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दंश झेलता बदहाली काहुआ राम को प्यारा रघुआ।पारसाल के वचन भरोसेसोचा कष्ट कटेंगे।रह-रह जो आँखों में उमड़ेदुख के मेघ छँटेंगे।अंध नगर में, अंधे पीसेंचौपट राजाझूठे वादेशोषित लिपट नीम से रोया और कर्ज़ से हारा रघुआ।पास नहीं फूटी कौड़ी भीजिससे मुँह भर देता,'लोन...
 पोस्ट लेवल : नवगीत / भावना तिवारी
दंश झेलता बदहाली काहुआ राम को प्यारा रघुआ।पारसाल के वचन भरोसेसोचा कष्ट कटेंगे।रह-रह जो आँखों में उमड़ेदुख के मेघ छँटेंगे।अंध नगर में, अंधे पीसेंचौपट राजाझूठे वादेशोषित लिपट नीम से रोया और कर्ज़ से हारा रघुआ।पास नहीं फूटी कौड़ी भीजिससे मुँह भर देता,'लोन...
 पोस्ट लेवल : नवगीत / भावना तिवारी
*कवयित्री विशेषांक* के लिए रचनाएँ आमंत्रित--------------------------------------------------- काव्य-केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका "अनन्तिम" का आगामी अंक (जुलाई-सितम्बर 2017) काव्य-की किसी भी विधा में अपनी तीन-तीन रचनाएँ प्रेषित करें। लघु विधाओं में यथा दोहा,...
आप जा रहे हैं दिल्ली-"विश्व पुस्तक मेला" में,तो वहाँ भी उपलब्ध है,मेरा काव्य-संग्रह "बूँद-बूँद गंगाजल "हॉल सं-12 A में, अंजुमन-प्रकाशन के -स्टॉल 337 परआपका स्वागत है !
�� अब तक मेरे गीतों को आपने 'कवि-सम्मेलनों' में  दिल से सुना, सराहा, और भरपूर प्यार दिया , उसके लिए आपकी बहुत-बहुत आभारी हूँ । अब मेरा# गीत-संग्रह ..#"बूँद-बूँद गंगाजल"..#'अंजुमन प्रकाशन' से प्रकाशित हो चुका है, जिसकी online pre-booking  का अंतिम डेढ़ घण्ट...
शूल  मिलें पग -पग पथ मेंरोड़े अगिन मनोरथ मेंविचलित हो ,विद्रोहों सेहे कलम पारजित,मत होना !!यह युद्ध भयानक अब होगाजो नहीं हुआ वो सब होगा !निर्णय शक्ति पराक्रम कायदि अभी नहीं तो ,कब होगा !अपने भी आलोचक हैंविद्वेषक आखेटक हैंव्याकुल है भीतर की पीड़ाहे कलम, धैर्य कोम...
ये पद्मश्रीये प्रशस्तियाँये अकादमीये हस्तियाँये बड़े-बड़े नामऔर उनके कामनहीं जानती मैंमैं मेरी बस्ती कीबस एक सखी को जानती हूँअभी कुछ दिन पहले ही तोईद की दी थीं उसने बधाईयाँमैंने खिलाईं थीं ख़ास मेवे वाली सिवइयाँ !!सुनो महानुभावोबड़ी चर्चा है आजकल तुम्हारीसुना है बड़े फ़ि...