ब्लॉगसेतु

 नव उमंगों को सजाने आस के उम्मीद के फिर बन रहें हैं नव ठिकानेभोर की पहली किरण भी आस मन में है जगातीएक कतरा धूप भी, लिखने लगी नित एक पातीपोछ कर मन का अँधेरा ढूँढ खुशियों के खजानेसाल नूतन आ गया हैनव उमंगों को सजानेरात बीती, बात बीती&nbsp...
 पोस्ट लेवल : गीत
अभी एक रचना यूँ ही बैठे बैठे — पहली बार स्त्री विषयक एक स्त्री अपना सब कुछ न्यौछावर कर देती एक स्त्री पुरुष के बिना कहे उसकी हर छोटी ज़रूरतों का ध्यान रखती है वही स्त्री पुरुष द्वारा हिरणी सी कुचली भी जाती है एक स्त्रीमाँ बनक...
 पोस्ट लेवल : कविताएँ
कोविड-19 महामारी के कारण  विश्वभर में हालात काफी  बदलें हैं . वहीं युवाओं की जीवन शैली में काफी बदलाव आया है . उनके जीने का नजरिया बदलने लगा है.  बड़ी-बड़ी फर्म व कंपनी में मासिक वेतन के अतिरिक्त अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध होती हैं .आजकल के युवा अपने वे...
 पोस्ट लेवल : Article
कुल्लड़ वाली चाय यह मन को है ललचाय दूध मलाई जब डले स्वाद अमृत बन जाए कुल्लड़ वाली चाय की, सोंधी सोंधी गंध और इलाइची साथ में,पीने का आनंद बांचे पाती प्रेम की, दिल में है तूफाननेह निमंत्रण चाय का, महक रहे अरमानकागज कलम दवात हो और साथ में चाय स्फूर्ति तन मन भरे, भाव...
 पोस्ट लेवल : दोहे
अकेलापन सताने लगा था। प्रणव से दो शब्द सुनने की आशा में उमंगो की कलियाँ मुरझा जाती थी। कभी कुछ पूछो तो जबाब भर ही मिलता था. यहाँ तक कि प्रेम के एकांत पलों मेेें भी जिंदगी रसविहीन थी। शब्द कोष खाली था। मेरे लिए परिस्थितियों को समझना बहुत कठिन होता जा था. आखिर हम कैस...
 पोस्ट लेवल : कहानी
" नया आकाश ’’दोपहर के 1 बजे फोन की घंटी बजी, पलक के हेल्लो के जबाब में दूसरी तरफ से प्रणव की आवाज थी.’’ पलक, बधाई हो ! तुम्हें इस साल तुम्हारे उपन्यास ’’ नीड़ ’’ के लिए सम्मानित किया जा रहा है.’’ क्या ’’ खुशी व सुखद आश्चर्य से पलक की आवाज में कम्पन आ गया, शब्द गले म...
 पोस्ट लेवल : कहानी
@page { margin: 2cm } p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 115% } @page { margin: 2cm } p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 115% } @page { margin: 2cm } p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 115% } @page { margin: 2cm } p { margin-...
 पोस्ट लेवल : Article
@page { margin: 2cm } p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 115% }      जहाँ आदमी अपने को रोज बेचता है मई महीने हम मजदूर दिवस मनाते थे और इसी महीने हम सबने मजदूरों की दुर्दशा होते हुए देखी है , लाक डाउन में मजदूरों की बेबसी सै...
 पोस्ट लेवल : Article
@page { margin: 2cm } p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 115% } कोरोना अभिशाप में भी वरदानआज भी रोज सूरज सुबह उगता है , सांझ रात के आगोश में सपनों की मीठी गोली दे कर सो जाती है, न मौसम के चक्र बदले​, ना पृथ्वी का घूमना. आज भी चांद अपनी चांदनी यूं ही...
 पोस्ट लेवल : Article
 समय की दरकारबेबसी में जल रहे हैं पांव तो कहीं भूख से बिलख रहे हैं गांव, हर तरफ फैली हुई त्रासदी है. मौत का हाहाकार और जिंदगी में उदासी है . यह समय इतिहास के पन्नों पर स्याह दिवस की कालिख मल रहा है. हर तरफ लाशें बिछ रही है. कहीं कोरोना जिम्मेदार है तो कहीं भूख...
 पोस्ट लेवल : Article