ब्लॉगसेतु

मोदी जी....सुनो:-धीरे धीरे ही सही बीते इक्किस वारसोम गया मंगल गया कब बीता बुधवारकब बीता बुधवार हो गया अजब अचंभालगता है इतवार हो गया ज्यादा लंबादाढ़ी भी लंबी हुई बढ़ गये सर के बालबिना छुरी के कर रही पत्नी हमें हलाल(सिर्फ हास्य के निमित्त)
लक्ष्मण रेखा खिंच गयी सब लोगों के द्वारइक्किस दिन घर में रहो अपने मन को मारअपने मन को मार मिला है सुंदर मौकाबीवी मारे मौज करो तुम चूल्हा चौकाहम तो हैं तैयार सहेंगे सभी झमेलेये कोरोना वायरस कोई जान न ले ले
"आओ कविता करना सीखें" आज का छंद....*हरिगीतिका* में --------विरहणी---जब भी हुआ यह भान मानव, आपको घनघोर सेतब ही बनी यह धारणा कुछ, नाचते मन मोर सेअब आ गया उद्दात सावन, गीत गा मल्हार काशिव आरती कर धार ले व्रत, प्यार से मनुहार काखुशियाँ मिली तन मोद में मन, हास है परिहास...
कुछ ऐसा हो तो-मंदिर में हो आरती मुसलिम पढ़े नमाजदोनों का सम्मान हो ऐसा बने समाजगुरुद्वारे में गूंजती ग्रंथी की आवाजगिरजाघर में पोप को माने सकल समाजऐसी अपनी कामना होवे सबको खाजराज नहीं तो खाज मेंलूटे मजा समाज
शहीदों के परिवारी सदस्यों को नमनमातृभूमि की रक्षा से देह के अवसान तकआओ मेरे साथ चलो तुम सीमा से शमशान तक।सोये हैं कुछ शेर यहां पर उनको नहीं जगानाटूट न जाए नींद किसी की धीरे धीरे आनासैनिक का बलिदान अकेला नहीं है। उसके साथ उसके परिजन भी बलिदान करते हैं। शहीद का शव ता...
अत्र कुशलम् तत्रास्‍तु·         पी के शर्मावो जमाने चले गये जब लोग ख़त लिखा करते थे। डाकिया भी समाज में एक महत्‍वपूर्ण स्‍थान पाता था। लेकिन आजकल डाकिया, रुपये की कीमत भर रह गया है। कारण सब जानते हैं। अब एस एम एस आते जाते हैं...
आंसू-आंसू पर नोट·        पी के शर्मामेरा दोस्‍त अविनाश अक्‍सर हंसता हुआ आया करता था, पर न जाने क्‍यूं आज रोता हुआ आया। मैंने ढांढस बंधाया... पूछा क्‍या हुआ ? बोला ढांढस बंधाना कांग्रेस को, मैं तो अपनी मर्जी से रो रहा हूं। आई मीन र...
दैनिक जनसंदेश लखनऊ के - चकल्‍लस - में प्रकाशित एक व्‍यंग्‍य लेखआप भी मजा लें मैं प्रधानमंत्रिन नहीं बनना चाहती·         पी के शर्माआजकल प्रधान पद के लिए उम्‍मीदवारों के नामों की चर्चाएं बिना पंख उड़ रही हैं। अंदर ही अंदर जुगा...
आप भी पढि़ये हरिभूमि में प्रकाशित एक व्‍यंग्‍यलिखो भैंस पर·         पी के शर्माआज मैं आपको प्रसंगवश गांव की एक सच्‍ची घटना सुनाता हूं। एक बार भैंस गांव के जोहड़ में स्‍नान कर रही थी और काफी देर से चाचाश्री अपने बड़े भाई के आद...
आओ नोट बदलवा लें...... अगर हैं.... तो...एक थैला नोट और खून का घू्ंट·        पी के शर्मा पत्‍नी फोन पर बात कर रही थी। मैं अवाक रह गया। वार्तालाप का पचास परसैंट ही सुन पा रहा था। पत्‍नी भले ही न हो, पर उसकी तेजतर्रारी देखने लायक थी।...