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ग़ज़ल   :  सपनों को रखा गिरवी-- सपनों को रखा  गिरवी, साँसों पे उधारी है क़िस्तों में सदा हमने ,यह उम्र  गुज़ारी  है हर सुब्ह रहे ज़िन्दा , हर शाम रहे मरते जितनी है मिली क़िस्मत ,उतनी ही हमारी है अबतक है कटी जैसे, बाक़ी भी कटे वैसे सदचाक रही ह...
एक ग़ज़ल : वो रोशनी के नाम से --वो रोशनी के नाम से डरता है आजतकजुल्मत की हर गली से जो गुज़रा है आजतकबढ़ने को बढ़ गया है किसी ताड़ की तरहबौना हर एक शख़्स को समझा है आजतकसब लोग हैं कि भीड़ का हिस्सा बने हुए"इन्सानियत’ ही भीड़ में तनहा है आजतकहर पाँच साल पे वो नया ख़्वाब बेचताज...
लक्ष्मीरंगम - Laxmirangam: अंतस के मोती: पुस्तक ऑर्डर करने के लिए निचली लाइन पर क्लिक करें. पूरा लिंक खुलेगा. उस पर क्लिक कीजिए तो खरीदने का पोर्टल खुल जाएगा फिर View cart, Go to c...
एक ग़ज़ल : झूठ का है जो फैला धुआँ---झूठ का है जो  फैला  धुआँसाँस लेना भी मुश्किल यहाँसच की उड़ती रहीं धज्जियाँझूठ का दबदबा  था जहाँचढ़ के औरों के कंधों पे वोआज छूने चला  आसमाँतू इधर की उधर की न सुनतू अकेला ही  है  कारवाँजिन्दगी आजतक ले रही...
एक व्यंग्य : बड़ा शोर सुनते थे-----’बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का ’ ।ख़बर गर्म थी ।उनकी नाक उनकी दादी जैसी है। वह आँधी हैं ’आँधी"। अगर बनारस से उठ गई तो ’कमल’ की तमाम पँखुड़ियां उड़ जाएँगी ।हाथी साथी सब हवा हो जायेगे। उनके कार्यकर्ताओं मे गजब का उत्साह था जब वो ब...
एक ग़ज़ल : कहाँ आवाज़ होती है--कहाँ आवाज़ होती है कभी जब टूटता है दिलअरे ! रोता है क्य़ूँ प्यारे ! मुहब्बत का यही हासिलमुहब्बत के समन्दर का सफ़र काग़ज़ की कश्ती मेंफ़ना ही इसकी क़िस्मत है, नहीं इसका कोई साहिलमुहब्बत का सफ़र आसान है तुम ही तो कहते थेअभी तो इब्तिदा है ये ,अभी&n...
एक ग़ज़ल : जब भी शीशे का इक मकां देखा---जब भी शीशे का इक मकां देखापास पत्थर की थी ,  दुकां देखादूर कुर्सी पे  है नज़र जिसकी उसको बिकते जहाँ तहाँ  देखावादा करता वो कस्में खाता हैपर निभाते हुए कहाँ   देखाजब कभी ’रथ’ उधर से गुज़रा हैबाद ...
चिड़िया: मानव, तुम्हारा धर्म क्या है ?: धर्म चिड़िया का, खुशी के गीत गाना  ! धर्म नदिया का, तृषा सबकी बुझाना । धर्म दीपक का, हवाओं से ना डरना ! धर्म चंदा का, सभी का ताप हरना...
चिड़िया: मानव, तुम्हारा धर्म क्या है ?: धर्म चिड़िया का, खुशी के गीत गाना  ! धर्म नदिया का, तृषा सबकी बुझाना । धर्म दीपक का, हवाओं से ना डरना ! धर्म चंदा का, सभी का ताप हरना...
एक व्यंग्य :आम चुनाव और नाक 2019। चुनाव का मौसम और मौसम का अपना मिजाज।आजकल चर्चा मुद्दों पर नहीं, नाक पर चल रही है । मुद्दे तो अनन्त है --हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता -जैसा ।कुछ मुद्दे तो शाश्वत हैं,-जैसे ग़रीबी,बेरोज़गारी,महंगाई,भ्रष्टाचार,महिला सुरक्षा,कानून-व्यवस्थ...