ब्लॉगसेतु

कल बाज़ार में बड़ा शोर थाकिस बात का हल्ला चारों ओर थाक्या किया तुम्ने ? मैने कहा - कल मैने अपनी आँखेंबड़े अच्छे दामों में बेच दीये मेरी हैसियत से ज़्यादा बड़े -बड़े सपने देखा करती थीइस ज़माने में दाल - रोटी कमाने में हौसला परास्त हो जाता हैये जब देखती...
तुम मेरी आसमानी रगं की डायरी के पन्नों में बसे होबिना बोले आ जाती है हवाऔर जब हर पन्ने को खोलकर चली जाती हैतब यादों की खुशबूमेरे चारों ओर फैल जाती हैऔर घटों मैं अपने आप सेबातें करने लगती हूँवो कमरे में तुम्हारे होने का अहसासखिड़की पर रखे रजनीगंधा के फूल वो ख़त&...
हालातों ने उसकी खुशी कोकही दफ़ना दियाउससे छीन कर उसकी मुस्कुराहट कोकहीं छिपा दियाचाहती थी वो सूरज की किरनों से पहलेदौड़ कर धरा को छू लूगुन-गुनी धूप सी गरमाइशहाथों में हुआ करती थीजाड़े में गुलमोहर के नीचेइंतज़ार खत्म होता थाऔर सर्द हवाओं मेंकाँपते उसके हाथ होते...
मैं स्त्री हूँ इसलिए मैं हर रिश्ते को काटती और बोती हूँ हर रिश्ते के रास्ते से मैं गुज़री हूँ हर रिश्ते को मैने जिया हैहर रिश्ते की कड़वाहट को मैंने पिया हैमैं एक स्त्री हूँ इसलिए मैंने फटे टूटे नए पुराने सभी रिश्ते सिए हैं सब रिश...
जिस्म ने अपनी हल - चल खो दी थी  पर आत्मा अब भीजंग लड़ रही थी कानो में पिघल रहा था लाचारी बेबसी और  भयानकता का शोर जिस मोड़ पर देखे थे सुनहरे सपने  मन के अंधेरे कोने में बंद पड़े थे आत्मा ने बहुत कोशिश की इन बेजान सांसो में फिर खुशियाँ भर पाँऊ मन के अंधे...
माँ तुम बचपन से कहती आई हो एक दिन मैं अपने घर जाउंगी और अपने सपनेपूरे कर लूंगी पर माँ वहाँ जोमेरे अपने रहते हैं वो कहते हैं“यह मेरा घर है यहाँ सपनों वाली नींद कीसख़्त पाबन्दी है।”93/365 Waiting & Watching (+2 in comments!) | Flickr - Photo haring! : taken from -...
मेरे भाग्य का सब कुछ खो क्यों जाता है जिसमें मै खुशियाँ रखती थी वो बक्सा कही खो गया है बहुत कीमती था वो किसी को मिले तो लौटा जानाउसके खोने सेअब सब कुछ बिखर गया है वक्त जो गया, मेरे हाथ नहीं आयाऔर न उसे साथ लाया मेरे भाग्य का सब कुछ खो क्यों जाता है मै बक्से में ताल...
वृद्धावस्था की तैयारी कर्मों का लेखा जोखाशारीर नहीं दे कहीं धोखासहारे वाले हाथ नहीं हैंअब बच्चों व रिश्तेदारों की बारात नहीं हैअकेली सुबह हैखाली और काली संध्या हैसन्नाटे बन गए कान के बालेलटक-लटक कर शोर करते हैंआराम कुर्सी है हिलने वालीकुर्सी स्थिर है हिल रहा श...
जब दुख था नन्हा पौधा जीवन में  तब आँखे भर जाती थी बात बात में दिल पर लग जाती थी बाते हर रूप में तब दिमाग और दिल अलग अलग सोचते दिमाग बंद कमरे में था और दिल निकल पड़ा था अपनों की खोज में दिल नादान था बहुत ठोकरे खाता इस भाग दौड़ में&nb...
तुमने किताब की तरह पढ़ा मुझे पर समझ नहीं पाए किस वाक्य पर रुके,किस पर हँसे और मुस्कुराए पन्ने की तरह तुमने दिल के किसी कोने में,मोड़ कर कुछ बंद किया था उस मुड़े हुए पन्नें को, तुमने कभी नहीं खोला कोई रहस्य नहीं छुपा था उसके अंदरबस कुछ पंक्तिया थी जिनका अर्थ तुम्हे ढूं...