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बैंक की नौकरी भी कम उलझाऊ नहीं है. मनोहर नरूला जी ने जब बैंक ज्वाइन किया तो जवान थे और तब नौकरी के लिए भारत के किसी भी कोने में जाने को तैयार थे. पर उन्हें दिल्ली में ही रख लिया गया. पांच साल बाद अफसर बने तो उनकी दिली ख्वाहिश थी की मुम्बई या गोआ भेज दिया जाए. पर बै...
 पोस्ट लेवल : चलते चलाते
बैंक का पब्लिक डीलिंग का समय समाप्त हो गया था और गेट बंद हो चुका था. इसलिए बैंकिंग हाल में हलचल घट गई थी. ऐसे में कपूर साब इधर उधर नज़र घुमा रहे थे. - कपूर साब किसे ढूंढ रहे हैं जी?- बच्चे अज स्वेर तों किसी कुड़ी नाल गल नई कित्ती, कह कर कपूर साब मिसेज़ सहगल के पा...
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाता है. हर साल इस 'त्यौहार' की कोई ना कोई थीम रख दी जाती है और इस बार अर्थात 2020 की थीम है 'घर में योग'. कोरोना के साइड इफ़ेक्ट कहाँ नहीं पहुंचे!पिछले बरसों में क्रम यूँ था:योग दिवस 2015 की थीम थी - सामंजस्य और शांति,योग दिव...
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परांठे पर टैक्स? वो भी 18%? ये तो सरासर अन्याय हो गया. सुबह नाश्ते में परांठा ना हो तो सारा दिन ऐसा महसूस होता है कि नाश्ता ही नहीं किया. कई बार तो परांठे का नाश्ता करने मूरथल भी हो आये. मूरथल ढाबों की तो शान है परांठा. पर जब अखबार पढ़ी तो पता लगा की खबर सही है. 'तै...
 पोस्ट लेवल : चलते चलाते
 छुट्टी आ रही है बच्चो एक हफ्ते की. दादी के घर जाना है क्या?- हाँ हाँ! ट्यूबवेल में नहाएंगे.- तो अपने अपने बस्ते तैयार कर लो. सन्डे सुबह छे बजे निकलेंगे. तुम दोनों वहीँ रुक जाना हम दोनों वापिस आ जाएँगे. फिर अगले सन्डे मैं तुम दोनों को वापिस ले आऊंगा. ठीक है?-...
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मैनेजर बनने के बाद नरूला साब बधाइयों के मज़े ले रहे थे. जब प्राचीन काल में बैंक ज्वाइन किया था तब तो लगता था कि क्लर्क ही रिटायर हो जाएंगे. परन्तु बैंक ने धड़ाधड़ ब्रांचें खोलनी शुरू कर दी तो प्रमोशन भी थोक के भाव होने लगी. और नरूला साब भी पहले अफसर और फिर मैनेजर भी ब...
 पोस्ट लेवल : Sketches around Banking
रजनी उर्फ़ रज्जो अपने माता पिता की पहली संतान थी. दोनों खुश थे पर बापू सोच रहा था अगली बार लड़का होना चाहिए. लड़की दो साल की होने वाली थी पर कोई बात या किसी शब्द का उच्चारण ही नहीं कर रही थी तो वो डॉक्टर से मिले. उन्हीं बताया गया की शहर के बड़े अस्पताल में दिखाना होगा....
 पोस्ट लेवल : चलते चलाते
नौकरी जब तक नहीं लगी थी तब तक यूनियन के बारे में पता नहीं लगा था. सन 1972 में बैंक ज्वाइन किया तो साथ ही यूनियन का सदस्यता फॉर्म भी भर दिया. भर दिया या भरना पड़ा इन दो में से आपको जो ठीक लगे वो ही मान लें. जब यूनियन की आठ दस मीटिंग अटेंड कर ली तब समझ में आने लगा की...
 पोस्ट लेवल : Sketches around Banking
पति पत्नी दोनों जॉब करते हों तो अर्थ शास्त्र आसान हो जाता है. दोनों के खातों में पैसा दो पैसे जमा होते रहते हैं और जमा होते होते रुपए भी बन जाते हैं. पर इन सिक्कों की पिक्चर का दूसरा पक्ष भी है जिसमें बच्चे और मम्मी पापा भागते दौड़ते ही नज़र आते हैं. ऐसे में डबल इनकम...
 पोस्ट लेवल : चलते चलाते
परिवार बड़ा था - हम सात भाई बहन, मम्मी, दादी और पिताजी. परिवार की आर्थिक साइकिल खींचने वाले अकेले पिताजी ही थे. बचपन में तो पता नहीं लगा की तनखा क्या होती है और 'पर कैपिटा' खर्च क्या होता है. उस समय के अनुसार ठीक ठाक ही रहा होगा. पर कभी कभी महसूस जरूर हो जाता था. मस...
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