ब्लॉगसेतु

अच्छा हुआ शेक्सपियर मौका देख कर १६१६ में ही निकल लिए. अगर आज होते और भारत में रह रहे होते तो देशद्रोही ठहरा दिये गये होते और कुछ लोग उन्हें बोरिया बिस्तर बाँध कर पाकिस्तान जाने की सलाह दे रहे होते. ये भी कोई बात हुई कि कह दिया ’नाम में क्या रखा है, गर गुलाब को हम क...
यह तय बात है कि हर जीव का सम्मान होना चाहिये, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष. इससे भला कौन न सहमत होगा? अतः पहले ही बता दूँ कि मैं मीटू हैशटैग (#MeToo) के साथ हूँ जब तक की उसका इस्तेमाल अति के लिये न हो और दोनों तरफ से हो. फिलहाल तो दिखता है कि मीटू सिर्फ लड़कियों के एक...
यूँ तो हर त्यौहारों पर घर की सफाई की परम्परा रही है किन्तु दीवाली पर इस साफ सफाई का जोश कई गुणित रहता है. कहते हैं कि लक्ष्मी जी आती हैं और अगर घर में गंदगी देखती हैं तो बिना कृपा बरसाये लौट जाती हैं. ऐसे में भला कौन रिस्क ले कि सिर्फ गंदगी के कारण धन दौलत मिलने का...
चुनाव में हार जीत का निर्धारण मुद्दे करते हैं. हर चुनाव के पहले न जाने कैसे एक ऐसा मुद्दा फूट पड़ता है जो चुनाव की दिशा निर्धारित कर देता है. अच्छी खासी चलती सरकार न जाने क्यूँ एकाएक पांचवे साल में विपक्ष को एक ऐसा मुद्दा दे देती है कि खुद का बना बनाया मजबूत किला ने...
भजन की शुरुवात कहाँ से हुई यह तो पता नहीं मगर हुई प्रभु वंदना के लिए थी. यह किसी देवी या देवता की प्रशंसा में गाया जाने वाला गीत है. मीराबाई, सूरदास, तुलसीदास, रसखान आदि के भजन आदिकाल से प्रचलित रहे हैं. पहले गांव शहरों में लोग मंडली बनाकर रात रात भर भजन किया करते...
जिस तरह हर पर्व की एक अलग पहचान होती है, वैसे ही चुनाव की भी है. यह लोकतंत्र का एक बड़ा पर्व है. बताते हैं इस दौरान पूर्व चयनित नेता नगर वापस लौटता है. उसके भीतर का पिछले चुनाव जीतने के बाद से मर चुका इंसान पुनः अगली जीत तक के लिए जीवित हो जाता है. वह एकाएक जेड सुरक...
तिवारी जी का पुराना बकाया है घंसू पर. आज जब तिवारी जी ने पुनः तकादा किया तो घंसू भड़क उठे. उधार का व्यवहार ही यह है कि जब अपना ही पैसा वापस मांगो तो भीखमंगे से बत्तर नजर आते हो.क्या मतलब है तिवारी जी आपका? कोई भागे जा रहे हैं क्या? तिवारी जी भी गुस्से में आ गये बोले...
कल एक दफ्तर के मित्र के नये फ्लैट पर जाना हुआ. नया खरीदा है. जवान बालक है और कुछ साल पहले ही कैरियर की शुरुआत की है. फ्लैट देखकर मुन्नाभाई एमबीबीएस फिल्म के मुन्नाभाई हास्टल का कमरा देख सर्किट का डॉयलॉग याद आ गया...ये क्या भाई!! अभी तो कमरे में घुसे ही हैं और कमरा...
सुन्दरियाँ चाहे वो मोहल्ला सुन्दरी हो, या शहर या प्रदेश या राष्ट्रीय या विश्व सुन्दरी, उनके अन्दर उनकी प्राथमिक योग्यता याने सुन्दरता निश्चित ही होती है. वो सुन्दर होती हैं. सुन्दरियों में भी अधिकतम सुन्दरी विश्व सुन्दरी बन जाती है, मगर मोहल्ला स्तर वाली सुन्दरी भी...
डिस्काउन्ट का अपना वैसा ही आकर्षण है, जैसा किसी सेलीब्रेटी का. प्रोडक्ट की कितनी उपयोगिता है, कितनी गुणवत्ता है, सब गौंण हो जाता है, जब उस पर डिस्काउन्ट की घोषणा होती है. डिस्काउन्ट रुपी पुष्परस ग्राहक रुपी मधुमख्खियों को अपनी और आकर्षित करता है झुंड के झुंड में. ज...