ब्लॉगसेतु

(चित्र इंटरनेट से साभार)आज आप के लिए पेश हैं दो कवितायें - पहली मैथिली कविता जिसका अनुवाद स्वयं कवि ने किया है और दूसरी राजस्थानी कविता जिसका अनुवाद किया है नीरज दईया ने। ये कवितायें लगभग १५-२० साल पहले छपी थीं।अनरुध नदी नहीं उलौंघता...
पुरानी पत्रिकाएं पलटते समय यह कविता एक बार फिर पढ़ने को मिली और कही भीतर तक छू गयी। के. अय्यप्पा पनिक्कर की एक मलयालम कविता जिसका यह अनुवाद १५ वर्ष पहले छापा था -मलयालम से अनुवाद किया था रति सक्सेना ने-दीदी ! क्या अमेरिका से 'फोक्स' आया ?'फोक्स' लोमड़ी ? देखती...
पिछले काफी समय से कुछ लिखना नहीं हुआ। बस ब्लॉग दुनिया के चक्कर लगा कर चला जाता था। एक दिन मन हुआ कि चलो अपने पसंदीदा कुछ ब्लाग्स के अलावा भी देखें कि क्या हो रहा है... पर क्या कहूं... वो बिज़लियाँ गिरी के ख़ुदा याद आ गया। इतनी गन्दगी, इतनी बकवास। लोगों के पास कहाँ...
 पोस्ट लेवल : वडाली बंधू
सभी दोस्तों को नव वर्ष मंगलमय हो। आज इसी शुभकामना के साथ लगभग आधे वर्ष के अंतराल के बाद फिर आप सब से मुखातिब हूँ। इस अनुपस्थिति के लिए ह्रदय से क्षमाप्रार्थी हूँ। बहाना वही पुराना- रोजगार के ग़म। खैर यह तो आप भी जानते हैं कि यह बस बहाना है......इस अवधि में यद्यपि ब...
आइये आज हैं गु़लाम अली साहब को। अस्सी के दशक में जब गज़लें सुनने (और सुनाने का भी) जूनून सा था तब जिन गायकों को सुन एक मदहोशी की सी स्थिति रहती थी उन में एक नाम गुलाम अली का भी है। उस्ताद मेहंदी हसन, जगजीत सिंह और गु़लाम अली इन तीन गायकों की ग़ज़लों का खुमार अभी त...
 पोस्ट लेवल : गुलाम अली
आज लगभग महीने भर बाद आप से मुखातिब हूँ। कुछ व्यस्तता और कुछ आलस्य। तो फ़िर आइये आज इस खामोशी को तोड़ते है आबिदा जी की आवाज़ से। लेकिन इस रस गंगा के पान से पहले आबिदा जी के बारे में यह आलेख-The uncrowned Sufi Queen Pakistani singer Abida Parveen´s truly amazing vo...
 पोस्ट लेवल : आबिदा परवीन
आज पढ़ते हैं उर्दू के आधुनिक शायर अमीर आगा़ कज़लबाश की कुछ मेरी पसंदीदा गज़लें। अमीर की शायरी आज की जिंदगी की शायरी है। उसमें जहाँ हमारे दुःख दर्द मौजूद हैं वहीं निजता की पहचान भी है। इस 'तेज रफ़्तार मुसाफिर' की दो गज़लें आपकी नज़र हैं-मेरे नसीब में मेरी अना1 को ज़िंदा...
आइये आज फ़िर जिक्र करें महान शायर फ़िराक गोरखपुरी साहब का। यह उस शायर का जिक्र है जो हजार खराबियों के बाद भी जिंदगी को खुल्दे-बरीं पर तरजीह देता है। जो जिंदगी का शायर है, विवेक का शायर है। जो प्रेम को शारीरिक रति मात्र से निकाल कर उस बौधिक धरातल पर ले जाता है जहाँ...
सूफ़ी कविता प्रेम की कविता है और अगर गायक नुसरत जैसा हो तो इस प्रेम कविता को चार चाँद लग जाते है। रूह की जिन गहराइयों को से सूफ़ी कविता निकलती है उन्ही गहराइयों को प्रतिध्वनित करता है बाबा नुसरत का गायन। उनके गायन में एक सम्मोहन सा है और वे ख़ुद भी किसी सम्मोहन में...
आज बहुत दिनों बाद इधर आना हुआ, इसके लिए सभी दोस्तों से माफ़ी चाहूंगा। वही रोजगार के गम। खैर इस दौरान आप लोगों को पढ़ता-सुनता जरूर रहा हूँ बस कुछ लिखना नहीं हो पाया।आइये आज सुनते हैं फ़रीदा खानम को। कुछ गज़ले गायक की पहचान बन जाती हैं। ऐसी ही ग़ज़ल है - आज जाने की...