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जानिये डॉ अंबेडकर की वह दो बाते जिन्‍हे सफाई कामगार दलित जातियों ने नही माना संजीव खुदशाह वैसे तो दलितों में विभिन्न जातियां होती है। विभिन्न जातियों के पेशे भी भिन्न भिन्न होते है। लोकिन पूरी दलित जातियों के बड़े समूह को दो भागों में बांट कर देखा जाता रहा है।...
लेखकों के जमीनी आंदोलन का नाम है दलित पैंथरसंजीव खुदशाहवंचित वर्ग के आंदोलन का विश्व में एक अलग इतिहास है और उसका एक अपना मकाम है।  विश्व के वंचितों के आंदोलन का इतिहास, दलित पैंथर के जिक्र के बिना पूरा नहीं हो सकता। बहुत थोड़े समय चले इस दलित आंदोलन ने भारत म...
जानिए कितना बहुमूल्य है आपका वोटसंजीव खुदशाहभारत के ग्रामीण मतदाताओं में वोट के प्रति जागरूकता शहरी मतदाताओं के वनिस्पत कुछ ज्यादा होती है। आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत ज्यादा होता है और शहर के क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत कम होता है...
तेजिंदर गगन का जानासंजीव खुदशाहवरिष्ठ पत्रकार  प्रभाकर चौबे के दिवंगत होने की खबर का अभी एक पखवाड़ा भी नहीं हुआ था की खबर आई, तेजिंदर गगन नहीं रहे। मुझे याद है तेजिंदर गगन से मेरी पहली मुलाकात एक कार्यक्रम में हुई थी। वह एक राज्य संसाधन केंद्र के द्वारा आ...
आंबेडकर जयंती पर विशेषडॉ आंबेडकर और उनका वैज्ञानिक चिंतनसंजीव खुदशाहअक्सर डॉ आंबेडकर को केवल दलितों का नेता कहकर संबोधित किया जाता है। ऐसा संबोधित किया जाना दरअसल उनके साथ ज्यादती किया जाने जैसा है। ऐसा कहते समय हम भूल जाते हैं कि...
लेखक और केंद्रीय जेल अधीक्षक श्री राजेंद्र गायकवाड बता रहे हैं कि किस प्रकार वह साहित्य और जेल के बीच सामंजस्य बैठाते हैं। वह यह भी बताते हैं कि पिछले साल कैदियों ने श्रम करके दो करोड़ रुपया कमाया। इसमें से आधी रकम उन पीड़ितों को दी गई जिन्हें इन कैदियों के द्वारा...
स्टीफन हॉकिंग - जो हार कर भी जीत जायेसंजीव खुदशाह‘’वे लोग जिन्हें उनके IQ पर बहुत घमंड होता है, वे दरअसल हारे हुए लोग होते हैं.’’‘’मैंने नोटिस किया है कि ऐसे लोग जो यह विश्वास करते हैं कि वही होगा जो भाग्य में लिखा होगा, वही सड़क पार करने से पहले सड़क को गौर से देख...
सामाजिक बहिष्कार पर रोक कैसे हो?संजीव खुदशाहहमारे देश में अनेक जातियां उपजातियां है जिनके अलग-अलग कानून कायदे और रूढ़ियां है तथा उन समाज के सामाजिक दबंगों का एकछत्र राज चलता है। परंपराओं वा रीति-रिवाजों को जबरजस्ती मनवाने ना मानने पर सामाजिक बहिष्कार का सिलसिला चलत...
क्‍या  रावण यदि दलित या ओबीसी होते तो दशहरा मातम में बदल जाता?संजीव खुदशाहमुझे इस पर लिखने का ख्‍याल तब आया, जब कॉलोनी के एक WhatsApp ग्रुप पर ब्राह्मण मित्र ने मैसेज भेजा उसका मजमून कुछ इस तरह था की ‘रावण ब्राह्मण जाति से ताल्लुक रखता था। बावजूद इसक...
आज कीपेड स्मार्ट फोन मानो अजायबघर की शान बन गई है इस फोन की बिक्री लगभग बंद हो चुकी है बिक्री यदि जोरो में है, तो बस स्मार्टफोन कम से कम कीमत में भी अधिक से अधिक कीमत में भी स्मार्ट फोन ने लोगों की जिंदगी को बहुत हद तक प्रभावित किया है खासतौर पर व्हाट्सएप ने. यदि क...