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लघुकथाजब उन्होंने उसकी पहली अजन्मी बेटी की हत्या करनी चाही तो उसने हल्का सा विरोध किया था. वैसे तो वह स्वयं भी अभी माँ न बनना चाहती थी. उसकी आयु ही कितनी थी-दो माह बाद वह बीस की होने वाली थी. उन्होंने उसे समझाने का नाटक किया था और वह तुरंत समझ गयी थी. लेकिन उसके वि...
निमंत्रण‘क्या तुम्हें पूरा विश्वास है कि यह निमंत्रण इस ग्रह के निवासियों के लिये है? मुझे तो लगता है कि किसी भी ग्रह के वासी पृथ्वी-वासियों को अपने यहाँ नहीं बुलाना चाहेंगे!’‘क्यों? क्या खराबी है इन जीवों में?’‘तुम्हें पूछना चाहिए कि क्या खराबी नहीं है इनमें!’एलिय...
प्रतिशोध-एक कहानीहोटल में प्रवेश करते ही दिनेश ने अमर को देख लिया. उनकी नज़रें मिलीं पर दोनों ने ऐसा व्यवहार किया कि जैसे वह एक दूसरे को पहचानते नहीं थे. परन्तु अधिक देर तक वह एक दूसरे की नकार नहीं पाये.‘बहुत समय हो गया.’‘हाँ, दस साल, पाँच महीने और बाईस दिन.’‘तुम ने...
          हेमन्त ऋतु अपने यौवन पर  है , रात्रि- समारोहों आदि में ठिठुरन से बचने के लिए  अलाव जलाए जाने  का क्रम प्रारम्भ हो चला है | प्रस्तुत है एक ठिठुरती हुई रचना .....        &n...
एक व्यंग्य : धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे---धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सव:मामका: पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजयधॄष्टराष्ट्र उवाच -- हे संजय ! सुना है मेरे ’ भारत’ भूमि पर 2019 में ’महाभारत’ होने वाला है?संजय उवाच --- किमाश्चार्यम आचार्य ! किमाश्चार्यम !...
एक लघु कथा‘यह तीसरी लड़की है जो तुमने पैदा की है.  इस बार तो कम से कम एक लड़का जन्मती,’ उसकी आवाज़ बेहद सख्त थी.एक कठोर, गंदी अंगुली शिशु को टटोलने लगी; यहाँ, वहां. भय  की नन्ही तरंग शिशु के नन्हें हृदय में उठी और उसे आतंकित करती हुई कहीं भीतर ही समा गई. अपन...
मृत्युदंडवह एक निर्मम हत्या करने का दोषी था. पुलिस ने उसके विरुद्ध पक्के सबूत भी इकट्ठे कर लिए थे. पहले दिन ही जज साहब को इस बात का आभास हो गया था कि अपराधी को मृत्यदंड देने के अतिरिक्त उनके पास कोई दूसरा विकल्प न होगा. लेकिन जिस दिन उन्हें दंड की घोषणा करनी थी वह...
एक व्यंग्य : आँख दिखाना--आज उन्होने फिर आँख दिखाईऔर आँख के डा0 ने अपनी व्यथा सुनाई--" पाठक जी !यहाँ जो मरीज़ आता है ’आँख दिखाता है " - फीस माँगने पर ’आँख दिखाता है ’। क्या मुसीबत है ---।--" यह समस्या मात्र आप की नहीं ,राजनीति में भी है डा0 साहब " मैने ढाँढस बँध...
डा श्याम गुप्त की  सद्य प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह------पीर ज़माने की -----अनुशंसा         महाकवि डा श्यामगुप्त का नया ग़ज़ल-संग्रह ‘पीर ज़माने की’ प्रकाशित होरहा है जिसमें उन्होंने उनके मन-लुभावनी, उत्साहवर्धक एवं तनाव को खुशी में...
 पोस्ट लेवल : पीर ज़माने की ---ग़ज़ल
लघुकथा-सात1 जनवरी 20..आतंकवादियों ने सेना की एक बस पर अचानक हमला कर दिया. बस में एक भी सैनिक नहीं था. बस में स्कूल के कुछ बच्चे पिकनिक से लौट रहे थे. एक बच्चा मारा गया, पाँच घायल हुए.सारा नगर आक्रोश और उत्तेजना से उबल पड़ा. लोग सड़कों पर उतर आये; पहले एक नगर में, फिर...