ब्लॉगसेतु

मेरी मृगनयनीबिटिया से दीदी बनने में लगे पांच सालदीदी से प्रेयसी बनने में लगे बीस साल प्रेयसी से पत्नी बनने में लगे चौबीस सालमां बनने में लगे पच्चीस सालमां से सास बनी जब हुए चौप्पन साल और अब दादी का संबोधन सुन रही हूँ-सत्तावन साल :)दुनिया में पहला कदम...
आप क्या कहते हैं?कई बार कोई पोस्ट पढ़ते पढ़ते मन में हजारों सवाल उठने लगते हैं या कई यादें ताजा हो जाती हैं टिप्पणीई में अगर सब लिखने लगें तो पूरी पोस्ट ही वहां बन जाये। ऐसा ही कुछ आज मेरे साथ हुआ।आज प्रवीण पांडे जी की पोस्ट पढ़ी, ' लिखना नहीं दिखना बंद हो गया था' htt...
ठप्पा लगवा लिए(भाग 2)सिंगापुर एअरपोर्ट से बाहर निकले तो देखा हमारे नाम की तख्ती ले कर कोई नहीं खड़ा। ट्रेवल ऐजेंट ने जो लोकल नंबर दिया था वो ढूंढ ही रहे थे कि एक महिला भागती हुई आयी, लेट होने के लिए माफ़ी मांगते हुए उसने जल्दी जल्दी वैन की डिक्की खोली और हमने सामान र...
ठप्पा लगवा लिए(भाग 1)उषा आगामी अकेडेमिक वर्ष के शुरुवात में इस नौकरी के अट्ठाइस साल पूरे कर रिटायर हो जायेगी। हमारे ग्रुप का एक और सदस्य चला जायेगा सोच कर ही मन उदास हो जाता है। दो महीने पहले अचानक उषा ने सुझाया कि क्युं न हम तीनों एक साथ छुट्टी मनाने चलें। झटपट प...
जुड़ी एक और कड़ी मनीष कुमार का जब मेल मिला कि वो अपने कॉलेज में ब्लोगिंग पर सेमिनार करने जा रहा था तो सिद्धार्थ जी के वर्धा में करवाये सेमिनार की सुखद यादें ताजा हो गयीं। फ़िर ये सेमिनार तो हमारे घर से महज 50 कि मी...
अमूमन जब सुबह कॉलेज सवा सात बजे पहुंचते हैं तो इधर उधर देखने की फ़ुरसत नहीं होती, लपकते, फ़ांदते, हांफ़ते क्लास में भागे चले जाते हैं। पर कल की तो बात ही कुछ और थी। सुबह पौने आठ बजे पहुंचे, हलकी हलकी खुशनुमा ठंड में एक लंबी सांस ले ताजी हवा अपने नथुनों में भरनी चाही...
 पोस्ट लेवल : लेख
कहते हैं कि बोलने वाले अक्सर दूसरों को सुन नहीं सकते, सिर्फ़ अपनी ही हांकते रहते हैं। यही हाल हम टीचरों का है, किसी और के भाषण में अपनी आखें खुली रखना बहुत मुश्किल होता है। तो जब श्रीमाली जी ने पहले वक्ता को बुलाया, हमने मन ही मन गिनना शुरु कर दिया कि मंच पर कितने...
 पोस्ट लेवल : लेख
ये मेरा सौभाग्य है कि अनंत श्रीमाली जी मुझे नियमित रूप से हिन्दी साहित्यिक जगत के  विविध कार्यक्रमों में आमंत्रित करते रहते हैं और मेरा दुर्भाग्य है कि मुझे अक्सर उनके निमंत्रण को अपनी व्यस्तता के चलते नजर अंदाज करना पड़ता है। पिछले हफ़्ते भी श्रीमाली जी का एस म...
 पोस्ट लेवल : लेख
समीर जी ये रही धनेश की फ़ोटो। फ़ोटो लेती रचना जी, फ़ोन पर सिद्धार्थ जी, धनेश जोशी, और गायत्री ले हाथों में हाथ ओ साथी चलSSSSSकविता जी और मेरे हाथ हरसिंगार के फ़ूलों के साथ धनेश से हमें पता लग चुका था कि शैलेश भारतवासी, सुरेश चिपलूनकर जी, जय कुमार झा,...
संगोष्ठी से करीब 15 दिन पहले पता चला कि सिद्धार्थ जी ने ‘ब्लोग एथिक्स’ पर किसी संगोष्ठी का आयोजन किया है। सिद्धार्थ जी ने जो संगोष्ठी इलाहाबाद में की थी उसकी रिपोर्ट्स अभी तक हमारे दिमाग में तरो ताजा थीं। ब्लोगजगत के दिग्गज ब्लोगरों को रु ब रु हो कर सुना जा सकता है...