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लक्ष्मीरंगम - Laxmirangam: ऐसे सिखाएँ हिंदी: कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर करें. G+ की टिप्पणियाँ अस्वीकार्य कर दी गई हैं. ऐसे सिखाएँ हिंदी मैं, मेरे हिंदी की शिक्षिका के सा...कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर करें. G+ की टिप्पणियाँ अस्वीकार्य कर दी गई हैं.htt...
एक ग़ज़ल मैं अपना ग़म सुनाता हूँ ,वो सुन कर मुस्कराते हैंवो मेरी दास्तान-ए-ग़म को ही नाक़िस बताते हैंबड़े मासूम नादाँ हैं  ,खुदा कुछ अक़्ल दे उनकोकिसी ने कह दिया "लव यू" ,उसी पर जाँ लुटाते हैंख़ुशी अपनी जताते हैं ,हमें किन किन अदाओं सेहमारी ही ग़ज़ल खुद की बता, हमक...
14-सितम्बर , हिंदी दिवस के अवसर पर विशेष-----] एक व्यंग्य : हिंदी पखवारा और मुख्य अतिथि "अरे भाई मिश्रा जी ! कहाँ भागे जा रहे हो ? " ---आफिस की सीढ़ियों पर मिश्रा जी टकरा गए’भई पाठक ! तुम में यही बुरी आदत है है । प्रथमग्रासे मच्छिका पात:। तुम्हे...
तुमने देखा तो होगा मेरा घर मैं मेरे घर में अपनों के बीच अपनेपन से रहती हूँ ..‘मेरे ’  घर में तीन बेडरूम एक हॉल और किचन के अलावा एक स्टोररूम और पूजा का एक कोना है ..और हाँअपनी हैसियत के हिसाब से सजा रखा है&...
“मत लिखो !”‬-चार्ल्ज़ बुकोवस्की ने कहा था,तब तक किजब तक लिखने कीहवस नहीं होती -यही कहा था उन्होंने !!और भी बहुत कुछ !कहा था किहोते है करोड़ों लेखकमुझ से जो ख़यालों मेंस्वमैथुन करते हैऔर बन जाते हैसवघोषित लेखक !मगर चार्ल्ज़,मैं क्या करूँ ?जब लार सेटपकने लगते है ये श...
लड़कियाँ अनाज के आटे सी होती है ..गाँव की लड़की बाजरा मक्का या जवारहोती है शहरी लड़कियाँ मैदे या गेहूँ सा ग़ुबार होती है ...बेली ही जाती है सब रोटी पराँठा लिट्टी क़ुल्चे सी और खाई जाती है बस भूख (!) मिटाने...
तुम्हें खोजते हुएपहुँच जाना मेरा हर बार उस क्षितिज पेजहाँ कदाचितआदम हौवा पहली दफ़े  मिले थे ...अथक  प्रयास करना मेरा हम दोनों के अस्तित्व के jigsaw puzzle से ख़यालों के और रूह के  टुकड़े जो कदाचित एक दूसरे...
एक ग़ज़ल : साज़िश थी अमीरों की--साज़िश थी अमीरों की ,फाईल में दबी होगीदो-चार मरें होंगे  ,’कार ’ उनकी  चढ़ी  होगी’साहब’ की हवेली है ,सरकार भी ताबे’ मेंइक बार गई ’कम्मो’ लौटी न कभी  होगीआँखों का मरा पानी , तू भी तो मरा होगाआँगन में तेरे जिस दिन ’तुलसी...
एक ग़ज़लसलामत पाँव है जिनके वो कन्धों पर टिके हैंजो चल सकते थे अपने दम ,अपाहिज से दिखे हैकि जिनके कद से भी ऊँचे "कट-आउट’ हैं नगर मेंजो भीतर झाँक कर देखा बहुत नीचे गिरे हैंबुलन्दी आप की माना कि सर चढ़  बोलती  हैमगर ये क्या कि हम सब  आप को बौने  दिख...
चन्द माहिया : क़िस्त 60 :1:हूरों की जीनत मेंडूबा है ज़ाहिदकुछ ख़्वाब-ए-जन्नत में :2:घिर घिर आए बदराबादल बरसा भीभींगा न मेरा अँचरा :3:ग़ैरों की बातों कोमान लिया तूनेसच,झूठी बातों को :4:इतना ही फ़साना हैफ़ानी दुनिया मेजाना और आना है :5:तुम कहती, हम सुनतेबीत गए वो दिनजब साथ...