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एक ग़ज़ल : आज इतनी मिली है--आज इतनी मिली है  ख़ुशी आप सेदिल मिला तो मिली ज़िन्दगी आप सेतीरगी राह-ए-उल्फ़त पे तारी न होछन के आती रहे रोशनी  आप सेबात मेरी भी शामिल कहीं न कहींजो कहानी सुनी आप की आप सेराज़-ए-दिल ये कहूँ भी तो कैसे कहूँरफ़्ता रफ़्ता मुहब्बत  हुई...
क्या हम एक विक्षिप्त समाज बन गये हैं?विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में पाँच वर्ष से लेकर 29 वर्ष की आयु के बच्चों और युवा लोगों की मृत्यु का मुख्य कारण रोग या भुखमरी या मादक पदार्थों की लत या साधारण दुर्घटनाएँ नहीं है. इन बच्चों और युवकों...
सड़क दुर्घटनायें और हमारी बेपरवाहीसरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में हर दिन चार सौ से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं. निश्चय ही यह एक भयानक सच्चाई है. पर इस त्रासदी को लेकर हम सब जितने बेपरवाह हैं वह देख कर कभी-कभी आश्चर्य होता है; लगता है कि सभ्य होने में...
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कवि व पत्रकार स्वर्गीय श्यामलाल चतुर्वेदी का 7 दिसंबर 2018 की सुबह बिलासपुर स्थित एक निजी चिकित्सालय में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे। उनका जीवन महात्मा गांधी के आदर्शों से पूरी तरह से प्रभावित रहा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्र...
आजकल पटाखे फोड़ना ‘दबंग’ संस्कृति वाले लोगों के बीच खुशी का इजहार करने का फैशन बन गया है। शायद उन्हें नहीं पता कि इन पटाखों के फोड़ने से किस कदर प्रदूषण फैल रहा है और हमारी जलवायु जहरीली होती जा रही है। देश की राजधानी दिल्ली में फैले वायु प्रदूषण से शायद हर कोई अवगत...
 पोस्ट लेवल : पर्यावरण
एक लघु व्यथा : सम्मान करा लो---जाड़े की गुनगुनी धूप । गरम चाय की पहली चुस्की --कि मिश्रा जी चार आदमियों के साथ आ धमके।[जो पाठक गण    ’मिश्रा’ जी से परिचित नहीं है उन्हे बता दूँ कि मिश्रा जी मेरे वो  ’साहित्यिक मित्र’ हैं जो किसी पौराणिक कथाऒ के पात्र...
चन्द माहिया : क़िस्त 52 1जब जब घिरते बादलप्यासी धरती क्योंहोने लगती पागल ? :2:भूले से कभी आतेमेरी दुनिया मेंरिश्ता तो निभा जाते :3:कुछ मन की उलझन हैधुँधला है जब तकयह मन का दरपन है :4:जब छोड़ के जाना थाक्यों आए थे तुम?क्या दिल बहलाना था? :5:लगनी होती ,लगतीआग मुहब्बत क...
एक ग़ज़ल :वक़्त सब एक सा  नहीं होतारंज-ओ-ग़म देरपा नहीं होताआदमी है,गुनाह  लाज़िम हैआदमी तो ख़ुदा  नहीं  होताएक ही रास्ते से जाना  हैऔर फिर लौटना नहीं होताकिस ज़माने की बात करते होकौन अब बेवफ़ा नहीं  होता ?हुक्म-ए-ज़ाहिद पे बात क्या करिएइश्क़ क्...
Laxmirangam: अतिथि अपने घर के: अतिथि अपने घर के बुजुर्ग अम्मा और बाबूजी साथ हैं,  उन्हे सेवा की जरूरत है, घर में एक कमरा उनके लिए ही है  और दूसरा हमारे पा...
एक ग़ज़ल : एक समन्दर ,मेरे अन्दर...एक  समन्दर ,  मेरे  अन्दर शोर-ए-तलातुम बाहर भीतर एक तेरा ग़म  पहले   से ही और ज़माने का ग़म उस पर तेरे होने का ये तसव्वुर तेरे होने से है बरतर चाहे जितना दूर रहूँ  मैं यादें आती रहतीं अकसर एक अग...