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भारतीय काव्य में छायावाद का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। द्विवेदी युगीन रचनाकारों ने यद्यपि काव्य को श्रंगार और भक्ति की सीमा से निकाल कर सामान्य जीवन के करीब लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया परंतु इस क्रम में वे अत्यधिक वर्णनात्मक होते चले गये। यही कारण है कि उनकी कवि...
किसे खिड़की से बाहर देखना अच्छा नहीं लगतामुझे उसका बराबर टोकना अच्छा नहीं लगता रचनाकार परिचय:-द्विजेन्द्र ‘द्विज’ का जन्म 10 अक्तूबर,1962 को हुआ। आपकी प्रकाशित कृतियाँ हैं : जन-गण-मन (ग़ज़ल संग्रह) प्रकाशन वर्ष-२००३। आपकी ग़ज़लें अनेक महत्वपूर्ण संकलनों का भी हिस्सा...
शहर की पहुँच से पचास किलोमीटर दूर बसा गाँव घाटमपुर। विधायक निधि से बना ग्राम्य संपर्क मार्ग। जो बारिश के संपर्क में आते ही स्खलन का शिकार हो जाता है। यह सड़क घाटमपुर के लिए सहूलियत तो नहीं बन पायी पर पंद्रह सालों से चुनावी मुद्दा ज़रूर बन रही है। उसी सड़क के अंतिम छोर...
मैंने स्त्रियों का श्रृंगार-बॉक्स देखा है। काला काजल, लाल रोली, सफेद पाउडर। और न जाने किस-किस रंग के उपकरणों से तो उनका श्रृंगार पूरा होता है। मैं अपने भारत देश की सुन्दरता में भी ऐसा ही कुछ पाता हूँ। पाता हूँ तो लगता है कि सच ही विचित्र विविधता में दृढ़ अस्तित्व क...
हिंदी साहित्य और ब्लॉग पर संस्मरणात्मक सृजन के लिए चर्चित ब्लॉगर व साहित्यकार एवं सम्प्रति इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव को 15-18 जनवरी 2015 के दौरान भूटान की राजधानी थिम्पू में आयोजित चतुर्थ अन्तर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में ब्लॉग...
बहुत कुछ है जोनहीं दिखता दिल्ली सेरचनाकार परिचय:-28 मार्च, 1968 को पटना में जन्मे सुशान्त सुप्रिय वर्तमान में दिल्ली में संसदीय सचिवालय में कार्यरत हैं। आपके अब तक दो कथा-संग्रह ('हत्यारे' तथा 'हे राम'), एक हिन्दी काव्य-संग्रह 'एक बूँद यह भी' और एक अंग्रेजी काव्य-स...
देवघर (झारखण्ड) में आयोजित चौदहवें पुस्तक मेले के उद्घाटन आयोजन के अवसर पर श्री राजीव रंजन प्रसाद को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिये प्रतिष्ठित "साहित्य सेवी सम्मान" से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर संयुक्त बिहार में मंत्री रहे श्री कृष्णानंद झा,  सांसद श्री न...
श्रीमद्भगवद्गीता मानव सभ्यता और विश्व वाङ्मय को भारत का अनुपम कालजयी उपहार है। गीता के आरम्भ में कुरुक्षेत्र की समरभूमि में पाण्डव-कौरव सेनाओं के मध्य खड़ा पराक्रमी अर्जुन रण हेतु उद्यत् सेनाओं में अपने रक्त सम्बन्धियों, पूज्य जनों तथा स्नेहीजनों को देखकर विषादग्रस्...
एक शरारती बच्चे की तरह ठंड गुदगुदाने के लिये छाँक-छाँककर जगह ढुँढ़ रही थी। सिर के टोपे और कोटे के कालर के बीच, दस्ताने और ऊपर खिसकी बाँह के अंदर, पैर के मोजे और पतलून की मोहरी के बीच। चश्मे के नीचे मेरी लंबी नाक की दो सुरंगों को देख वह ठंड़ तो खिलखिलाकर लगातार गुदगुद...
रचनाकार परिचय:-प्राण शर्मा वरिष्ठ लेखक और प्रसिद्ध शायर हैं और इन दिनों ब्रिटेन में अवस्थित हैं। आप ग़ज़ल के जाने मानें उस्तादों में गिने जाते हैं। आप के "गज़ल कहता हूँ' और 'सुराही' काव्य संग्रह प्रकाशित हैं, साथ ही साथ अंतर्जाल पर भी आप सक्रिय हैं।खुशी ज़िंदगी...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल प्राण शर्मा