ब्लॉगसेतु

मौसम अपने संक्रमण काल में है|धीरे धीरे बादलों में पानी जमा हो रहा है पर बरसने को तैयार नहीं...शायद उनकी आसमान से यारी छूट नहीं रही !मोहब्बत,यारियों और बादलों के भी अपने निराले ढंग हैं...मनमर्ज़ियों वाले!सूनी दोपहर को मैं छत से कपड़े उठाने गयी तो सामने सड़क के उस पार ल...
बदलते दौर में सब कुछ अलग सूरत अख्तियार करता जा रहा है.....यहाँ तक की भावनाएं भी बदल गयी हैं....सोच तो बदली ही है|प्रेम जैसा स्थायी भाव भी कुछ बदला बदला लगने लगा है...दैनिक भास्कर की पत्रिका अहा! ज़िन्दगी में प्रकाशित मेरी लिखी आवरण कथा आपके साथ साझा कर रही हूँ| उम्म...
दैनिक भास्कर की पत्रिका - अहा ! ज़िन्दगी  में प्रकाशित मेरी एक आवरण कथा.... बदलाव में छुपा है भविष्यसमूचे ब्रह्माण्ड में जो भी बना है उसे मिटना होता है,नव निर्माण के लिए ये एक आवश्यक शर्त है और प्रकृति का नियम भी |वक्त के साथ संस्कृति बदलती है, समाज बदलता...
बहुत दिनों से कविता या नज़्म लिखना जैसे बंद ही हो गया था.....कहानियाँ लिखते लिखते जैसे छंद रूठ गए हों मुझसे.....मन के सारे भाव गद्य बन कर ही निकलते....मगर शायद मन को मनाना आता है......लिखी है एक कविता आज....अच्छा लगा ब्लॉग पर आना भी.....सितोलियाखेलने की उम्र थी हाँ!...
 पोस्ट लेवल : कविता
+++++++++ हंसती हुई लड़कियों के भीतर उगा होता है एक दरख़्त उदासियों का, जिनमें फलते हैं दर्द बारों महीने... और ठहरी हुई उदास आँखों वाली लड़कियों के भीतर बहता है एक चंचल झरना मीठे पानी का... आसमान की ओर तकती लड़कियों में नहीं होती एक भी ख्वाहिश एक भी उम्मीद , कि उसन...
 पोस्ट लेवल : कविता
इस बार "विश्व पुस्तक मेला " देखने दिल्ली जाना हुआ.....अपने पहले काव्य संग्रह "इश्क़ तुम्हें हो जाएगा "को प्रकाशक "हिन्दयुग्म" के स्टाल पर सजा हुआ देखने का अपना ही सुख था... कुछ प्रिय पाठकों  को हस्ताक्षरित प्रति देते समय जो अनुभूति हुई वो अविस्मर्णीय है!काव्य स...
 पोस्ट लेवल : book fair
एक दर्द सा बहता आया हैकुछ चीखें उड़ती आयीं है दहशत की सर्द हवाओं के संगखून फिजां में छितराया है....कुछ कोमल कोमल शाखें थींकुछ कलियाँ खिलती खुलती सींएक बाग़ को बंजर करने को ये कौन दरिंदा आया है ?हैरां हैं हम सुनने वालेआसमान भी गुमसुम है,कतरा कतरा है घायल हर इक ज़र्रा घ...
सुनिये मेरी लिखी कहानी -" शिवकन्या " नीलेश मिश्रा की जादुई आवाज़ में........:-)just click the link.. आप मेरी लिखी सभी कहानियां you tube पर सुन सकते हैं ! मेरा नाम और यादों का इडियट बॉक्स सर्च करें बस :-)यादों के इडियट बॉक्स में - मेरी लिखी कहानी "शिवकन्या "*********...
 पोस्ट लेवल : कहानी for 92.7
दर्द का कोई आकार नहीं होतादुःख का कोई रंग नहींमहकती नहीं उदासियाँ  मन के सारे भेद खोल देती हैएक आह !उलझे बालों की लटेंकसी मुट्ठियाँऔर भिंचे दांत !!उतरे चेहरे,शिकन पड़ा हुआ माथा पपडाए होंठआवाज़ की लर्जिश और गुलाबी डोरों वाली आँखेकर देती हैं चुगलियाँ !वरना रंजो ग़म...
पढ़िए मेरी लिखी कहानी -  "मिष्टी' जो मध्यप्रदेश जनसंदेश के साप्ताहिक "कल्याणी " में आज प्रकाशित हुई है | “ मिष्टी “मुझे इसी घर में रहना है , इसी घर में...बस !! कहते हुए मिष्टी अमोल के गले से झूल गयी | अरे बाबा रुको तो ज़रा, देखने तो दो कि घर में कमरे क...