ब्लॉगसेतु

शुभनीत कौशिक इतिहास के अध्येता हैं और अध्यापक भी. अध्ययन और शोध के क्रम में अपने द्वारा पढ़ी गई किताबों के बारे में वो अक्सर लिखते हैं ताकि व्यापक समाज उस किताब के महत्व से अवगत हो जाए. उनका शोध लेख महत्वपूर्ण जर्नलों में प्रकाशित हैं और वो अनुवादक भ...
भारत रंग महोत्सव 2020 अर्थात भारंगम 2020 में होने वाले चयनित नाटकों की सूची आ गई है। जब भी कोई सूची आती है तो उससे असन्तोष भी होता है कोई भी सूची सबको सन्तुष्ट नहीं कर सकती। लेकिन जब से सूची आई है तब से निरन्तर विवाद हो रहा है खासकर हिंदी रंगमंच में। सवाल...
 पोस्ट लेवल : भारंगम रानावि NSD BRM
रामकथा की व्याप्ति की तरह उसके प्रदर्शन परंपरा के अलग अलग रूपों की व्याप्ति भी रही है और जिसकी वैश्विक उपस्थिति है. रामकथा को श्रोता- दर्शकों के बीच पेश करने की परंपरा के चार पक्ष रहे हैं मौखिक, साहित्यिक, प्रदर्शन और रूपांकन. इन चारों परंपराओं में मौखिक और प...
 पोस्ट लेवल : Ramleela रामलीला folk arts
दीनानाथ मौर्य, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में सहायक प्राध्यापक हैं. नाटक और रंगमंच के साथ शिक्षाशास्त्र इनकी विशेषज्ञता और रूचि का क्षेत्र है. 'यूनिवर्सिटी थियेटर' इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा बनाया गया समूह है जो अभी एक साल क...
'हत्या एक आकार की' ललित सहगल द्वारा लिखित नाटक है जो अब मुश्किल से उपलब्ध है। एम. के. रैना ने इस नाटक को निर्देशित कर इसे पुनर्जीवित किया है। एम. के. रैना निर्देशित प्रस्तुति को देखने का मौका इलाहाबाद में मिला। नाटक गांधी जी के सिद्धांतों और कार्यकलाप की बुनि...
भारतीय रंगमंच को समझने के लिए किसी एक किताब का नाम लीजिए? इस सवाल के जवाब में अगर ‘रंग दर्शन’ का नाम लिया जाए तो शायद ही किसी को आपत्ति हो. ‘रंग दर्शन’ भारतीय रंगमंच की प्रवृतियों, विशेषताओं, सौंदर्य, सामाजिकता, ऐतिहासिकता, व्यवहारिकता आदि को एक साथ समझने...
प्रवीण शेखर वरिष्ठ नाट्य निर्देशक हैं, इलाहाबाद के रंगकर्म को उन्होंने एक पेशेवर तेवर और स्तर दिया है. देश के रंगकर्म में उनकी सार्थक उपस्थिति भी है. वो ऐसे रंगकर्मियों में हैं जो पढ़ने और लिखने में भी निरंतर सक्रिय रहते हैं, रंग आलोचना उनकी ए...
मोटले के सदस्य 2010 का भारत रंग महोत्सव था. कमानी सभागार में मैंने हर्मन वुक के नाटक ‘केन म्युटिनी- द कोर्ट मार्शल’ का मंचन देखा. लगभग ढाई घंटे की अंग्रेजी प्रस्तुति को देखना एक रोचक अनुभव था. युद्ध और कोर्ट मार्शल की नाटकीयता और निरर्थकता को प्रस्तुति मे...
Courtesy- Newslaundry Hindiगिरीश कर्नाड, नहीं डॉ. गिरीश कर्नाड ... नाम जेहन में आते ही वो बेधने वाली तस्वीरें सामने आ जाती है जिसमें एक शख्स नाक में ड्रिप लगाए ‘नॉट इन माई नेम’ की तख्ती लिए हुआ खड़ा है, जो अपने समय में अपनी उपस्थिति को भौतिक रूप से भी दर्ज कर...
बिरजु महाराज पर लिखी मनीषा  कुलश्रेष्ठ की किताब की चर्चा कर रहे हैं प्रवीण झा. प्रवीण जी के लेख पहले आप रंगविमर्श पर पढ़ चुके हैं. किताब का प्रकाशन रज़ा फाउंडेशन के लिए नई  किताब  ने किया  है.‘बिरजूलय’ किताब जब हाथ में आई, तो अवध से जुड़ी कुछ और...