर्थहीन शब्द तैर रहे हैं हवाओं में एक दिव्य गुंजन क्य...
रात इमरोज़ जी का फोन आता है  संग्रह में दो नज्में कम हो रही हैं ( मेरा पंजाबी का काव्य संग्रह वे छाप रहे हैं ) तुरंत लिख कर भेजो ...आज रात सोना मत ....रात भर सोचती रही क्या लिखूं ..? .अचानक ध्यान आया आज तो वेलेंटाइन डे है और रात इन नज्मों का ...