ब्लॉगसेतु

 अतरंगी इश्क अतरंगी है तेरा इश्क ,ज़िस्मानी से रूहानी ,काले से सफ़ेद तक ,हर रंग में सजा है तेरा इश्क ...हाँ, सतरंगी है तेरा इश्क |कभी हरे रंग में भीग  दिल की ज़मीं को सूफ़ियाना  देता है रंगकभी केसरिया फूल-सा भक्ति से महका जा...
 औरत की आवाज़औरत की आवाज़ हूँ मैं , हमेशा से पुरज़ोर कोशिश की गई, मुझे दबाने की , हमेशा सिखाया गया मुझे ....... सलीका , कितने उतार-चढ़ाव के  साथ, निकलना है मुझे  | किस ऊँचाई तक जाने की सीमा है मेरी , जिसके ज्यादा ऊँची होने पर मैं, कर जाती हूँ प्रवेश बद...
 पोस्ट लेवल : कविता नज़्म
अदृश्य दीवार  हाँ , दिखती तो नहीं आँखों के समक्ष कोई बंदिश, कोई बाड़, कोई दीवार ,साफ़-साफ़ दिखती है आमंत्रण देती दुनिया पास बुलाता उन्मुक्त खुला आकाश पर कदम बढ़ाते ही उड़ने को पंख फड़फड़ाते ही टकरा जाते हैं पाँव उलझने लगते हैं पंख आखिर क्या है वो जिससे टकरा लौट आते ह...
 पोस्ट लेवल : कविता नज़्म
 आत्मनिर्भर औरतें जिन्हें अहसास दिलाया जाता है बार-बार , हर बार जब घर के भीतर कभी अपना सिर, अपनी आवाज़ उठाती हैं वो किसी बात पर अपना विरोध जताती हैं वो समझाया जाता है उन्हें घुमा-फिराकर कही बातों में कुछ स्पष्ट शब्दों में कुछ इशारो में .....देखो, इस चारदीवारी क...
 पोस्ट लेवल : कविता
 रीता मन - रीते नयन, भीगे-भीगे पल क्या लिखूँ? सूना आँगन - सूना उपवन, उल्लास प्रेम का क्या लिखूँ?   वे सावन संग भीगे थे हम, रुत वसंत झूमे थे संग, मकरंद प्रेम का बिखरा था, बूँदों में तन-मन पिघला था, तुम संग सब मौसम बीते, पतझड़ का सूनापन क्या लिखूँ ?   व...
 पोस्ट लेवल : गीत
 कितनी कसौटियाँ, कितनी परीक्षाएँ, तुम बनाते रहे ... हर बार , परखने को .... एक औरत का किरदार | हर बार, अपने ही बनाए आदर्शों पर तुमने उसे जाँचा - परखा – घिसा – नापा - तोला, और लगा दिया टैग ... किसी पर पाकीज़ा .... किसी पर दागदार किसी पर बेगैरत ... किसी पर गैरत...
 पोस्ट लेवल : नज़्म
 
 पोस्ट लेवल : गज़ल