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हमें नहीं पता था कि वर्ष में एक दिन ऐसा भी होता है, जिस दिन आँवले के पेड़ के नीचे भोजन करने की परम्परा है। आज पहली बार पता चला और पहली बार हमने आँवले के पेड़ के नीचे भोजन किया।        दिवाली के बाद अभी-अभी तो छठ महापर्व की गहमा-गहमी सम...
पिछ्ले हफ्ते के मंगलवार से शुरु हुई वर्षा इस हफ्ते सोमवार तक जारी रही। इन सात दिनों की बरसात में हमारे बरहरवा के दक्षिण में सैकड़ों वर्गकिलोमीटर का क्षेत्र एक विशाल झील में परिणत हो गया। कल वर्षा रुकी थी, तो ये कल की तस्वीरें हैं। यह जो झील बनी, इसका एक किनारा तो ग...
मेरी एक दबी हुई इच्छा थी कि 'जय जवान' के बाद 'जय किसान' की भी भूमिका निभाऊँ, मगर हो नहीं पाया था। पिताजी, दादाजी डॉक्टर होने के साथ-साथ खेती-बाड़ी पर पूरा ध्यान रखते थे। हमारी पीढ़ी ने नजरअन्दाज कर दिया। दूसरी बात, रासायनिक खाद और कीटनाशकों से मुझे सख्त नफरत है, जब...
मेरे पिताजी के एक अनन्य मित्र का कल स्वर्गवास हो गया। हमलोग उन्हें "राजकिशोर जेठू" कहा करते थे- यानि वे उम्र में पिताजी से कुछ बड़े ही रहे होंगे, लेकिन थे मित्र ही। बिलकुल पड़ोस में उनका घर है, लेकिन वे दुमका शहर में बस गये थे। शुरु में अध्यापक रहे, बाद में वकील बने...
       हमारे मुहल्ले में बहुत पहले मलेरिया विभाग के एक अधिकारी किराये पर रहते थे- हीरालाल साहा। उनके बड़े सुपुत्र को हमलोग 'ललन भैया' के नाम से जानते थे। उन्होंने ही पहली बार मुहल्ले में सरस्वती पूजा का आयोजन किया था- बेशक, मुहल्ले क...
       किसी के पास 'विजन' होता है, वह कल्पना कर सकता है कि कोई चीज किस तरह की होनी चाहिए। किसी के पास 'दक्षता' य 'कौशल' होता है, वह 'विजन' को समझ जाने के बाद उसे साकार रुप दे सकता है। आम तौर पर दोनों गुण एक ही व्यक्ति के पास नहीं होते।...
राजमहल की पहाड़ियों में जंगली जानवर तो कुछ बचे नहीं हैं- ले-देकर कुछ हाथी कभी-कभार नजर आ जाते हैं। (महाराजपुर के निकटवर्ती) तालझारी इलाके में पत्थर-खनन अपेक्षाकृत कम है, इसलिए यहाँ जंगल बचे हुए हैं और यहीं कभी-कभार हाथी दिखते हैं। जिक्र इसलिए कि इस बार मोती झरना के...
       हाल ही में फेसबुक पर एक विडियो देखा, जो सम्भवतः महाराष्ट्र के किसी कॉलेज के घरेलू कार्यक्रम का है। (हो सकता है कि यह विडियो वायरल हो और प्रायः सबने देख रखा हो।) विडियो में एक नौजवान छात्र फिल्मी गाने- 'तुझमें रब दिखता है, यारा म...
       बाँस को हालाँकि पेड़ नहीं माना जाता- यह घास की श्रेणी में आता है (पादप विज्ञान के अनुसार, यह ग्रामिनीई (Gramineae) कुल की एक अत्यंत उपयोगी घास है), पर हम इसे यहाँ पेड़- पेड़ क्या, 'महीरूह' मान कर चल रहे हैं।    &nbs...
       साहेबगंज हमारे जिले का भी नाम है और उस शहर का भी नाम है, जहाँ हमारा जिला मुख्यालय है। यह विडियो हमने आज ही साहेबगंज रेलवे स्टेशन के नये बने फुट ओवर ब्रिज से बनाया है। विडियो के अन्त में आपको एक वाष्प इंजन दिखायी पड़ेगा, जिसे अब...