ब्लॉगसेतु

टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने अपने जन्मदिन (5 नवंबर) को ट्विटर पर एक चिट्ठी शेयर की है। चिट्ठी की खास बात ये है कि इसे 31 साल के विराट ने खुद अपने लिए लिखा है। विराट का बचपन का नाम चीकू है, कोहली की ये चिट्ठी 15 के उसी चीकू के नाम लिखी गई है-हाय चीकू, सब...
 पोस्ट लेवल : दिल की बात
डियर पैरेंट्स,मैं जानता हूं आप इसको लेकर बहुत बेचैन हैं कि आपका बेटा इम्तिहान में अच्छा प्रदर्शन करे, लेकिन ध्यान रखें कि यह बच्चे जो इम्तिहान दे रहे हैं इनमें भविष्य के अच्छे कलाकार भी हैं जिन्हें गणित समझने की बिल्कुल जरूरत नहीं। इनमें बड़ी-बड़ी कंपनियो...
 पोस्ट लेवल : मेरी आवाज स‌ुनो
- ध्रुव गुप्तहे भारतवासियों, मैं रावण !सभी भारतवासियों को दशहरे की शुभकामनाएं। आज का दिन प्रभु राम के हाथों मेरी पराजय और मृत्यु का दिन है। यह मेरे लिए उत्सव का दिन है क्योंकि एक योद्धा के लिए विजय और पराजय से ज्यादा बड़ी बात उसका पराक्रम है। मुझे गर्व है कि मै...
 पोस्ट लेवल : बैरंग चिट्ठियां
यह ख़त भगत सिंह ने जेल में रहते हुए लिखा था और यह 27 सितम्बर 1931 को लाहौर के अखबार 'द पीपल' में छपा था। इसमें भगतसिंह ने ईश्वर की मौजूदगी पर कई तर्कपूर्ण सवाल खड़े किये हैं और इस संसार के निर्माण, इंसान के जन्म, ईश्वर की कल्पना के साथ-साथ संसार में मनुष्य की दीनता,...
 पोस्ट लेवल : भगत सिंह
- शुभम साहू अजीब'काल्पनिक भगवान' को मानने वाले प्रिय आस्तिकों,इसी महीने पारिवारिक सदस्यों की जिद पर उनके साथ शिर्डी और शनि शिंगणापुर गए थे, दोनो जगहों पर मेरा पूरा ध्यान 'गलत और सही' पर रहा, दोनों जगहों पर आपकी गाड़ी पहुंचते ही, कुछ दलाल आपकी गाड़ी के पास आते हैं औ...
 पोस्ट लेवल : सीधी बात
- मिथुन कुमारडियर डार्लिंग,सच तो ये है कि तुम सच में बिना मेकअप के ही खूबसूरत लगती हो। मैं अपनी बात की सत्यता का प्रमाण तो नहीं दे सकता। लेकिन तुम चाहो तो मुझे परख सकती हो। इस परखने में बस यह मत कहना चलो अंगारे पर चलकर दिखाओ कि तुम सच कह रहे हो। वो जमाना और था जब स...
 पोस्ट लेवल : दिल की बात
30 सितम्बर, 1930 को भगत सिंह के पिता सरदार किशन सिंह ने ट्रिब्यूनल को अर्जी देकर बचाव पक्ष के लिए अवसर देने की मांग की थी। पिता की अर्जी से भगत सिंह की भावनाओं को भी चोट लगी थी, लेकिन अपनी भावनाओं पर काबू कर सिद्धान्तों पर जोर देते हुए उन्होंने 4 अक्तूबर, 1930 को य...
 पोस्ट लेवल : भगत सिंह
इंकलाब के दौरान यतीन्द्रनाथ दास 63 दिन की भूख हड़ताल के बाद शहीद हुए। उस समय 'माडर्न रिव्यू’ पत्रिका के सम्पादक रामानन्द चट्टोपाध्याय ने यतीन्द्रनाथ दास की शहादत, जनता की तरफ से शहीद के सम्मान और भगत सिंह के ‘इन्कलाब जिन्दाबाद’ के नारे की आलोचना की। इसका जवाब ...
 पोस्ट लेवल : भगत सिंह
भगत सिंह लाहौर के नेशनल कॉलेज के छात्र थे। एक सुंदर-सी लड़की आते-जाते उन्हें देखकर मुस्कुरा देती थी और सिर्फ भगत सिंह की वजह से वह भी क्रांतिकारी दल के करीब आ गई। जब असेंबली में बम फेंकने की योजना बन रही थी तो भगत सिंह को दल की जरूरत बताकर साथियों ने उन्हें यह जिम्...
 पोस्ट लेवल : भगत सिंह
-आशुतोष तिवारीडियर देशभक्तों, यह आप के लिए है क्योंकि आप हर दिन सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिये देश तोड़ने वालों के खिलाफ लिखते हैं। लेकिन आप लोगो को देश तोड़ने वाले लोग ट्रोल करते हैं, गाली देते हैं, तो आप कमजोर पड़ जाते हैं।आप कमजोर और निराश मत होइए। वह द...
 पोस्ट लेवल : सीधी बात