ब्लॉगसेतु

कालजयी ‘दुष्यन्त कुमार जी’ के बाद आम आदम और ज़मीन से जुड़ी ग़ज़ल की परम्परा में नयी आग भरने वाले जनाब ‘अदम गोंडवी’ उर्फ़ ‘रामनाथ सिंह’ जी की यूँ तो हर ग़ज़ल आपके दिल में उतर जायेगी पर आज के माहौल में जब हर जगह ‘राय बरेली’ और उन्नाव है ऐसे में तब महान अदम की आदमक़द...
बख़्तरबन्द पहन लो साथीक्रान्ति अभी भी बाक़ी हैगाँधी या सुभाष बन जाओअन्धकार अभी भी बाक़ी है।बख़्तरबन्द पहन लो साथीक्रान्ति अभी भी बाक़ी हैजितनी जाँच समितियाँ बैठीसबको अभी उठाना होगान्यायालय में चप्पल घिसतेशख़्स अभी भी बाक़ी है।बख़्तरबन्द पहन लो साथीक्रान्ति अभी भी ब...
चलो धुरन्धर हौले हौले....हर साँस में ज़हर को पीतेमानसून के रसघट रीतेउठा के गाड़ी शिमला जाओसब को मिटाओ हौले-हौलेचलो धुरन्धर हौले हौले...कचरा-कचरा नदियाँ हों रहीतिनक़ा-तिनक़ा आदम हैसारी श्रद्दा नदी बहाकरकुम्भ मनाओ हौले-हौलेचलो धुरन्धर हौले हौले...फ़ुटपाथों पर चलना मु...
यूँ मेरी कोशिशों में कोई कसर नहीं पर देखिये आदमी है कोई असर नहींक़स्बाई तौर-तरीक़े  मिज़ाज कापथरीले शहरों में कोई घर नहीं जिन रास्तों को नापते रहे है उम्रभरवहाँ पर मील का कोई पत्थर नहींसब हलाक होते गये जो चले आये भीड़ है ईमान की कोई बसर नहीं&nbs...
जब देश की “शक्तिपीठ लूटियन दिल्ली में” क़ाबिज़ होने के लिये, सियासी सिपहसलार शतरंज की विसात पर प्यादे आगे पीछे कर रहे थे। कभी महात्मा गाँधी, कभी नाथूराम गोडसे रूपी गोटियाँ शह और मात करने को तैयार थी। ऊँच जात, नीच जात, श्रापित हेमन्त करकरे टाइप के तमाम रणनीतिया...
हमारा बचपन गाँव में गुजरा। गाँव में उस दौरान रंजिशों का दौर शिखर पर था। स्कूल या तो अपने ही नीम के पेड़ के नीचे था या बरीपाल में जो गाँव से 2 किलोमीटर स्थित था। स्कूल जाना दुष्कर था ऊपर से दुश्मनों  से बचने की जद्दोजहद। सो बेहतर शिक्षा की त...
का है बे का उखाड़ लोगों, हियाँ टेम्पो हाई है टाइप की तमाम रंगबाज़ियाँ, और तमाम झाँय झाँय लिखती।जवानी के जंगी बेड़े और उस पर उमड़ती तमाम जिज्ञासाओं को अक्षरों में अंकित करती। पान की पीकों से गंगा मेला मनाती। कम्पू की किताब’ प्रत्यक्ष प्रकट हुई।#टेम्पो_हाई_है#Tempo_h...
ये गीत किताब की कहानियों की एक बानगी भर है... #नाइंटी(90) #वनएटी(180) मारती कौमो की दास्ताँ भीकि टेम्पो हाई हैकानपुरी कंटाप कराराबापू ने जब हपक के माराभूत प्रेम का भाग गया हैअक़्ल ठिकाने आयी हैकि टेम्पो हाई है .....भोर भये टेशन पे लुट गये3-5 में भीषण ठुक गयेतब याद...
कहानियाँ कानपुरी कँटाप की तरह कि लगे गाल पे और जिगर झन्ना उठे। कहानियाँ सफ़ेद बुर्राक बुशर्ट पर लगे आलू वाले ठप्पे की छाप जी तरह कि लगे पीठ पे दिल कल्ला उठे। कहानियाँ 312 बोर के कट्टे से चली गोली की तरह जो मरने के ख़ौफ़ से ज़्यादा ज़िन्दा बचने की दहशत दिलो में भर द...
पेट्रोल मूतते माननीय, मैं और आप दयनीय जब कल माननीयो में जूतमपैजार हो चुकी थी। माने जैसा मीडिया लिखता था।सांसद त्रिपाठी जी जब विधायक बघेल साहब की पूजा चरण पादुकाओ से कर चुके थे। वासेपर वाले फैज़ल खान से भी ज़्यादा अलंकृत गालियाँ बक चुके थे।तब मैं गुरुग्राम में...