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नादां है बहुत कोई समझाये दिल को चाहता उड़ना आसमाँ में है पड़ी पांव ज़ंजीर कट चुके हैं पंख फिर भी उड़ने की आस.. नादां है बहुत कोई समझाये दिल को डगमगा रही नौका बीच भंवर फिर भी लहरों से जुझने को तैयार परवाह नहीं डूबने की मर मिटने को तैयार नहीं मानता दिल यह समझाने से...
मुझे याद आओगेकभी तो भूल पाऊँगा तुमको, मुश्क़िल तो है|लेकिन, मंज़िल अब वहीं है||पहले तुम्हारी एक झलक को, कायल रहता था|लेकिन अगर तुम अब मिले, तों भूलना मुश्किल होगा||@ऋषभ शुक्लाहिन्दी कविता मंच
एक ग़ज़ल : भले ज़िन्दगी से हज़ारों ---भले ज़िन्दगी से  हज़ारों शिकायतजो कुछ मिला है उसी की इनायतये हस्ती न होती ,तो होते  कहाँ सबफ़राइज़ , शराइत ,ये रस्म-ओ-रिवायतकहाँ तक मैं समझूँ ,कहाँ तक मैं मानूये वाइज़ की बातें  वो हर्फ़-ए-हिदायतन पंडित ,न मुल्ला ,न राजा ,...
हे हरसिंगारओ शेफालीअरी ओ प्राजक्ता !सुना हैतू सीधे स्वर्ग सेउतर आई थीकहते हैसत्यभामा की जलनदेवलोक सेपृथ्वी लोक परतुझे खींच लाई थीतू ही बताहै ये चन्द्र का प्रेमया सूर्य से विरक्तिकि बरस मेंफ़कत एक माससिर्फ रात कोदेह तेरीहरसिंगार के फूलों सेभरभराई थी !
एक ग़ज़ल : दुश्मनी कब तक-----दुश्मनी कब तक निभाओगे कहाँ तक  ?आग में खुद को जलाओगे  कहाँ  तक  ?है किसे फ़ुरसत  तुम्हारा ग़म सुने जोरंज-ओ-ग़म अपना सुनाओगे कहाँ तक ?नफ़रतों की आग से तुम खेलते होपैरहन अपना बचाओगे  कहाँ  तक ?रोशनी से रोशनी क...
तुम ही कहो न क्या मैं ख्वाहिश कोदेर तक याद में तेरी ....जागने की ...इजाज़त दूं ?तुम ही कहो नक्या मैं यादों कोखुदा के सजदे सानाम  और दर्ज़ाइबादत दूं ?तुम ही कहो नक्यों इन  हवाओं नेतुझसे लिपटने की बदमाशियां की और शरारत क्यूं ?तुम ही कहो नक्या...
दीपावली पर विशेष------- एक गीत : आओ कुछ दीप हम जलाएँ---एक अमा और हम मिटाएँआओ कुछ दीप हम जलाएँ खुशियाँ उल्लास साथ लेकर युग युग से आ रही दिवाली कितना है मिट सका अँधेरा कितनी दीपावली  मना  लीअन्तस में हो घना अँधेरा ,आशा की किरण हम जगाएँ,आओ कुछ दीप हम जल...
कुड़िये कर कुड़माई,बहना चाहे हैं,प्यारी सी भौजाई।धो आ मुख को पहले,बीच तलैया में,फिर जो मन में कहले।।गोरी चल लुधियाना,मौज मनाएँगे,होटल में खा खाना।नखरे भारी मेरे,रे बिक जाएँगे,कपड़े लत्ते तेरे।।ले जाऊँ अमृतसर,सैर कराऊँगा,बग्गी में बैठा कर।तुम तो छेड़ो कुड़ियाँ,पंछी बिणजा...
 पोस्ट लेवल : माहिया Basudeo Agarwal
कौन समय को रख सकता है, अपनी मुट्ठी में कर बंद।समय-धार नित बहती रहती, कभी न ये पड़ती है मंद।।साथ समय के चलना सीखें, मिला सभी से अपना हाथ।ढल जातें जो समय देख के, देता समय उन्हीं का साथ।।काल-चक्र बलवान बड़ा है, उस पर टिकी हुई ये सृष्टि।नियत समय पर फसलें उगती, और बादलों...
 पोस्ट लेवल : आल्हा छंद Basudeo Agarwal
[ विजय दशमी के पर्व पर विशेष---- एक व्यंग्य ----रावण का पुतला ---- आज रावण वध है । 40 फुट का पुतला जलाया जायेगा । विगत वर्ष 30 फुट का पुतला जलाया गया था। इस साल रावण का कद बढ़ गया । पिछ्ले साल से इस साल लूट-पाट ,अत्याचार ,अपहरण ,हत्या की घटनायें...