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हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर दैनिक जागरण के आयोजन में एक सत्र का विषय था, गांधी और हिंदी। इस सत्र में वक्ताओं ने गांधी के हिंदी प्रेम को रेखांकित किया। इस चर्चा में एक बात सामने आई कि गांधी हिंदी को राष्ट्रभाषा के तौर पर स्थापित करना चाहते थे। दरअसल गांधी शुरुआत म...
पिछले दिनों इस तरह की खबरें आई कि सरकार वेब सीरीज पर दिखाई जानेवाली सामग्री को लेकर विचार विमर्श शुरू करने जा रही है । खबरों के मुताबिक सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि वेब सीरीज पर जो कुछ भी दिखाया जा रहा है उसको लेकर इस महीने से मंथन शुरू हो रहा है। पिछले दिनों...
इन दिनों एक बार फिर से बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखिका अरुंधति राय चर्चा में हैं। 2011 में दिए उनके एक भाषण के अंश को पाकिस्तानी मीडिया ने भारत को बदनाम करने की नीयत से छाप दिया। पाकिस्तान के हुक्मरानों ने भी उसकी आड़ में भारत को घेरने की कोशिश की। अरुंझति के उस ब...
अमृत कौर। सौ साल पहले एक ऐसी शख्सियत का जन्म हुआ था जिसने अपनी लेखनी और अपने व्यक्तित्व से भारतीय साहित्य को गहरे तक प्रभावित किया और दुनिया उसको अमृता प्रीतम के नाम से जानती है। उन्होंने जो जिया उसको ही लिखा । अविभाजित भारत में पैदा हुई अमृता को साहित्य का संस्कार...
 पोस्ट लेवल : इमरोज अमृता प्रीतम
लगभग एक पखवाड़े पहले पटना में रहनेवाले हिंदी के उपन्यासकार रत्नेश्वर ने फेसबुक पर एक टिप्पणी लिखी, ‘इस समय हिन्दी के कई सुपर हिट गीत लिखने वाले मनोज मुंतशिर के साथ एक शाम। मनोज मुंतशिर ने ‘तेरी गालियां’ से लेकर ‘तेरे संग यारा’, ‘मेरे रश्के-कमर’ आदि अनेक लोकप्रिय गी...
चित्रा मुद्गल हिंदी की वरिष्ठ कथाकार हैं। अपने जीवन में पचहत्तर बसंत देख चुकी चित्रा मुद्गल पिछल छह दशक से सृजनरत हैं। उनको साहित्य अकादमी समेत कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्होंने गुजराती और मराठी में भी कविताएं लिखी हैं। ुउन्होंने दिल्ली शहर के अपने...
हाल ही में ललित कला अकादमी ने अपना स्थपना दिवस समारोहपूर्वक मनाया। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में भारत सरकार के संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल समेत कला जगत के कई मूर्धन्य उपस्थित थे। अपने संबोधन में ललित कला अकादमी के अध्यक्ष और प्रतिष्ठित कलाकार उत्तम पचारणे...
इस वक्त हिंदी के सबसे समादृत लेखकों में से एक नरेन्द्र कोहली ने लंबे समय तक दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। उन्होंने भारतीय पौराणिक चरित्रों पर विपुल लेखन किया है। उनको पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। अभी वे केंद्रीय फिल्म प्रमाणण बोर्ड के सदस्य हैं। उन्हों...
भाषा का प्रश्न हमारे देश में रह-रहकर उठता रहता है। यहां भाषा हमेशा से संवेदनशील मुद्दा रहा है। भाषा के सवाल पर देश ने आजादी के बाद हिंसा भी देखी है। अभी हाल ही में नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट में हिंदी को प्रमुखता देने की एक खबर से ये विवाद फिर से उठ खड़ा हुआ है। तमि...
कम्युनिस्ट पार्टियों से संबद्ध लेखकों के अपने-अपने संगठन हैं। सीपीआई की प्रगतिशील लेखक संघ है, सीपीएम की जनवादी लेखक संघ है, सीपीआई-एमएल की जन संस्कृति मंच है। इन लेखक संगठनों की स्थापना चाहे जिस भी उद्देश्य से हुई हो लेकिन पिछले कई वर्षों में ये अपने अपने राजनीतिक...