ब्लॉगसेतु

स्नेहिल अभिवादन--------सोमवारीय विशेषांक में आप सभी कास्वागत है।आइये महसूस करें एहसास के विविध रूपों को-★एहसास------जीवन के बेढब कैनवास परभावों की कूची सेउम्रभर उकेरे गयेचेहरों के ढेर में ढूँढ़ती रही एहसास की खुशबू धूप ,हवा ,पानी, ...
 पोस्ट लेवल : 1466
जय मां हाटेशवरी......पतझड़ दिया था वक़्त ने सौगात में मुझेमैने वक़्त की जेब से ‘सावन’ चुरा लियासादर अभिवादन.....अब पेश है.....मेरी पसंद के कुछ लिंक.....मुक्तक : - फाड़कर कुछ आपके वहाँ का , कुछ मेरे भी यहाँ का ,जानूँ न कैसा-कैसा ,जाने कहाँ-कहाँ का ?आँखों से अपनी चुन-...
 पोस्ट लेवल : 1465
:न ठहरने की है मियाद का पतान जाने की इज़ाज़त जरुरी।ज्योति स्पर्श:हाय-तौबा मची जाने क्या-क्या ले जाएंगेछीना-झपटा बटोरा यहाँ, वहाँ भी पायेंगे।विभा रानीअधजल गगरी छलकत जायआखिर कब तक चलेगा ये सिलसिला   ? बिना सिर पैर के कुछ भी बको  ? लल्लन जी आये दिन&n...
 पोस्ट लेवल : 1864
सादर अभिवादन। प्रश्न को उत्तर से निकलते देखा है, कहाँ रहती आयी ग़रीबी की रेखा है,अवसर की तलाश में बैठे मत रहना, मत कहना कारवाँ गुज़र गया मैंने नहीं देखा है!  -रवीन्द्र  आइए आपको अब आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-क्या छोडूं और क्या बा...
 पोस्ट लेवल : 1463
स्नेहिल अभिवादन--------अतिवृष्टि से बेहाल देश के पाँच राज्यों के निवासी बाढ़ की मार झेल रहे हैं।हम रटा रटाया वही प्राकृतिक आपदा को दोष देकर सारा ठीकरा नियति के सर फोड़ देते हैं।बाढ़ से पीड़ित जन-जीवन की व्यथा समझने का ढ़ोंंग करने के सिवा हम करते ही क्या है।एक...
 पोस्ट लेवल : 1462
।।भोर वंदन।।पकी जामुन के रँग की पागबाँधता आया लो आषाढ़ !उड़ गयी सहसा सिर से पागछा गये नभ में घन घनघोर! छुट गई सहसा कर से पाग-बढा आँधी पानी का जोर!लिपट लो गई मुझी से पाग,झूमता डगमग पग आषाढ़!पंडित नरेंद्र शर्मा सुबह सवेरे की छंद युक्त रचनाओं के साथ आज की लि...
 पोस्ट लेवल : 1461
स्नेहिल अभिवादनमर गई गइया...........बछिया की भी गर्दन मरोड़ फेंक आया मंदिर के पिछवाड़े... अब कलेजे में पड़ी थी ठंढकउधर औरत की लाश तैर रही थी कुंए में और मंदिर के पिछवाड़े एक मरा बच्चा मिला था ...पुलिस छानबीन कर रही थी और रघु साधू के भेष में घूम रहा था वृ...
 पोस्ट लेवल : 1460
स्नेहिल नमस्कार--------सोमवारीय विशेषांक में आप सबका हार्दिक अभिनंदन है।★★★★★टप-टपाती मादक बूँदों कीरुनझुनी खनक,मेंहदी की खुशबू से भींगा दिन,पीपल की बाहों मेंझूमते हिंडोले,पेड़ों के पत्तों,छत के किनारी सेटूटतीमोतियों की पारदर्शी लड़ियाँआसमान केमाथे पर बिखरी...
 पोस्ट लेवल : 1459
स्नेहिल अभिवादन-----जो लेखक समय के समग्र शिल्प में जीवित नहीं रहता उसकी विकलांगता निश्चित है। इसके बाद भी वह जनता के स्मरण में रहेगा—रह पाएगा या नहीं, यह अनिश्चित है। हो सकता है, उससे ग़लतियाँ हो जाएँ। जिसे वह अतीत का समृद्ध वर्चस्व समझता है, वह वास्तव में रूढ़ियाँ ह...
 पोस्ट लेवल : 1458
कल देर रात तक फेसबुक पर वीडियो प्रेम में उलझी रहीकद्रदान तारीख़ तेरह वार शनिवारअसर हुआ तो बुढ़िया का बेड़ा पारलो नहीं समझ में आई बातें टेढ़े-मेढ़ेआगे खेत था। सरसों की तरह बारीक दोनों वाले कोसरा कीझुकी-झुकी बालियाँ ढलवान से लेकर पहाड़ी के चढ़ाव तक फैली हुई थीं।जगह-ज...
 पोस्ट लेवल : 1457