ब्लॉगसेतु

जी रहा हूँ जिंदगी अब जुल्फ के साये मेंवो रात खुशनुमा शान थी अदाओं मेंहसरतें मिट गईं, चाहत का इम्तहान हो गयाअजनबी बनकर रहे किस्सों में विहान हो गयाचल पड़ी है जिंदगी किसी और पेड़ की छांव मेंलेकिन उसी का इंतजार है अभी अपनी राहों में#प्रभातPrabhat Prabhakar
मुझे हर कहीं अगर उसका चेहरा नजर आए तोसमझो मैं बेपनाह मुहब्बत करता तो हूँ!अश्कों को भी कब निकलना मालूम है शायदमैं उसकी आँखों का अदब करता तो हूँ! हर सूरत में किसी मूरत की तरह वो खड़ी है वोजाग उसे देखने की कोशिश करता तो हूँ!..................शायद नहीं लिख पाऊँगा आगेक्...
'उसी के लिए'धड़कता है दिल किसी किसी के लिएप्यार हुआ भी है तो उसी के लिये खुदा कितना चाहता है उसे औरमैं चाहता हूँ हर पल उसी के लिएमेरी तरंगों की परिभाषा में है कुछजो गुम सा हुआ हूँ उसी के लिएमिलना किसी का मुझे किसी सा लगेअपनापन में हूँ बस उसी के लिए#प्रभातPrabhat Pr...
 पोस्ट लेवल : 'उसी के लिए'
मुझे मालूम है मोहब्बत में किसी की खुशामद करनाऔर, गर मकसद न हो कुछ तो इबादत करनामगर किसी की आंखों का तारा बनना नहीं मुझेमुझे आता है आसमान का सितारा बनकर रहना#प्रभातPrabhat Prabhakar
कोई अफसाना मुझसे लिपटकर खो गयी होगीवो राहों में बंदिशें लिए रो रही होगीजिंदा है मगर कहने को ही जब आंसू ही नहीं निकलेवो आयी थी शायद मेरी हो गयी होगी....|बहुत खूबसूरत सा सवाल जो अब भी छोड़ा है उसनेवो आयी थी कभी मिलने, आयी है या आ रही होगीइन्हीं उलझनों में बेचैन नयन कर...
मोदी ने मंदी में एक ऐसा खेल खेला370 को हटाकर बहस ही बदल डालाव्यापारी भी सोते सोते बोले मोदी है तो मुमकिन हैअधिकारी टिकटॉक पर बोले मोदी है तो मुमकिन हैरोजगार की ऐसी माया चारों ओर है निजीकरण का सायारुपया पैसा सब गिर जाए लेकिन मोदी है तो मुमकिन हैमोदी ने मंदी में एक ऐ...
हम इस तरह मुस्कुरा रहे हैंकि गम है उसको भुला रहे हैं हम चाहते हैं जिसे खुश रखनावो हमीं को खूब रुला रहे हैंजो भुलाए नहीं जाते ख्वाबों सेवो हमको ही अब भुला रहे हैंमाना कि चोट पहुँची तुम तलकएहसास है तभी सहला रहे हैंकदम-कदम पर मनाया है उन्हेंक्या दर्द है उन्हें जो इठल...
मेरी खामोशी को तीर बना कर न रख देनामैं छलनी छलनी हो जाऊंगा आहिस्ता आहिस्ताकिसी की आन पर है कोई बात मगरकिसी की शान पर भी है कोई डगरबेदर्दी के आलम में मजबूर बना कर न रख देनाPrabhat Prabhakar
कुछ कहूँ तो समझो यकीन कुछ न होगाबेजुबान समझो अब और कहना न होगामेरी तरफ देखो उम्रभर के लिए एक नजरकुछ और क्या कहूँ कभी बिछड़ना न होगा#प्रभातPrabhat Prabhakar
तुम मेरे पास न आनाऔर मैं तुम्हारे पास भी नहींदूर रहना इतना दूर जितना कि पृथ्वी और आकाशइतना कि जितना कि मेरी प्यास और समंदर का पानीइतना कि अपाहिज और शक्तिमानइतना दूर कि माउंट और मारियानाऔर तब मैं तड़पूंगा और एक दिन हार मान जाऊंगामैं इंसान बन जाऊंगाफिर मैं कुछ न कहूंग...