ब्लॉगसेतु

एक व्यंग्य : हिन्दी सेवा उर्फ़ फ़ेसबुक सेवा- भाई साहब ! सोचता हूँ कि अब मैं भी कुछ हिन्दी की सेवा कर लूँ।" -मिश्रा जी ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा-" क्यों ? अब कितनी सेवा करोगे हिन्दी की ? सरकारी नौकरी में 30-साल तक ’हिन्दी-पखवारा" में हिन्दी की सेवा ही तो की है ।ह...
जागो मतदाता, जागोदो एक वर्षों से कई राजनेता सेना के जवानों का अपमान करने की होड़ में लगे हैं. इन में से एक भी राजनेता ऐसा नहीं है जो सियाचिन की ठंड या रेगिस्तान की चिलचिलाती धूप में आधा घंटा भी रह पाए. जिन कठिनायों का सामना सीमा पर तैनात एक जवान करता है उसका इन्हें...
छतिसिंहपोरा  नरसंहारक्या कल आपने किसी मीडिया चैनल पर या किसी समाचार पत्र में छतिसिंहपोरा  नरसंहार के विषय में एक शब्द भी सुना या पढ़ा? क्या किसी ह्यूमन-राइट्स वाले को इस नरसंहार की बात करते सुना? वह लोग जो आज़ादी के नारे लगाते है या वह नेता जो उनके समर्थन म...
गालियाँ ही गालियाँ गालियों की हो रही है आजकल खूब बौछार, देश में आ गया है चुनाव फिर इक बार, शिशुपाल भी लगा है थोड़ा घबराने, उसका कीर्तिमान तोड़ेंगे नेता नये-पुराने, सब नेताओं में लगी है इक होड़, गली-गली में हो रही अपशब्दों की दौड़, एक बुद्धिजीवी को लगा यह है सुनहरा अवसर...
चिड़िया: होली: होली के अवसर पर सारे, रंगों को मैं ले आऊँ, और तुम्हारे जीवन में मैं, उन रंगों को बिखराऊँ... लाल रंग है गुलमोहर का, केशरिया पलाश का ह...
चीन का हाथ अज़हर मसूद के साथजैसी की अपेक्षा थी चीन फिर एक बार अज़हर मसूद की ढाल बना. सिक्यूरिटी कौंसिल में वह अकेला ऐसा सदस्य था जिसने उस आतंकवादी का साथ दिया.देश में कई लोग चीन के इस व्यवहार से क्रोधित हैं, कुछ प्रसन्न भी हैं. पर हर कोई इस बात की अनदेखी कर रहा हैं क...
“मसूद अज़हर  जी.......”कांग्रेस का जिहादियों के साथ अनोखा संबंध है. दिग्विजय सिंह हमेशा ओसामा का नाम बड़े सम्मान के साथ लेते हैं. एक अन्य नेता के लिए अफज़ल गुरु “जी” थे. शिंदे साहिब के लिए हाफिज़ “श्री” थे. अब राहुल गांधी के लिए भी मसूद अज़हर “जी” हो गये हैं. अब पा...
क्या सरकार को हवाई स्ट्राइक के सबूत सार्वजनिक करने चाहियें?पिछले कुछ दिनों से हवाई स्ट्राइक को लेकर आश्चर्यजनक ब्यानबाज़ी हो रही है. ऐसी-ऐसी बातें कही जा रही हैं जिन्हें सुन कर मुझ जैसा आम आदमी तो चकरा गया है. ऐसा लगता है कि सरकार पर विपक्ष और मीडिया के कुछ लोग भरपू...
भीषण ग्रीष्मधरती छूकर जलते पैरबड़ी कठीनाई से पहुचता थाबिना चप्पलों केतालाब के किनारेउस पेड़ के नीचे ।एक गौरैया गर्मी से बेहालकिनारे पानी मेंहो रही थी लोटपोट।फिर पानी से बाहर रही थी फूदक ।फरफरा रही थी पंखझाड़ रही थी पांखों की बूंदेंअल्हड़ता के साथआसपास से अनभिगव स्व...
कुछ और नहीं हमी की तरह हैये जिंदगी जिंदगी की तरह हैयो न झुका सर हर चैखटों परये आदत बंदगी की तरह हैक्यूं जां लेके घूमता है हथेली पेये जूर्रत आशिकी की तरह हैरात ख्वाबों में उससे मुलाकात हुईउसकी हर बात मौसिकी की तरह हैळो अब ख्याल गजल बनने ळगेहर खुशी गम, गम खुशी की तरह...