ब्लॉगसेतु

भारत में मौसम विभाग का मजाक एक जमाने से बनता आया है. किसी पुरानी फिल्म में देखा था कि बंदा अपनी बीबी से कह रहा है कि छाता निकाल कर दे दो, मौसम विभाग ने रेडियो से बोला है कि आज आसमान साफ रहेगा. आजकल नये दावों की मानें तो देश में पिछले ६७ साल में न कुछ हुआ है और न ही...
लोकतंत्र में बयानों की बड़ी महत्ता होती है. एक जमाने में दुबई के सहरा में बेली डांस देखा था. नृतकी के शरीर की लचक इतनी ज्यादा थी कि लगता था शरीर में कोई हड्डी है ही नहीं. आज जब इन नेताओं के बयानों को सुनता हूँ और हर थोड़ी देर में उसके बदलते अर्थ के बारे में खबर आती ह...
कुछ बयान इसलिए दिये जाते हैं ताकि बाद में माफी मांगी जा सके. बाद में माफी कब मांगना है यह भी माफी मांगने की केटेगरी वाले बयानों की सब केटेगरी पर निर्भर करता है. अगर आपने किसी की मान हानि वाला बयान दिया है तो माफी भी तब मांगना होगी जब अगला लाखों की मान हानि का दावा...
Published in 7th Quarterly  e-Bulletin – Gyan Vigyan Sarita:शिक्षा dt 1st April’2018 एक नया कॉलम : अंदाज ए बयां - समीर लाल ’समीर’ by renowned author in Hindi, settled at Canada.धरा दिवस हर व...
एटीएम में नोट नहीं,अगली बार वोट नहीं.हमेशा की तरह राष्ट्रीय चिंतन हेतु तिवारी जी सुबह सुबह नुक्कड़ की पान की दुकान पर आ चुके हैं और यही नारा लगा रहे हैं. हमेशा की तरह आज भी वह भड़के हुए हैं कि चलो, १५ लाख न दिये तो न सही. वो तो हमें लग ही रहा था कि वोट के चक्कर में फ...
बचपन में किन्हीं बड़े त्यौहारों पर घर में व्रत रखा जाता था. बेहतरीन फलाहारी पकवान बनते. कुट्टु के आटें की पूड़ी, काजू मूँगफली भुनी हुई सैंधा नमक के साथ, आलू की सूखी सब्जी, सिंधाड़े के आंटे का हलुआ, मखाने की खीर, साबुदाने की खिचड़ी, फ्रूट सलाद और भी न जाने क्या क्या..जो...
अभी कुछ दिन पहले ही जिम में था. मित्रों के साथ वर्क आऊट के बाद सोना रुम में रिलेक्स करते चर्चा का विषय था कि एक लेवल तक वजन कम होने के बाद अब कम नहीं हो रहा है. किसी ने बताया कि वजन और नेताओं के व्यवहार में यही तो अंतर है. वजन जानता है कितना गिरना है कि शरीर को फाय...
आज सुबह ५:३० बजे उठ गया था. ८:३० बजे से ऑफिस में मीटिंग थी. रात में ही मौसम समाचार ने बता दिया था कि रात भर में २५ से ३० सेन्टीमीटर बरफ गिरेगी. भारतीय होने के कारण हमारा डीएनए ऐसा है कि सुने पर भरोसा होता नहीं है. सदियों से इन नेताओं ने झूठ सुना सुना कर बिगाड़ डाला...
बचपन में हमारे मोहल्ले में हमारे अन्य हम उम्र साथियों के अलावा मुकेश और रवि भी रहा करते थे. मुकेश के भीतर गुंडई के तत्व बचपन से ही थे. पढ़ाई लिखाई में उसका मन कभी लगा नहीं अतः हमारे १२ वीं पास करने वाले साल में वह ८ वीं फेल होकर स्कूल एवं पढ़ाई से सदा के लिए रिश्ता त...
तिवारी जी, एक खुश मिज़ाज हिन्दी के रिटायर्ड सरकारी प्रायमरी स्कूल के शिक्षक. जब परेशान होते हैं तो बस मौहल्ले के नुक्कड की पान की दुकान पर चले आते है.चार साथियों से अपनी परेशानी कह कर थोड़ा हल्का हो लेते हैं.आज भी वहीं बैठे थे मूँह में पान दबाये सर पर हाथ धरे. लगा कि...