ब्लॉगसेतु

Reform in Indian Army, Transparency, Corruption, Technology, Hindi Article, Newian Army, Transparency, Corruption, Technology, Hindi Article, Newइस लेख के शीर्षक का यह अभिप्राय कतई नहीं है कि हमारी सेना में कोई भारी कमी है, बल्कि इसे कुछ यूं समझा जाना चाहिए कि...
 पोस्ट लेवल : Political
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); आकाशवाणी के राजधानी चैनल पर 4 दिसम्बर की सुबह 7 बजे, पूरे भारत में प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ब्रज माधुरी में 'नोटबन्दी' के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा में डॉ. विनोद बब्बर 'जी' के साथ मिथिलेश कुमार सिंह।कार्यक्रम का...
 पोस्ट लेवल : mithilesh
'चिराग' उन्हें फीका लगा होगा हमने जो 'दीपक' जलाया अभीखुशियाँ भी कुछ कम लगी होंगीखुल के हम जो 'मुसकराये' अभीगफ़लत में थे देख परतें 'उदास'आह भर भर के वो पछताए अभीकद्र कर लेते रिश्ते की थोड़े दिनोंजब फंसे थे मुसीबत में हम कभी तब उड़ाई हंसी ज़ोर से हर जगहमानो दिन...
 पोस्ट लेवल : mithilesh Hindi poem on success day night poet failure
चादर तान कर किसकोसोना अच्छा नहीं लगताअधखुली आँख से तब औरसपने बेहतर से दिखते हैंकुछ-कुछ 'दिवा-स्वप्न' सेआह! मगर ज़िन्दगी के थपेड़ेजगाते हैं, झिंझोड़कर अचानकटूटते हैं तब 'दिवा-स्वप्न' बरबसऔर मजबूर होते हैं सब, क्योंकिभागते रहे थे हम दूर हकीकत सेवह खोजते रहे पल ख़ुशी केपि...
आज के समय में यह बात लगभग साबित हो गयी है कि भारत में हिंदी ही एकमात्र भाषा है जो सबसे ज्यादा बोली और समझी तो जाती ही है, साथ ही साथ इंटरनेट पर अब यह इतनी ही सुगमता से उपलब्ध है, जितनी सुगमता से अंग्रेजी या कोई अन्य भाषा. चूँकि, इंटरनेट पर हिंदी में सहजता कुछ ही वर...
तोड़ दे हर 'चाह' किनफरत वो बिमारी हैइंसानियत से हो प्यारयही एक 'राह' न्यारी है   बंट गया यह देश फिरक्यों 'अकल' ना आयीरहना तुमको साथ फिरक्यों 'शकल' ना भायी 'आधुनिक' हम हो रहेया हो रहे हम 'जंगली'रेत में उड़ जाती 'बुद्धि'सद्भाव हो गए 'दलदली' हद हो गय...
 पोस्ट लेवल : Muslim Hindi poem on religious environment hindu
शिकायत के बाद भी 'भारतीयों को कुत्ता' कहने वाली लाइन नहीं हटाई 'बीबीसी हिंदी' ने ... !!जी हाँ! अपनी रिपोर्टिंग से नाम कमाने वाला बीबीसी एक बड़ा अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड है. लेकिन, इसके कई लेख और भारत विरोधी सोच काफी कुछ सोचने को मजबूर करती है. पिछली...
शुरुआत में जब नयी नयी 'समझ' की कोंपलें फूट रही थीं, तब ऐसी कई बातें थीं जो दिमाग के बहुत ऊपर से निकल जाती थीं. भारत जैसे देश में चूँकि चुनाव होते ही रहते हैं, कभी लोकसभा, कभी विधानसभा, कभी ग्राम-पंचायत और इनके बीच में भी तमाम दुसरे चुनाव. इन चुनावों में एक कॉमन बात...
 यूं तो मीडिया द्वारा दोषपूर्ण, सनसनीखेज रिपोर्टिंग और पक्षपाती रवैये की खबर आती ही रहती है, लेकिन जब किसी विधानसभा या लोकसभा का चुनाव सामने हो तो यह अपने चरम पर होता है. 2014 के आम चुनाव में हमने स्पष्ट देखा कि तमाम मीडिया घराने और पत्रकार किस प्रकार विशेष पा...
देश के बड़े न्यूज चैनल द्वारा घोषित यह अपनी तरह का पहला पुरस्कार था, इसलिए युवा गिरीश बेहद उत्साहित था. आखिर हिंदी सेवा के नाम पर पुराने धुरंधर और उनके जुगाड़ू चेले तमाम पुरस्कारों पर कब्ज़ा जमाये बैठे थे और वैसे भी 'ब्लॉगिंग' जैसे फिल्ड का साहित्य की दुनिया में...