ब्लॉगसेतु

नमस्कार. आपके साथ मेरी एक नई पहल के बारे में शेअर करना चाहता हूँ|क्या आपको लगता हैं कि आप फिट हैं और आपको और फिट होना है? क्या आपको लगता है कि आपने व्यायाम करना चाहिए? क्या आपको स्वस्थ जीवनशैलि अपनानी है? और यह सब करते समय आपको कुछ दिक्कतें आती हैं, कुछ प्रश्न आते...
११ (अन्तिम): इस यात्रा का विहंगावलोकन  इस लेखमाला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए| ७ अगस्त की सुबह बससे लोसर से निकला और शाम को मनाली पहुँचा| वास्तव में इस पूरी यात्रा का यह हिस्सा ही सबसे अधिक डरावना और रोचक भी लगा| बहुत ज्यादा बरफ भी‌ करीब से देखने क...
१०: एक बेहद डरावनी बस यात्रा इस लेखमाला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए| ५ अगस्त की शाम को बड़े बुरे हालत में लोसर पहुँचा! काज़ा से सुबह निकलते समय तो सोचा था कि  काज़ा से लोसर और लोसर से कुंजुमला दर्रे तक जाऊँगा और वैसे ही वापस काज़ा को जाऊँगा| लेकीन...
९: काज़ा से लोसर. . . इस लेखमाला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए| ५ अगस्त की सुबह! काज़ा में अच्छा विश्राम हुआ| अब तय हो गया है कि मै लदाख़ की तरफ नही जा पाऊँगा, क्यों कि जम्मू- कश्मीर बन्द अभूतपूर्व रूप से शट डाउन हुआ है| इस कारण अब मन में दो विचार हैं|...
८: ताबो से काज़ा इस लेखमाला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए| ३ अगस्त को नाको से ताबो पहुँचा| ताबो बहुत शानदार गाँव लगा| छोटा सा, लेकीन सड़के अच्छी हैं, होटल- दुकान भी हैं, लेकीन फिर भी गाँव ही है| पर्यटक और विदेशी पर्यटक भी हैं, लेकीन फिर भी शान्त गाँव ल...
 पोस्ट लेवल : Tabo स्पीति Kaza काज़ा Spiti ताबो
७: नाको से ताबो इस लेखमाला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए| १ अगस्त का वह दिन! गलितगात्र स्थिति में नाको पहुँचा| क्या दिन रहा यह! लगभग शाम होते होते अन्धेरे के पहले नाको पहुँच गया! जीवनभर के लिए अविस्मरणीय राईड रही! अविश्वसनीय भी! नाको में एक होटलवाले...
६: स्पिलो से नाको इस लेखमाला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए| ३१ जुलाई शाम को स्पिलो में होटलवाले युवकों‌ से अच्छी‌ बात हुई| यहाँ‌ से अब बौद्ध समुदाय ही मुख्य रूप से हैं| रहन- सहन और खाना भी लदाख़ जैसा लग रहा है| किन्नौर के इस दूरदराज के क्षेत्र में गाँ...
५: टापरी से स्पिलोइस लेखमाला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए| ३१ जुलाई! टापरी में सतलुज की गर्जना के बीच नीन्द खुली| कल की साईकिल यात्रा क्या रही थी! और सड़क कितनी अनुठी थी! आज भी यही क्रम जारी रहेगा| अब मन बहुत प्रसन्न एवम् स्वस्थ है| एक दिन में बहुत फर्क ल...
४: रामपूर बुशहर से टापरी इस लेखमाला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए| २९ जुलाई की शाम रामपूर बुशहर में बिताई| दो दिन शिमला और नार्कण्डा में ठहरने के बाद यहाँ बहुत गर्मी हो रही है| शाम को कुछ समय के लिए लगा कि बुखार तो नही आया है| उस दिन ठिक से विश्राम न...
३: नार्कण्डा से रामपूर बुशहर इस लेखमाला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए| २९ जुलाई! इस यात्रा का दूसरा दिन| आज नार्कण्डा से रामपूर बुशहर की तरफ जाना है| कल नार्कण्डा में अच्छा विश्राम हुआ| रात बारीश भी हुई| २७०० मीटर से अधिक ऊँचाई पर रात में कोई दिक्कत...