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साम्प्रदायिक वायरस (Communal Virus) किसी भी कोरोना वायरस से ज्यादा ख़तरनाक है। कोरोना खत्म हो जाएगा लेकिन साम्प्रदायिक वायरस कभी खत्म नहीं होगा।सरकारी पार्कों में #नागपुरी_शाखाएँ_बंद हैं लेकिन उनके कीटाणु तमाम मीडिया आउटलेट्स में प्रवेश कर चुके हैं और उनके ज़रिए #स...
तुम अभी याद नहीं आओगेजब मुश्किल तुम पर आई हैजब तुम्हारे जाने की बारी आई हैतुम अभी याद नहीं आओगेतुम तब याद आओगेजब हम मुश्किल में आ जाएंगेजब जीने के लाले पड़ जाएंगेजब सेठ को याद आएगा घर बनवानाजब पानी लीक करेगा नल पुरानाजब दीवारों पर सीलन आ जाएगीजब फर्नीचर बनवाने की ब...
#लॉकडाउन पर मोदी सरकार की नीति और नीयत पर कुछ खुलासा...#प्रधानमंत्री ने 26 मार्च को देश के सभी प्राइवेट #एफएम_रेडियो के जॉकी (आरजे) से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करने की इच्छा जताई। प्रसार भारती ने सभी मीडिया हाउसों को संदेश भेजा। 27 मार्च यानी शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री...
लॉकडाउन अब उसे क़ैद जैसा लगने लगा था।कोई कितना मोबाइल इस्तेमाल करे। वो अब किसी ऐसे से बात करना चाहता था, जिससे वो अपने दिल की बात कर सके। सोशल मीडिया का कोना कोना ढूँढा, कोई नहीं मिला। एक था, मगर पिछले कुछ महीनों से चल रहीकम्यूनल हवा के ज़हर से...
मोबाइल लॉक करते ही स्क्रीन पर अंधेरा छा गया। डिजिटल दुनिया क़ैद हो चुकी थी। उसकी आँखों के सामने स्क्रीन पर बाहर दुनिया की परछाईं किसी फ़िल्म सीन जैसी लगी। वह लेटी लेटी अपने बिस्तर से उठी, विंडो से बाहर देखा। बाहर के आज़ाद नज़ारों को देखकर उसकी नज़रें ललचा रही थीं।...
टीवी पर वो न्यूज देख रहा था। 21 दिन के लॉकडाउन ने उस पर ख़ासा असर नहीं किया। आँखों में कोई अचंभा  नहीं। दिल की धड़कनों में कोई बदलाव नहीं। दूर दूर तक कोई हड़बड़ी भी नहीं। बस, वो हल्का सा हिला, सोफ़े पर खुद को एडजस्ट करने के लिए...देश के उस हिस्से में रह रहे लो...
चाचा की दुकान-मुस्तजाब किरमानीवो चाचा की दुकान को जलते देख खुश हुआ था। चाचा और उसका धर्म अलग-अलग जो थे। उसने आग खुद नहीं लगाई थी। हाँ, दंगाइयों को राह जरूर दिखाई थी। मगर, आज जनता कर्फ़्यू के बीच जब उसे एक जरूरत का सामान याद आया तो उसने खिड़...
ताली और थाली के निहितार्थ समझिए...प्रधानमंत्री मोदी जी ने आपसे आज (22 मार्च शाम 5 बजे) जनता कर्फ्यू के दौरान ताली और थाली यूं ही नहीं बजवा दिया।...संघ पोषित विचारों की आड़ लेकर सरकार द्वारा प्रायोजित इतना बड़ा जन एकजुटता का प्रदर्शन कभी नहीं हुआ था। जिन लोगों ने इ...
दिल्ली में शाहीनबाग के शांतिपूर्ण  संघर्ष को तीन महीने पूरे हुए...सीएए, एनपीआर, एनआरसी पर सूरते हाल क्या होगी, नहीं मालूम, लेकिन हमें इस बात का सुकून रहेगा कि हमने अपना ज़मीर मरने नहीं दिया...हमने इस संघर्ष में ऐसे बच्चों को तैयार कर दिया है जो आने वाली नस्लों...
#दिल्ली_रक्तपात या #दिल्ली_जनसंहार_2020 की दास्तान खत्म होने का नाम नहीं ले रही है...अकबरी दादी (85) के बाद अब सलमा खातून दादी (70) की हत्या ने मेरे जेहन को झकझोर दिया है। मैंने गामड़ी एक्सटेंशन में तीन मंजिला बिल्डिंग में जिंदा जला दी गई 85 साल की अकबरी दादी की कह...