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हिंदी फिल्मों के इतिहास में सलीम-जावेद की ऐतिहासिक जोड़ी को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। पंद्रह साल तक एक साथ फिल्में लिखने वाली जोड़ी जिसने ‘शोले’, ‘दीवार’, ‘जंजीर’ और ‘डॉन’ जैसी सुपर हिट फिल्में लिखीं। उस दौर में सलीम-जावेद की लिखी फिल्में सफलता की गारंटी मानी जात...
गणतंत्र दिवस पर लाल किला में कवि सम्मेलन की परंपरा बहुत पुरानी रही है, एक जमाने में इस कवि सम्मेलन की दिल्ली के साहित्यप्रमियों को प्रतीक्षा रहती थी और वहां श्रोताओं की संख्या काफी होती थी। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी इस कवि सम्मेलन में वहां जाया करत...
 पोस्ट लेवल : दिनकर लाल किला नेहरू
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलए) एक ऐसा साहित्य महोत्सव है जो पूरी दुनिया के साहित्यप्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। हर वर्ष जनवरी के महीने में जयपुर के ऐतिहासिक डिग्गी पैलेस में आयोजित होनेवाले इस लिटरेचर फेस्टिवल में देश-विदेश के तमाम मशहूर लेखकों का जमावड़ा ह...
अजय देवगन की फिल्म तान्हाजी ने एक बार फिर से ये साबित किया कि दर्शकों की अपने ऐतिहासिक चरित्रों में खासी रुचि है। ये फिल्म रिलीज के पहले ही सप्ताह में सौ करोड़ के कारोबारी आंकड़ें को पार करके अपनी सफलता का परचम लहरा चुकी है। जबकि इसके साथ ही दीपिका पादुकोण की फिल्म...
रितु नंदा एक ऐसी शख्सियत थीं जो दिल्ली के कारोबारी जगत से लेकर कला की दुनिया में अपने संवेदनशील स्वभाव की वजह से जानी जाती थीं। वो मसङूर अभिनेता और हिंदी फिल्मों के सबसे बड़े शो मैन राज कपूर की बेटी और एस्कॉर्ट कंपनी के मालिक राजन नंदा की पत्नी थीं। लेकिन इससे इतर...
 पोस्ट लेवल : राज कपूर रितु नंदा
दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘छपाक’ रिलीज हो गई और फिल्म कारोबार के जानकारों के मुताबिक उसकी फिल्म को अपेक्षित ओपनिंग नहीं मिल पाई। फिल्म के दर्शकों के पसंद करने के पूर्वानुमान के आंकड़ों से भी कम की ओपनिंग मिली। पहले दिन की जो ओपनिंग मिली है वो भी संतोषजनक नहीं कही जा...
आज दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘छपाक’ रिलीज हो रही है। इसके दो दिन पहले अचानक शाम को ये खबर आई कि दीपिका पादुकोण जवाहलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के आंदोलनकारी छात्रों के बीच पहुंच गई। इस खबर के साथ ही सोशल मीडिया पर घमासान मच गया। ट्वीटर के बयानवीरों ने इसको दीपिक...
पाकिस्तानी वामपंथी शायर फैज अहमद फैज एक बार फिर से चर्चा में हैं। ये चर्चा गैर साहित्यिक विवाद की वजह से शुरू हुई। इसमें साहित्य के कई विद्वान कूद गए और इसको एक अलग ही रंग देने की कोशिश शुरू कर दी। आईआईटी कानपुर में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन में फैज क...
मुझे ठीक से याद है कि दिसंबर 1996 की बात है, मैंने एक दिन प्रभात प्रकाशन के बोर्ड नंबर पर फोन किया था। फोन उठानेवाले को बताया कि मैं एक साहित्यिक पत्रिका के लिए सालभर में छपी महत्वपूर्ण किताबों पर एक लेख लिख रहा हूं। मुझे प्रभात प्रकाशन के कर्ताधर्ता से बात करनी है...
देश में आर्थिक मंदी पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के बयान का खूब मजाक बना था। रविशंकर प्रसाद ने तब कहा था कि जहां एक दिन में फिल्में सौ करोड़ से अधिक कमा रही हैं तो मंदी कैसे हो सकता है। जब उनका ये बयान आया था तब उसका ना सिर्फ मजाक बना था बल्कि विपक्ष समेत कई स्वत...