ब्लॉगसेतु

अभी दूर तक चलना हैयहीं नहीं ठहरना हैसफर तो अभी शुरू हुआ हैआसमां में बादलों को देखोउन्हें गरजना हो या तड़पना होठहर कर फिर बरसना हैपानी फिर से भरना हैअभी दूर तक चलना है।रात अंधेरी हो कितनीतारों को टिमटिमाते हुए देखोबादलों में छुपते हुए देखोछुप छुप कर बाहर निकलना हैजुग...
स्कूल है एकजिसके साइनबोर्ड पर जंग हैगेट की जगह टूटी दीवारेंऔर रास्तों के बगल में रुका पानीकमरे कच्चे खपरैल के औरदीवारों में एक-एक ईट की खाली जगहजिससे होकर हवा जाती है अंदरबाहर से चूने की पुताईगांव का इंटर कॉलेज है।लड़कियां साइकिल से आती हैंटाटपट्टी पर पढ़ाई और इ...
 पोस्ट लेवल : कविता स्कूल है एक
मेरे पास नहीं हो तुम तो क्यानजरें अब कोई और मिलाता हैव्यर्थ नहीं है कुछ भी मालूमसंगीत नया कोई तो सुनाता हैतूफान चले, चाहे आये सुनामीनिडर आफत में राह बनाता हैपूजो और इबादत करो उसकीजो संकट में भी गले लगाता है-प्रभात
 पोस्ट लेवल : कविता गले लगाता है
मैं सच में कमाल का इंसान हूं। एक इंसान जिसके लिए नहाना अन्य दूसरे चीजों से भी ज्यादा मायने रखता है। कुछ वाकया बताते हैं....2010 के आस पास की बात है, अपने मित्रों के संग अमृतसर, वाघा बॉर्डर, जलियावालाबाग तक घूमने की योजना बनी। सामान्य यानी कि लोकल डिब्बे में बैठकर स...
बारिश बहुत सामान्य सी बात है।हां, मेरे लिए भी।अच्छा लगता हैकागज के नाव में बचपन को देखना,या झूलों पर बैठ कर भीगना हो।हां, धान की रोपनी गीत गाते देखना भीसबमें सुर भी है, ताल भी है।मेढक के अलग सुरबादलों के अलग सुर,हां, बूंदों के भी सुर।क्योंकि बारिश बहुत सामान्य सी ब...
एक अजनबी शहर जहां तुम मिलेया यूं कहें कि हम मिलेहमसे ज्यादा ख़ूबसूरत रातें भी हुईं दिन रात ख्वाब बनकर जो चल रहे थेअब ख्वाबों के बाद सुबह हो गईवो रास्ते जो हमें देख रहे थेआज पूछते हैं कि हम कहां गए।टूटती चरमराती लकड़ियों की तरहयादों का बार बार स्मरण हो जानाजैसे महुए क...
एक भाई साब जैसे ही मुर्गी को एक थैली में लटकाए और चाकू को दूसरे हाथ में पकड़े रसोई में प्रवेश किए तो मुझसे कहने लगे कि ये लोग कितने हिंसक हैं जिंदगी बर्बाद कर दी है इन्होंने उसकी। इतनी दरिंदगी से पेश आये। पीट-पीट कर उसे मार डाला। मैंने कहा हां, बहुत गलत किया।अच्छा च...
इस तरह बारिश में भीगते हुए मैंने देखा था अपने आपको बस एक बार, बहुत छोटा बच्चा था, एक-एक बूँद भी पड़े तो समझो मेरे हाथों में सिहरन सी होने लगती। लगता कोई हवा चल रही हो और वो अंदर प्रवेश करके सीधे मस्तिष्क तक पहुंच गई हो। हम कागज की नाव बना कर आंगन में भरे लबालब पानी...
एक दिन वह भी थाजब उसने सपना देखना शुरू किया थाएक दिन वह भी हैजब उसके अरमानों का कत्ल हुआसपने देखने से पहले उसके पास कुछ नहीं थाकेवल उम्मीद, आशा और उससे जलती मशाल के सिवाकेवल हंसी, खुशी और उससे पनपता प्यार के सिवालेकिन जब अरमानों का कत्ल हुआयानी दीपक बुझ गया, वह शून...
 पोस्ट लेवल : कविता कहीं ऐसा न हो
"आँधी-पानी वाला बचपन"दिन भर चिबभी (गांव में पैर से ठिकड़ा मार कर कूद-कूद कर खेले जाने वाला खेल) खेलते हुए रामू और उसकी बहन राम्या कभी न थकते। मम्मी चिल्लाती रहती कि "बेटा लू (गरम वायु) लग जायेगी। पूरी दोपहरिया चिल्ल पों करते रहते हो। थोड़ी देर आराम कर लो" लेकिन इन बा...