ब्लॉगसेतु

कोई छह महीने पहले हमारे व्हाट्सएप ग्रुप गूंज में मेरी कुछ कविताओं पर प्रभात मिलिंद जी ने यादगार टिप्पणी दी थी, जो कुछ वजहों से सहेजे हुए रखा था। आज पहले उनकी समालोचनात्मक प्रतिक्रिया और फिर अपनी वो कविताएँ पोस्ट कर रहा हूँ, जिस पर प्रभात जी ने अपनी बातें रखी थी&nbs...
स्कूल - कालेज के दिनों में, कितने थेथर से होते थे न दोस्त ! साले, चेहरा देख कर व आवाज की लय सुनकर परेशानी भाँप जाते थे । एक पैसे की औकात नहीं होती थी, खुद की, पर फिर भी हर समय साथ खड़े रहते थे । और फिर फीलिंग ऐसी आती थी जैसे अंबानी/टाटा हो गया हूँ, पता नहीं किस किस...
पिछले ग्यारह वर्षों से ब्लॉग पर हूँ | "जिंदगी की राहें" के नाम से खुद की रचित कविताओं का ब्लॉग है | slow and steady के सिद्धांत पर रहा हूँ ! ब्लॉग पर बेशक पोस्ट करने के अंतराल में गैप रहता है लेकिन कोशिश रहती है लगातार अपडेट होती रहे ! इन्ही वजहों से साढ़े पाँच लाख...
 पोस्ट लेवल : ब्लॉगर iblogger blogger
पिछले कुछ दिनों से मोर्निंग वाक के चक्कर में रूट बदल बदल कर लोधी कॉलोनी के हर कोने को देख रहा हूँ, महसूस रहा हूँ। :) लोधी कॉलोनी और इसके इर्द गिर्द बेहद खुबसूरत हरियाली के साथ बहुत से जाने पहचाने स्मारक/बिल्डिंग/साईं मंदिर/गार्डन/स्टेडियम के साथ हेबिटेट स...
 पोस्ट लेवल : मकबरा खां नजफ़ haunted
बात 2008 की थी, उन दिनों ऑरकुट का जमाना था, तभी एक नई बात पता चली थी कि "ब्लोगस्पॉट" गूगल द्वारा बनाया गया एक अलग इजाद है, जिसके माध्यम से आप अपनी बात रख सकते हैं और वो आपका अपना डिजिटल डायरी होगा | जैसे आज भी कोई नया एप देखते ही डाउनलोड कर लेता हूँ, तो कुछ वैसा ही...
गाँव में कई बार रात को घुप्प अँधेरे में जाना होता, स्ट्रीट लाइट तो होती नहीं थी, टोर्च भी नहीं होता! जोश में कह देते कि जा रहे मैया पर कुछ कदमों बाद ही सारी अकड़ पल भर में ढ़ीली हो जाती ! पुरे रास्ते लगता कोई तो पीछा कर रहा ! खुद की छाया भी बड़ी परेशान करती ☺️&nb...
साहित्य के सलमान खान की तरह हैं हम सब की Geeta Shree। दबंगई के साथ संवेदनाओं को समेटे सबकी दोस्त हैं गीताश्री।पिछले दिनों उन्होंने मेरे कविताओं पर छोटी सी पोस्ट बनाई और उसके दो दिन बाद ही आईआइसी में मिलने का अवसर मिला, तो इस पोस्ट को सहेजने के लिए मुझे इससे बेहतर ऑ...

बात 2008 की थी, उन दिनों ऑरकुट का जमाना था, तभी एक नई बात पता चली थी कि "ब्लोगस्पॉट" गूगल द्वारा बनाया गया एक अलग इजाद है, जिसके माध्यम से आप अपनी बात रख सकते हैं और वो आपका अपना होगा | जैसे आज भी कोई नया एप देखते ही डाउनलोड कर लेता हूँ, तो कुछ वैसा ही ब्लॉग बनाना...
लेखक : मुकेश कुमार सिन्हाश्रेणी : लप्रेक (लघु प्रेम कथा) संग्रहप्रकाशक : बोधि प्रकाशन, जयपुर (राजस्थान)कीमत : ₹100किताब के बारे में कुछ कहने से पहले ‘दो शब्द’ इस किताब के लेखक और मेरे मित्र ‘मुकेश कुमार सिन्हा’ के बारे में कहना चाहती हूँ जिन्हें माँ शारदे से कलम का...