ब्लॉगसेतु

मौतएक सचहम जानते हैं,उसकी आहट पहचानते हैं ,फिर भीस्वीकार नहीं कर पाते ।जीवन दीप कोकाल के झंझावातों से बचाने कोदोनों हाथों सेया कहें जितने जोड़ी हाथ होंसब मिलकर भीउसे बुझने से बचा नहीं पाते हैं।एक साँस और उसके थमने केबीच का फासलासब कुछ ले जाता है -किसी के सिर की छाया...
क्या फर्क पड़ता है !इन शब्दों को अक्सर सुना है,लेकिनये वाक्य जेहन में आता ही तभी है,जब वाकई कुछ फ़र्क पड़ता है ।अपने मन समझाने को,औरों को दिखाने को,टूट कर सिमटने के भ्रम में जीने को,याफिर उस कष्ट को जीने का साहस जुटाने को। क्या फ़र्क पड़ता है !बहुत गहरे अर्थ रखता ह...
मौत !वो इतनी करीब खड़ी है ,नहीं देख पाते हैं अपने ,जिंदगी की उम्मीद मेंजलाये आशा का दियाझंझावातों से बचाने कोआस्था की ओट लगाये बैठे है ।जिसे वह दिख रही है ,शायद श्वान नेत्रों सेचुपचाप खड़े हैं,"चिंता मत करो, सब ठीक हो जायेगा।"दिलासा की एक मोमबत्ती पकड़ा करएक एक कर चलन...
जब पलटती हूँ अतीत के पन्नों कोकुछ लम्हे, कुछ बातें,जेहन में बसी हैं आज भी ,कुछ तस्वीरें चस्पा हैं मित्रों की ।एक उदासी भीचुरा लेती थी हँसी सबकी, नजरें तो लगी होती है चेहरे पर  उदासी का सबब जानने कोबात कुछ और थी ऐसे  मित्रों की ।ऐसे ही इस दि...
औरत की इज्जतएक चाय की प्याली हो गयीजिसेजिसने पिया - तोअकेले नहीं दोस्तों के संगक्या ये अबलत बन चुकी है। जो इंसान के जमीर मेंशामिल नहीं है  -औरत की इज्जत करना। और समाज उसेकितनी जलालत भरीनजर से देखती है,घुट घुट कर जीने के लिएमजबूर होती है,क्योंकिउस पीड़ा का अहसास...
रिश्ते हैंएक पौधपलते है जोदिल की माटी में,प्यार का पानी दें,हवा तो दिल देता हैफिर देखो कैसे ?हरे भरे होकर वेजीवन महका देंगे।अकेले और सिर्फअपनों की खातिरअपने सुख की खातिरजीना बहुत आसान है ,सोच बदलोऔरों के लिए भीजीकर देखो तो सहीबहुत  कुछ  सिखा देंगे . .।पान...
जब जब बढ़े अधर्म धरा पर,धैर्य धर संयत तो रहना होगा,मन से स्मरण  कर शक्ति का,              मन की दुर्बलताओं को हरना होगा।             तुम्हें आह्वान शक्ति का करना होगा ।वो शक्ति स्वरूपा दुर्गा...
जन्मी कल थी,उतर गोद से माँ की,नन्हें नन्हें कदमों सेअभी अभी चलना सीखा ।अँगुली माँ की छोड़अभी तक न चलना आया था ।सुनती शोर दूर तोदौड़ छिप जातीमाँ के आँचल में ,अभी नहीं आया था,आँगन पार करना भी ,हाथ पकड़ कर बाबा का,करती थी पार गली में ।नहीं जानती कौन है अपनाकौन पराया मानु...
आंधियां चल रहीं थी कशमकश की,हम खड़े खड़े तय न कर सके मंजिलें।एक एक कर गुजर गए सब अपने ,हम इन्तजार में देखते रहे काफिले। अपने  से कोई सपना भी  न मिला सका।चलते चलते ख़त्म हो गए  ये सिलसिले। इन्तजार कहाँ तक करें कुछ भी पाने का?बीच में ही ले उड़े मेरे...
शक्ति और अधिकार काजब होने लगे दुरूपयोग ,तब ही होने लगता हैपरिणत वियोग में संयोग ,हरदम मुस्कराती आँखेंजब आंसुओं से भर जाती हैं। दारुण दुःख की पीड़ा भीवे मूक बन सह जाती हैमूक, त्रसित औ' उत्पीड़ितझर-झर बहते अश्रु कणन मुखरित हो, न हो रुदितयंत्रणा की पीड़ा सहे हर...