ब्लॉगसेतु

कोई ऐसा दिन नहीं नहीं होता, जब मजदूरों की घर पहुंचने से पहले ही मौत न होती हो!--------ट्रेन, ट्रक, बस, टेम्पो ये सबघर जाने के लिए नहीं मिलतेतस्वीर-गूगल साभारइनसे मौत जल्दी आती है आजकलजूता, चप्पल, कपड़े तन परघर जाने के लिए नहीं मिलतेमरने के बाद पास आते हैं आजकलरोटी,...
 पोस्ट लेवल : कविता
जब मैंने उससे पूछा कि खैरियत है सब? उसने कहा- हां। मैंने फिर पूछा, ऐसे कैसे बोल रही हो। कुछ और नहीं बोलोगी? नहीं, बस ठीक है। मैं चाहता था कि वो सब कुछ बक दे। मगर सम्भव न था। मैं दूर था बहुत। चाहकर भी उससे सारी चीजें पूछ तो नहीं सकता था। अचानक से फ़ोन कट गया। मैं पूछ...
ताला***किसी भी प्रकार का ताला उसके मन की आवाजाही को नहीं रोक पाता वो तो बस गुस्सा, द्वेष, मनमुटाव, खींझ, आह, दर्द, नफरत की बयार में खुद को पाता है। आजादी की भावना पनपती है। अगर वह दोषी नहीं है तो जेल में बंद कैदी कभी सुकून से अपने अच्छे पलों को जी नहीं पायेगा वो तो...
 पोस्ट लेवल : चिंतन ताला
तुम्हें देखने में दिलचस्पी नहीं, लेकिन यूं ही एकटक देखना चाहता हूँरेत पर पड़ी परछाईं और उसमें तुम्हें ढूंढ़ना चाहता हूँचलता रहूं यूं ही, कभी हवाओं, कभी जल की तरंगों के साथऔर फिर टकराहट को इकरार समझ कर मोहब्बत करूँतुम्हारी खामोशी को मैं पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी से मापना...
 पोस्ट लेवल : कविता
जब लॉक डाउन और सोशल डिस्टनसिंग का जमाना चल रहा हो तो...हर दिन खुद को सलामत रखने की दुआ करूँहर दिन खुदा से तुम्हारी सलामत की दुआ करूँबहुत बेहिसाब हो रहा है दुआओं का असर अबकिस पल कैसे सबके साथ रहने की दुआ करूँ.............मोहब्बत की तासीर मुकम्मल हो बिछड़ेंगे यूं न कभ...
 पोस्ट लेवल : कविता
फेसबुक पर आने वाला हर शख्स पत्रकार है। आपको अपनी अहमियत और मर्यादा का पता होना चाहिये। आपको नारद मुनि से सीख लेनी चाहिए। भाषा-शैली और वाद विवाद यहां तक कि संवाद की उच्चतम सीमा तक पहुंचना लेकिन स्पष्टवादिता और सहिष्णुता के साथ।आप बेबाक हैं लेकिन आपकी बेबाकी में खून...
 पोस्ट लेवल : चिंतन
महबूब की मोहब्बत का हिसाब कौन मांगता है?दरिया में बहने का ख्वाब कौन मांगता है?जो सब कहते है उससे कुछ कहना क्या है?इस मासूमियत में रखा क्या है?ये सन्नाटा दिलों में ताजगी लाएगादिलों की उदासी पर मरहम तो लगाएगाबेवजह खौफ किसी का अच्छा तो नहीं होताआजाद रहना है तो किसी से...
 पोस्ट लेवल : कविता
पहली फ़ोटो देखिये। दिल्ली के इस दृश्य को देखिये। एक आदमी घर- घर जाकर अंडरवीयर, तौलिया और महिलाओं कपड़ों को पहुंचा रहा है। अक्सर ऐसा दृश्य गांव में तो दिख जाता है कभी कभार पर शहरों में दिखना कोरोना के दौर में ही सम्भव हो पाया है।दूसरी फ़ोटो गूगल से मिली है। इसमें जो और...
 पोस्ट लेवल : चिंतन
जब मौसमों की तारीफ में उसके वस्ल का कारण निहित होतो हिज्र के आगोश में सब अच्छा कहाँ होगा#हिज्र- वियोग#वस्ल-संयोग#प्रभातPrabhat
 पोस्ट लेवल : कविता
चिंतन, मनन, उदासी, क्रंदन सबकी अलग कहानी हैवर्षों हुये करुणा में डूबे व्यथा वही पुरानी हैसागर, नदी, तालाब, गगन हर ओर अंधेरा छाता हैविस्मय करती नहीं बाधाएं सब कुछ आता जाता हैहां मन बोझिल, तितर बितर अंदर ही घुटता रहता हैजब भी देखूँ आलिंगन को तो आंसू भी बहता रहता हैहा...
 पोस्ट लेवल : कविता