ब्लॉगसेतु

प्रेम कभी खत्म नहीं होताहाँ वसंत आता है जरूर, पतझड़ के बाद पत्ते नए आते हैं और फूल नए खिलते हैंलेकिन प्रेम खूबियों से नहीं गहराईयों से जाना जाता हैअक्सर लगता है कि मैं तुम्हें और तुम मुझे बांध लोएक सूत्र मेंउम्मीदों के पनाह कम नहीं होते!हजारों बार किसी एक का ख्याल...
 पोस्ट लेवल : कविता
मेरे जैसे लोगों के लिए खास जो असफलता में सफलता ढूंढते हैं-कभी- कभी दूसरों की वजह से कुछ करना पड़ता है। मेरा नेट क्लियर हुआ तो अम्मी-पिताजी सबसे ज्यादा खुश हुए। एक अच्छे दोस्त को भी उतनी ही खुशी मिलती है अपने दोस्त के कामयाबी पर। कुछ को नाकामयाबी पर भी उतनी ही खुशी म...
 पोस्ट लेवल : चिंतन
किसी ने कहा था कि तुम प्रेम पर कितना कुछ लिखते हो और भी तो कई विषय हैं जिस पर लिखा करो। मैंने और विषय पर लिखना शुरू किया और फिर मुझे देशद्रोही, गद्दार और हिन्दू विरोधी बता दिया गया। यहां तक कि उन्मादी भी। इतना ही नहीं हर रोज मैसेज पर गालियों की फौज आती है और फिर अप...
 पोस्ट लेवल : कविता
चुप्पी तड़प मेरी नहीं है क्योंकि तुम मेरे कब हुए ये समझना बाकी हैसियासत में अपना तुम्हारा लगा है वो टूटेंगे या जुड़ेंगे समझना बाकी हैमतलब के नहीं हैं ये साथी सरकार में, डूबेंगे और मुल्क को डुबाएंगे एक दिनतुम साथ दोगे इंसान का रंग देख कर तब भी इसलिये ये समझना बाकी हैअ...
 पोस्ट लेवल : कविता
कृपया इसे संभालकर पढ़ें और पढ़ें भी तो बस मनोरंजन करें क्योंकि कुछ कविताएं और गाने किसी किसी के लिए केवल और केवल रुलाने का काम करते हैं सिवाय किसी फायदे के। ऐसी ही ये पंक्तियां हैं एहसासों में डूबकर न पढ़ें। कमजोर दिल वाले तो ऐसी चीजों से दूरी बनाकर रखें। मैंने लिखी ह...
 पोस्ट लेवल : कविता
तुम्हारे इश्क़ की पहेली सुलझा रहा हूँ मैंनासमझ खुद को समझा रहा हूँ मैंआज बेदखल यूं तो हर कोई है किसी सेमगर साथ हूँ अब तक समझा रहा हूँ मैंवो हसीन हवाओं का झोका गिरा रहा हैबहकर उसके साथ तुम्हारा बता रहा हूँ मैंदूर तलक बस एक एक सूरत है आंखों मेंधुंधला है वो मगर सब कुछ...
 पोस्ट लेवल : कविता
पिछला पोस्ट आप लोगों ने काफी पसंद किया, सराहा भी। उसी के इर्द गिर्द घूमते हुए आगे की कड़ी में एक और पोस्ट यह है-मोहब्बत की कहानी में कोई और क्यों आएगाजो हटा नहीं भावों से वो चला क्यों जाएगाएक मुराद नहीं पूरी तो हमें तकलीफ क्यों होगीचाहत की दस्तूर है पूरी तो तशरीफ़ तो...
 पोस्ट लेवल : कविता
तुम्हारी उम्र ढल रही होगी मेरी उम्र की तरहहमारी यादें भी बिसर रही होंगी तरंगों की तरहमगर रुके से हैं अभी कुछ जज्बात पुरानेवो गहरे हैं इतने खुलते हैं सभी के सामनेकौन है समर्पित भला जो तुम्हारी मांग भरेगामेरी किस्सों में कलंकित जो अभिमान करेगादिलों के ठहाकों में गर्म...
 पोस्ट लेवल : कविता
मुस्कुरा रहा हूँ, खामोशियाँ भी हैं बहुतअकेले बचपन में तन्हाइयां भी हैं बहुतबताऊं क्या सच है तो तुम मुस्कुराना छोड़ दोमेरा किरदार से लड़कर कुछ छिपाना छोड़ दोमगर मेरी मन्नतों में खुदा शैतानियां हैं बहुत-प्रभात
 पोस्ट लेवल : कविता
खाईयाँ जो दिलों की हैं उसे पाटती हैं पहाड़ों की खाईसंवादी कांटें और तीखी बहसों के घाव हैं जो उन्हें धुलती हैं फिजा की हवाएंबहुत तेज चलती हैं जब पानी में तरंगों के इर्द गिर्द रेशमी किरणेंभरतीं आहें और झटके से चलती साँसों के बीच सुनते हीपंछियों की चुलबुलाहटबहुत सुकून...
 पोस्ट लेवल : कविता