ब्लॉगसेतु

(अब तक: सच्चाई जानने के बाद बड़के दादा ने तिवारी को बुला भेजा. इस अचानक बुलावे ने तिवारी जी को संशय में डाल दिया. घर आ के भी तिवारी जी को कुछ खबर न लगी कि हुआ क्या? बस सुमित्रा जी को आनन-फ़ानन साथ ले जाने का आदेश हो गया. अब आगे-)’दादी...... कब से ढूंढ रहां हूं आ...
(अब तक- आज कोई गम्भीर मसला सामने आने वाला था, तभी तो छोटी काकी ने घर के पुरुष वर्ग को नाश्ते के बाद चौके में ही रुके रहने को कहा था. क्या था ये मसला? पढ़िये-)घर के सारे आदमियों ने नाश्ता कर लिया तो काकी की आवाज़ गूंजी-’अबै उठियो नईं लला. बैठे रओ. कछु जरूरी बात क...
(पिछले अंक में-बड़े दादाजी की शादी का जब ज़िक्र चला तो सुमित्रा जी को तुरन्त कुन्ती की याद आई. कुन्ती, जिसके ब्याह के लिये बाउजी कब से परेशान थे. लेकिन मंगली होने के कारण कोई बढ़िया रिश्ता ही न मिल रहा था. अब आनन-फ़ानन रिश्ता तय हो गया. ब्याह की तैयारियां होने लगीं. अब...
(अब तक आपने पढ़ा......सुमित्रा जी यानी सीधी सरल महिला. लेकिन उनके जीवन में उनकी ही बहन कुन्ती ने उथल-पुथल मचा दी. तरह तरह के नुस्खे आजमाती कुन्ती और उन्हें झेलती सुमित्रा. आइये पढ़ें इन बहनों की ज़िन्दगी से जुड़े अन्य किस्से और शान्त करें अपनी जिज्ञासा)अज्जू ने आनन-फान...
 पोस्ट लेवल : लम्बी कहानी भदूकड़ा
सुमित्रा जी का रहन सहन सब शुरु में ही जान गये थे. बड़े भाईसाब ने ताकीद कर दिया था सबको कि इतने बड़े अफ़सर के घर की पढ़ी-लिखी लड़की है सो कोई भी उल्टी-सीधी बात न हो उससे. तहसीलदार साब ने बड़े नाज़ों से पाला है अपनी बेटियों को, इस बात का भी ख़याल रखा जाये. उसे रसोई के अलावा...
“सुनिये, वो कुंती आयेगी एकाध दिन में...!” कहते हुए सकुचा गयीं सुमित्रा जी.“कौन, कुंती भाभी? हां तो आने दो न. उन्हें कौन रोक पाया है आने से? अरे हां, तुम अपनी चोटी, साड़ियां, और भी तमाम चीज़ों का ज़रा खयाल रखना ” होंठों की कोरों में मुस्कुराते हुए तिवारी जी बोले. “सब च...
सुमित्राजीकेबड़ेभाई, यानी बड़के दादा कुंती की हरक़तों को समझते थे, लेकिन स्वभाव से ये भी सुमित्रा जैसे ही थे, सो भरसक वे कुंती को समझाने की कोशिश ही करते, ये ज़ाहिर किये बिना कि वे उसकी हरक़त ताड़ गये हैं. बड़ी जिज्जी अम्मा के साथ रसोई में लगी रहती थीं, सो उन्हें फुरसत ही...
उत्तरप्रदेशकेएकछोटेसेकस्बे कीकहानीहैये. कस्बा छोटा, लेकिन रुतबे वाला था. और उससे भी अधिक रुतबे वाले थे वहां के तहसीलदार साब - केदारनाथ पांडे. लम्बी-चौड़ी कद काठी के पांडे जी देखने में तहसीलदार कम, थानेदार ज़्यादा लगते थे. बेहद ईमानदार और शास्त्रों के ज्ञाता पांडे जी...
“जिज्जी….. हमेंअपनेपासबुलालो…” बस ये एक वाक्य कहते-कहते ही कुंती की आवाज़ भर्रा गयी थी. और इस भर्राई आवाज़ ने सुमित्रा जी को विचलित कर दिया. मन उद्विग्न हो गया उनका, जैसा कि हमेशा होता है. जितनी परेशान कुंती न  होरहीहोंगीं, उतनी सुमित्रा जी हो गयी थीं. मोबाइल पर...
 पोस्ट लेवल : कहानी भदूकड़ा
जब भी लघु कथाएं पढ़ती हूं, तो चकित होती हूं कि कैसे कोई इतनी बड़ी-बड़ी बातें, जिन्हें लिखने में कहानीकार पृष्ठ दर पृष्ठ भरता चला जाता है, चंद शब्दों में व्यक्त कर पाता है? वो भी इस विशेषज्ञता के साथ कि भाव कहीं भी अपना अर्थ नहीं खोते. दीपक मशाल उन्हीं चंद लघुकथाकारों...