ब्लॉगसेतु

जय मां हाटेशवरी.....सर्वोच-न्यालय  का ऐतिहासिक     फैसला....अयोध्या में  विवादित स्थल पर बनेगा राम मंदिर.... मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक  जमीन.....सदियों पुराना विवाद सुलझ गया.....ये भारत की  अखंडता के लिये अति आवश्यक था......
 पोस्ट लेवल : 1577
सभी को यथायोग्यप्रणामाशीषहाँ! हर मुद्दे के जज और मजिस्ट्रेटहोता जाएगा सब-कुछ मटियामेटउकसाओ भाँति-भाँति के अर्थों से फेंटदमन करो कर चेतना काआखेटलेकिन अभी वह सोच ही रहा था कि अब दंग रह गया है.उसके भीतर कोई नन्‍हीं सी घंटी बजी है और उसका यह ख़यालख़ुद ब ख़ुद पहले तक पह...
 पोस्ट लेवल : 1576
स्नेहिल नमस्कार-–---–क़लम की नोंक रगड़ने से स्याही लीपने-पोतने सेबड़े वक्तव्यों सेआक्रोश,उत्तेजना,अफ़सोस या संवेदना की भाव-भंगिमा सेनहीं बदला जा सकता है किसी का जीवन,समाज की विचारधारादेश की दुर्दशापर घर बना लेती हैंं मन की तह मेंव्यवहार की...
 पोस्ट लेवल : 1575
सादर अभिवादन। क्लांत और निष्प्रभ शाम किसको सुहाती है भला,पंछियों का हो कलरव और अभिसार न हो टला। -रवीन्द्र    आइये अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें- रेगिस्तान.......डॉ. जेन्नी शबनम किसी ऋषि ने लिख दिया था क...
 पोस्ट लेवल : 1574
स्नेहिल अभिवादन-------पम्मी जी की अनुपस्थिति मेंआज की शुरुआत कविश्रेष्ठ मैथिलीशरण गुप्तकी कुछ पंक्तियों के साथ...नर हो, न निराश करो मन कोनिज गौरव का नित ज्ञान रहेहम भी कुछ हैं यह ध्यान रहेमरणोंत्‍तर गुंजित गान रहेसब जाय अभी पर मान रहेकुछ हो न तजो निज साधन कोनर...
 पोस्ट लेवल : 1573
सादर अभिवादनमंगल का दिनसच में बड़ा शुभ दिनचुप रहना ही उचित हैचलिए चलें रचनाओं की तरफ...ईश्वर का वास ..एक सन्यासी घूमते-फिरते एक दुकान पर आये, दुकान मे अनेक छोटे-बड़े डिब्बे थे, सन्यासी के मन में जिज्ञासा उतपन्न हुई,  एक डिब्बे की ओर इशारा करते हुए सन्यासी ने दु...
 पोस्ट लेवल : 1572
स्नेहिल नमस्कार----सोमवारीय विशेषांक में आपसभी काहार्दिक अभिनंदन है।आपने महसूस किया है बदलते मौसम में प्रकृति की गुनगुनाहट.... ऋतुओं के संधिकाल में प्रकृति की असीम ऊर्जाधरती पर आच्छादित रहती है।कास के फूलों का श्वेत मनमोहक रेशमी दुपट्टा ओढ़े धरा,बादलों की अठखेलियाँ...
 पोस्ट लेवल : 1571
जय मां हाठेशवरी.....आज कुछ अधिक व्यस्त हूं.....इस लिये बिना भूमिका के ही.....आज की प्रस्तुति का आरंभ....मेरी प्रिय पंजाबी कवयित्रि अमृता प्रीतम  जी  की चंद पंक्तियों के साथ.....आज मैंने अपने घर का नम्बर हटाया हैऔर गली के माथे पर लगागली का नाम हटाया हैऔर ह...
 पोस्ट लेवल : 1570
वह शहर जो पीछे छूट गया हैवह गाँव जो उदास हैवे घर जिनमें बंद पड़े हैं तालेजहाँ कुंडली मारे बैठा है अँधेरावहाँ ठहर जानाअपने घोड़ों को कहनावे वहाँ रुके रहें थोड़ी देरछठ पर्व पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार लोग प्रसाद की व्यवस्था करते हैं।सात, ग्यारह, इक्कीस व इक्यावन प्रका...
 पोस्ट लेवल : 1569
स्नेहिल नमस्कार---------सूर्य के बिना धरा पर जीवन संभव नहीं,सूर्य, प्रकृति औरमानव को मानव से जोड़ने का महापर्व है छठ, जो कि आधुनिक जीवनशैली में समाजिक सरोकारों में एक-दूसरे से दूर होते परिवारों को एक करने का काम करता है। यह होली,दशहरा की तरह घर क...
 पोस्ट लेवल : 1568