ब्लॉगसेतु

औरत की इज्जतएक चाय की प्याली हो गयीजिसेजिसने पिया - तोअकेले नहीं दोस्तों के संगक्या ये अबलत बन चुकी है। जो इंसान के जमीर मेंशामिल नहीं है  -औरत की इज्जत करना। और समाज उसेकितनी जलालत भरीनजर से देखती है,घुट घुट कर जीने के लिएमजबूर होती है,क्योंकिउस पीड़ा का अहसास...
रिश्ते हैंएक पौधपलते है जोदिल की माटी में,प्यार का पानी दें,हवा तो दिल देता हैफिर देखो कैसे ?हरे भरे होकर वेजीवन महका देंगे।अकेले और सिर्फअपनों की खातिरअपने सुख की खातिरजीना बहुत आसान है ,सोच बदलोऔरों के लिए भीजीकर देखो तो सहीबहुत  कुछ  सिखा देंगे . .।पान...
जब जब बढ़े अधर्म धरा पर,धैर्य धर संयत तो रहना होगा,मन से स्मरण  कर शक्ति का,              मन की दुर्बलताओं को हरना होगा।             तुम्हें आह्वान शक्ति का करना होगा ।वो शक्ति स्वरूपा दुर्गा...
जन्मी कल थी,उतर गोद से माँ की,नन्हें नन्हें कदमों सेअभी अभी चलना सीखा ।अँगुली माँ की छोड़अभी तक न चलना आया था ।सुनती शोर दूर तोदौड़ छिप जातीमाँ के आँचल में ,अभी नहीं आया था,आँगन पार करना भी ,हाथ पकड़ कर बाबा का,करती थी पार गली में ।नहीं जानती कौन है अपनाकौन पराया मानु...
आंधियां चल रहीं थी कशमकश की,हम खड़े खड़े तय न कर सके मंजिलें।एक एक कर गुजर गए सब अपने ,हम इन्तजार में देखते रहे काफिले। अपने  से कोई सपना भी  न मिला सका।चलते चलते ख़त्म हो गए  ये सिलसिले। इन्तजार कहाँ तक करें कुछ भी पाने का?बीच में ही ले उड़े मेरे...
शक्ति और अधिकार काजब होने लगे दुरूपयोग ,तब ही होने लगता हैपरिणत वियोग में संयोग ,हरदम मुस्कराती आँखेंजब आंसुओं से भर जाती हैं। दारुण दुःख की पीड़ा भीवे मूक बन सह जाती हैमूक, त्रसित औ' उत्पीड़ितझर-झर बहते अश्रु कणन मुखरित हो, न हो रुदितयंत्रणा की पीड़ा सहे हर...
बेटियां कब माँ बन जाती हैं , यह कोई समझ नहीं सकताक्योंकिजब तक उनको आंचल में रखाउनकी परवरिश की ,वे बेटियां होती है । और जब वे सब समझने लगतीं हैं, अपने पैरों पर खड़े होकर चलने लगती हैंतब उनकी आंखें वह सब कुछ देख लेती है,जो मां को पिता को चाहिए होता है,...
अरे वनितातुम आज भीसुन रही अपशब्द,सह रही होअपने जनक - जननी के लिएसदियों से चले आ रहेवही जुबान पर बसे  विशेषण।अपना सर्वश्रेष्ठ देकर  भी सुनती हो हर उस इंसान के कटाक्ष ,जो ससुराल नाम के तीर्थ में पैदा हुआ है।हाँ,इनसे बड़ा तोहफा भी तो है ,कभी पति की  गालि...
सावन में अब फुहारें नहीं पड़ती न हरी चूड़ियों की खनखनाहट सुनाई देती है। हरियाली तीज अब हरियाली को तरसती है ,शादी के बाद पहला सावन मायके के होता था ,सावन होता था बेटियों का त्यौहार मैके से विदा नहीं होती थीं माँ की देहरी पर...
खुलेआसमान मेंविहान से उड़ते रहोपतंगमत बनना कभी।वो पतंगजोडोर दूसरों को देकरआसमान मेंनचाई जाती है ,न मर्जी  से उड़ती हैऔर न मर्जी से उतरती है।हाँ वहकाट जरूर दी जाती है ,और बेघर सीकहीं से कटकरकहीं और जाकरजमीं मिलती है उसे।अपने पैरों कोउन्मुक्त आकाश मेंफैलाये हुएअपन...