ब्लॉगसेतु

         जिन्दगी एक रंगमंच है- सुख-दुःख के दृश्य आते-जाते रहते हैं। शो चलते रहता है और हम सब अपनी-अपनी भूमिका निभाते रहते हैं। ऐसे तो अभी हमारे "उत्सव भवन एवं प्राँगण" में बहुत काम बाकी है, पर हमने सोचा कि जो कार्यक्रम अपने घर मे...
         विभिन्न कारणों से साल 2020 ज्यादातर लोगों के लिए दुःखदायी रहा। मेरे लिए यह इसलिए मनहूस रहा कि जाते-जाते यह मेरी प्यारी चचेरी बहन को हमसे छीन ले गया! अब मुनमुन के ठहाके बस यादों में सुनायी पड़ेंगे। दरअसल, बात करते समय बीच...
 तुकादी एक खेल का नाम है। एक बड़े-से रूमाल (लगभग 2 फीट गुणा 2 फीट) के बीचों-बीच एक गेन्द (टेनिस वाली गेन्द) को रखकर रूमाल को धागे से इस तरह बाँधा जाता है कि जब गेन्द को फेंककर मारा जाता है, तब इसकी आकृति 'धूमकेतु'-जैसी बन जाती है। इस गेन्द को भी 'तुकादी' ही कह...
       चाचीजी बताया करते थीं कि जब वे इस घर में आयीं, तब यहाँ बड़ी-सी मिट्टी की हाँडी में भात पकता था। कई बार उनसे हाँडी टूटी भी थी। माँ ज्यादा बातचीत नहीं करती थीं/हैं, इसलिए उनका अनुभव हमें नहीं पता। यह भी हो सकता है कि उनसे कभी हाँडी न...
       बरहरवा के "शाहजहाँ" नहीं रहे।        (आज सुबह यह अविश्वसनीय खबर मिली और दुर्भाग्य से, यह सच भी निकली... )        1975 में हमारे बरहरवा में 'अभिनय भारती' के बैनर तले एक भव्...
       ये हैं जनाब गुड्डू रंगीला ग्रिलवाले 'ओल-झोल'              गुड्डू इनका नाम है;        रंगीला इनका मिजाज है;      ...
        घर के बगल के खाली प्लॉट पर जामुन का एक बड़ा-सा पेड़ है। हर साल बरसात में बच्चे यहाँ जामुन तोड़ने आते हैं। बरसात में यह जगह जंगल-झाड़ियों से भर जाती है, इसलिए हम खुद कभी नहीं गये थे जामुन तोड़ने। एक तरह से, यह सुरक्षित नहीं है।...
       जयचाँद अक्सर एक झील का जिक्र करता था। नौपाड़ा गाँव में उसकी दीदी का घर है, वहीं है यह झील। हम समझते थे कि वह बंगाल के किसी गाँव की बात करता है। बाद में पता चला कि वह गाँव हमारे कस्बे के आस-पास का ही है- 15 किलोमीटर दूर।  &nb...
यह हमारे यहाँ रेलवे का तालाब है।एक जमाना था, जब भाप के इंजन चलते थे, तब हमारे बरहरवा जंक्शन में हर इंजन में पानी भरा जाता था। क्या बड़े-बड़े नल हुआ करते थे !तब हमलोग इसी तालाब में नहाने आया करते थे। वैसे, और भी तालाबों में नहाना होता था, पर मुख्य तालाब यही था। इस ता...
        जब कोई लम्बा काम किया जाता है, तो बीच-बीच में विराम (ब्रेक) लिया जाता है। विराम के दौरान या तो आराम किया जाता है, या फिर, दिल-दिमाग को राहत पहुँचाने वाला कोई काम किया जाता है।        जैसा कि जिक्र...