ब्लॉगसेतु

परिंदे नहीं होते स्वार्थीख़ुल कर जीते हैंआख़िरि सांस तक निस्वार्थ भाव से सिख़ाते हैंअपने बच्चो को उड़नाख़ुल जाते हैं जब बच्चो के पंख़ नहीं उम्मीद करते कीये मुड़कर लौटेगा भी की नहीं आने वाला कल घोंसला ख़ाली होगा की भरा कैसे रह पाते होंगें&nb...
धीरे -धीरे जिंदगी से शिकायतों की गठरी भर ली उस गठरी से बहुत कुछ अच्छापीछे छूटकार बिख़रता गयाजिसे न बटोर पाए न वक्त से देख़ा गया अब जिंदगी बेतरतीबि से रख़े सामान की तरह हो गई हैमन करता है की काश?जिंदगी रेशम पर पड़ी सिल्वटों सी होती मुट्ठी भर पानी के छ...
तेरी यादों को मैं झूठे बहाने बना कर कहीं छोड़ आइ थी पर वो दबे पाँव वापस लौट आइं थी उसने मुझे बहाना ये बतायाकी मेरे ज़हन से अच्छा आशियाना न पायाकलाइ पर जो लिखा था तेरा नामउस पर जब पड़ती है किसी की प्रश्न भरीं नज़र लोगो को बातें बनाने के लिए मिलती...
दर्द रिस्ता है मोम की चट्टानों से सुन कर लोग फ़ेर लेते हैं चेहरे इन अफ़सानों से जो निरंतर चले जा रहे हैंकिस्मत की अंधेरी बंद गलियों  में उन्हें देख़ते हैं शरीफ़ लोग ख़िडकियाँ बंद कर मकानों से दर्द की दवाएँ लिख़ी हैं कुर्सी के विज्...
मैं बचपन से वृक्ष बनना चाहती थी एक विशाल वृक्ष जिसकी जड़ें बहुत गहरी हों जिसकी शाखाएँ बहुत लम्बी हों जिससे मुझे एक ठहराव मिले पर ईश्वर ने मुझे बनाया हैएक सुंदर और कोमल पौधा जिसे हर कोइ अपनी मर्जी से रोपता है वो जैसे-जैसे बड़ा होता है&n...
सोच रहा हूँ आज अपने गाँव लौट लेगांवों में अब भी कागा मुंडेर पर नज़र आते हैंउनके कांव - कांव से पहुने घर आते हैं पाँए लागू के शब्दों से होता है अभिनंदनआते ही मिल जाता है कुएँ का ठंडा पानी और गुड़ धानीनहीं कोइ सवाल क्यों आए कब जाना है नदी किनारे गले मे...
आज मेरी कलम ने किया है मना किसी की याद में अश्क बहाना है मनाआज कोइ नज्म नई बनाउस गली और मोड़ के शब्दों को ले जहॉं तू कभी खड़ा था अकेलेतब भी तो तू सुकून से जीता था आज फ़िर उन पुरानी राहों को नाप आजिनकी वीरानगी पर तू चलकर होता था ख़फ़ागम दे कर भूल जाना...
तुम आइ थी जब मेरी गोद में मुझे लगा एक परी छुपी हुइ थीजैसे बादलों की ओट में तुम्हारी शरारतें वो चंचलतातुम्हारा बचपन अभी बीता भी न था और भाग्य दे गया बहुत सी चुभनतुम में है अदभुत प्रतिभा तुम हो सुंदरता की प्रतिमा तुम्हारी ये सुइयों से दोस्तीत...
बड़े ही ख़ूबसूरत रंगों से भरा हुआ थाज़िंदगी का कैनवास अचानक से सारे रंग छलक गएवो मेरे सूर्तेहाल और मुसतकबिल को पूरा का पूरा भिगो गए अब नया कैनवास है उसके लिए नहीं बचा कोइ रंग नया कैनवास मेरे वजूद की पहचान बन गया है डर लगता है&nbsp...
तुम आती हो नए घर संसार में सपने हजारों हैं अपनों के प्यार में सुबह मंदिर की प्रार्थना में औरों का दुख दर्दमांगती अपने हिस्से में सबको खिलाने के बाद आधे पेट खाने से ही हो जाती तृप्ततुम्हारा पसीना है टपकता सारा आशियाना है चमकतारसोइ का धु...