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रमज़ान का महीना है भीड़ में क्या मांगूँ ख़ुदा सेरचनाकार परिचय:-उत्तर प्रदेश के जौनपुर कस्बे में जन्मे क़ैस जौनपुरी वर्तमान में मुम्बई में अवस्थित हैं। आप विभिन्न फिल्मों, टीवी धारावाहिकों आदि से बतौर संवाद और पटकथा लेखक जुड़े रहे हैं। आपने रॊक बैंड "फिरंगीज़"...
 पोस्ट लेवल : क़ैस जौनपुरी कविता
रचनाकार परिचय:-रचना व्यास मूलत: राजस्थान की निवासी हैं। आपने साहित्य और दर्शनशास्त्र में परास्नातक करने के साथ साथ कानून से स्नातक और व्यासायिक प्रबंधन में परास्नातक की उपाधि भी प्राप्त की है। आप अंतर्जाल पर सक्रिय हैं।मध्यमवर्गीय पिता ने जब होने वाले समधी से...
 पोस्ट लेवल : रचना व्यास लघुकथा
हैदराबाद, 12 जनवरी 2015तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी, चेन्नै और युनाइटेड इंडिया इंश्यूरेंस कं. लि., चेन्नै के तत्वावधान में आज विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर तृतीय अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक सम्मेलन तथा सम्मान समारोह का आयोजन नुन्गम्बाक्कम स्थित यूनाइटेड इंडिया लर्निंग स...
साक्षात ईश्वर के रुप मेँशिक्षक विद्यमान है जिन से प्रकाशित हम सब प्रकाशित यह जहान है ।भविष्य के निर्माता हैँ वेहैँ प्रेम व करुणा के स्त्रोतमानवता हमेँ सिखाते,सदगुणोँ से ओत-प्रोत।उनके द्वारा दी गई सीख को यदि रखोगे याद,तो निश्चय ही पाओगे सफलता रूपी प्रसाद।&...
मेरे पड़ोसी को कुत्ते पालने का बड़ा शौक है . उसने अपने फार्म हाउस में तरह तरह के कुत्ते पाल रखे हैं . कुछ पामेरियन हैं , कुछ उंचे पूरे हांटर हैं कुछ दुमकटे डाबरमैन है , तो कुछ जंगली शिकारी खुंखार कुत्ते हैं .पामेरियन   केवल भौंकने का काम करते हैं , वे पड़ोसी...
रामू चाय की दुकान पर काम करता था  पढने का बहुत शोक था  दिन में काम करता  और रात के समय पढता था , पिता ने उसे काम करने के लिए कहा था ,वह कहते थे की पढने से पैसे नहीं मिलते ,पर झुग्गी छोपडी में एक स्कूल था जो मुफ्त शिक्षा देता था ,तो रामू की लगन स...
हमने हाथ  लगाकर देखा , ठंडक है , अंगारों में !आज रहा मन उखड़ा उखड़ा,महलों के,गलियारों में !जी करता है,यहाँ से निकलें, रहें कहीं अंधियारों में ! कभी कभी,अपने भी, जाने क्यों  बेगाने लगते हैं  ?आज हमें ,आनंद न आये ,शीतल सुखद बहारों में ! वे भी...
बड़ा महत्वपूर्ण समय है. रूसी प्रधानमंत्री ब्लादिमीर पुतिन अभी अभी भारत का शानदार दौरा कर लौटे हैं और अब अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के स्वागत के लिए राजपथ पर कालीनें बिछाने की तैयारी शुरु हो गयी है. रूस के साथ भारत के सौदौं-समझौतों से अंकल सैम नाराज हैं. वैसे तो व...
फूट रही लाली पल-पल,प्राची से हुआ उजाला,गयी रात, अब नयी बात,सौगात लिए आ गया प्रात,कल की नारी ने आज नयेदिन को बुलावा दे डाला.देख रहे नर पुंगव कल के,करामात कुछ कर मल-मल के,नारी आज चढ़ती हिमालय,पुन्य-प्रसूता,बनी शिवालय,गण -गौरव की गाथा लिखती,मान-सम्मान पर मरती दिखती,मर्...
एक विधा, एक आयाम अथवा एक रास्ता तय करने में ही व्यक्ति को एक जीवन कम लगने लगता है, यह वाक्य डॉ. के के झा जैसे मनीषियों पर लागू नहीं होता है। शिक्षा, पर्यटन, संस्कृति, इतिहास, नृतत्वशास्त्र, पुरातत्व, पर्यावरण, विधि, साहित्य और भी न जाने कितने आयामों को उन्होंने अपन...