ब्लॉगसेतु

कल जो मैं सोयाबंद कमरा देख बहुत रोया ।आंखें ना खुलती थी गर्मी भी कुछ भिगोती थी ।हवा की थी आस लगती थी बहुत प्यास ।ना आवाज़ ना शोरथी शांति चहुँ ओर ।हाथ कहीं बंधे से थेपैर भी खुलते न थे ।थी बहुत निराशामिली ना कोई आशा। एक कतरा अमृत काकुछ जीवन सा दे गयाआं...
मासूम बच्चेसाहब बिहार में नन्हें और मासूम बच्चों की मरने की संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है ,आप कहें तो कल आप का एक दौरा बिहार में बच्चों को देखने का फिक्स कर डायरी में नोट कर लूं ,असिस्टेंट ने मंत्री जी से पूछा ।मंत्री : अरे पगला गए हो का ,कल विश्व योग दिवस है...
एक ग़ज़ल : हुस्न हर उम्र में  जवां देखा---हुस्न हर उम्र में जवाँ देखाइश्क़ हर मोड़ पे अयाँ  देखाएक चेहरा जो दिल में उतरा हैवो ही दिखता रहा जहाँ देखाइश्क़ तो शै नहीं तिजारत कीआप ने क्यों नफ़ा ज़ियाँ  देखा ?और क्या देखना रहा बाक़ीतेरी आँखों में दो जहाँ देखाबज़्...
चन्द माहिया : क़िस्त 59 :1:सब क़स्में खाते हैंकौन निभाता हैकहने की बाते हैं :2:क्या हुस्न निखारा हैजब से डूबा मनउबरा न दुबारा है :3:इतना न सता माहियाक्या थी ख़ता मेरीसच,कुछ तो बता माहिया :4:बेदाग़ चुनरिया मेंदाग़ लगा बैठेआकर इस दुनिया में :5:धरती रह रह तरसीबदली आई तोआ क...
मत्त सवैया मुक्तकमाला (2019 चुनाव)हर दल जो टुकड़ा टुकड़ा था, इस बार चुनावों ने छाँटा;बाहर निकाल उसको फेंका, ज्यों चुभा हुआ हो वो काँटा;जो अपनी अपनी डफली पर, बस राग स्वार्थ का गाते थे;उस भ्रष्ट तंत्र के गालों पर, जनता ने मारा कस चाँटा।इस बार विरोधी हर दल ने, ऐसा भारी...
एक ग़ज़ल : जब भी ये प्राण निकले---जब भी ये प्राण निकलें ,पीड़ा मेरी  घनी होइक हाथ पुस्तिका  हो .इक हाथ  लेखनी होसूली पे रोज़ चढ़ कर ,ज़िन्दा रहा हूँ कैसेआएँ कभी जो घर पर,यह रीति  सीखनी होहर दौर में रही है ,सच-झूठ की लड़ाईतुम ’सच’ का साथ देना,जब झूठ से...
मुफ्त,मुफ्त,मुफ्त......अब दिल्ली में औरतें  मेट्रो और बसों में मुफ्त यात्रा कर पायेंगी.कल टीवी में कुछ लोगों के उद्गार सुन समझ आया कि इस देश में  पढ़े-लिखे लोगों को भी सरलता से बहकाया जा सकता है.केजरीवाल जी स्वयं इनकम-टैक्स विभाग में काम कर चुके हैं और भली...
प्रेम एक शब्द -एक नाद हैएक ऊर्जा हैउसे माध्यम चाहिएपृथ्वी पेपनपने  के लिए ...जैसे मैं और तुम ! प्रेम काआह्लाद काकोई स्वरूप नहीं होताये निर्गुण निराकार होता  हैॐ के उस शब्द की तरहशुद्ध और . सात्विक !सुनो....हमारा प्रेम ...हमारा नेह आह्लाद  ..शाश्...
चन्द माहिया : क़िस्त 58 :1:सदचाक हुआ दामनतेरी उलफ़त मेंबरबाद हुआ ’आनन’ :2:क्यों रूठी है ,हमदमकैसे मनाना हैकुछ तो सिखा जानम :3:दिल ले ही लिया तुमनेजाँ भी ले लेतेक्यों छोड़ दिया तुमने ? :4:गिर जाती है बिजलीरह रह कर दिल परलहरा के न चल पगली :5:क्या पाना क्या खोनाजब से गए...
मोदी जी की जीत-एक विश्लेषण मोदी जी की चुनावों में प्रचंड जीत का कई बुद्धिमान लोग अब प्रचंड विश्लेषण कर रहे हैं. पर आश्चर्य है कि कोई भी विश्लेषक उन मुद्दों की ओर संकेत नहीं कर रहा जो मेरी समझ उतने  महत्वपूर्ण रहे जितने महत्वपूर्ण अन्य मुद्दे थे जिन पर बुद...