ब्लॉगसेतु

“मत लिखो !”‬-चार्ल्ज़ बुकोवस्की ने कहा था,तब तक किजब तक लिखने कीहवस नहीं होती -यही कहा था उन्होंने !!और भी बहुत कुछ !कहा था किहोते है करोड़ों लेखकमुझ से जो ख़यालों मेंस्वमैथुन करते हैऔर बन जाते हैसवघोषित लेखक !मगर चार्ल्ज़,मैं क्या करूँ ?जब लार सेटपकने लगते है ये श...
लड़कियाँ अनाज के आटे सी होती है ..गाँव की लड़की बाजरा मक्का या जवारहोती है शहरी लड़कियाँ मैदे या गेहूँ सा ग़ुबार होती है ...बेली ही जाती है सब रोटी पराँठा लिट्टी क़ुल्चे सी और खाई जाती है बस भूख (!) मिटाने...
तुम्हें खोजते हुएपहुँच जाना मेरा हर बार उस क्षितिज पेजहाँ कदाचितआदम हौवा पहली दफ़े  मिले थे ...अथक  प्रयास करना मेरा हम दोनों के अस्तित्व के jigsaw puzzle से ख़यालों के और रूह के  टुकड़े जो कदाचित एक दूसरे...
एक ग़ज़ल : साज़िश थी अमीरों की--साज़िश थी अमीरों की ,फाईल में दबी होगीदो-चार मरें होंगे  ,’कार ’ उनकी  चढ़ी  होगी’साहब’ की हवेली है ,सरकार भी ताबे’ मेंइक बार गई ’कम्मो’ लौटी न कभी  होगीआँखों का मरा पानी , तू भी तो मरा होगाआँगन में तेरे जिस दिन ’तुलसी...
एक ग़ज़लसलामत पाँव है जिनके वो कन्धों पर टिके हैंजो चल सकते थे अपने दम ,अपाहिज से दिखे हैकि जिनके कद से भी ऊँचे "कट-आउट’ हैं नगर मेंजो भीतर झाँक कर देखा बहुत नीचे गिरे हैंबुलन्दी आप की माना कि सर चढ़  बोलती  हैमगर ये क्या कि हम सब  आप को बौने  दिख...
चन्द माहिया : क़िस्त 60 :1:हूरों की जीनत मेंडूबा है ज़ाहिदकुछ ख़्वाब-ए-जन्नत में :2:घिर घिर आए बदराबादल बरसा भीभींगा न मेरा अँचरा :3:ग़ैरों की बातों कोमान लिया तूनेसच,झूठी बातों को :4:इतना ही फ़साना हैफ़ानी दुनिया मेजाना और आना है :5:तुम कहती, हम सुनतेबीत गए वो दिनजब साथ...
कल जो मैं सोयाबंद कमरा देख बहुत रोया ।आंखें ना खुलती थी गर्मी भी कुछ भिगोती थी ।हवा की थी आस लगती थी बहुत प्यास ।ना आवाज़ ना शोरथी शांति चहुँ ओर ।हाथ कहीं बंधे से थेपैर भी खुलते न थे ।थी बहुत निराशामिली ना कोई आशा। एक कतरा अमृत काकुछ जीवन सा दे गयाआं...
मासूम बच्चेसाहब बिहार में नन्हें और मासूम बच्चों की मरने की संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है ,आप कहें तो कल आप का एक दौरा बिहार में बच्चों को देखने का फिक्स कर डायरी में नोट कर लूं ,असिस्टेंट ने मंत्री जी से पूछा ।मंत्री : अरे पगला गए हो का ,कल विश्व योग दिवस है...
एक ग़ज़ल : हुस्न हर उम्र में  जवां देखा---हुस्न हर उम्र में जवाँ देखाइश्क़ हर मोड़ पे अयाँ  देखाएक चेहरा जो दिल में उतरा हैवो ही दिखता रहा जहाँ देखाइश्क़ तो शै नहीं तिजारत कीआप ने क्यों नफ़ा ज़ियाँ  देखा ?और क्या देखना रहा बाक़ीतेरी आँखों में दो जहाँ देखाबज़्...
चन्द माहिया : क़िस्त 59 :1:सब क़स्में खाते हैंकौन निभाता हैकहने की बाते हैं :2:क्या हुस्न निखारा हैजब से डूबा मनउबरा न दुबारा है :3:इतना न सता माहियाक्या थी ख़ता मेरीसच,कुछ तो बता माहिया :4:बेदाग़ चुनरिया मेंदाग़ लगा बैठेआकर इस दुनिया में :5:धरती रह रह तरसीबदली आई तोआ क...