ब्लॉगसेतु

भारत में सदियों से जाति व्यवस्था रही है। सभी जातियां अन्य दूसरी जातियों का सम्मान करते हुए, एक साझी संस्कृति में प्रेमपूर्वक रहती आई है। देश के महापुरुष भले किसी जाति के हों, वे सबके लिए आदरणीय व प्रेरणास्त्रोत होते थे। लेकिन आजादी के बाद देश के नेताओं ने एक तरफ जह...
 पोस्ट लेवल : Pratikriya prtikriya
मौसम विभाग, भारत के पूर्व महानिदेशक ड़ा.लक्ष्मण सिंह राठौड़ की कलम से....स्वामी सम्पूर्णानन्द बाल्यकाल से ही शुक्र-ज्ञानी तथा वाकपटु थे| माँ-बाप का दिया नाम कोजा राम था| प्यार से लोग उन्हें कोजिया बुलाते थे| पर वे अपने आप को बचपन से ही सुन्दर व सम्पूर्ण मानते थे| इसल...
 पोस्ट लेवल : Rajasthani Kahaniya
हर पूनम मेलो भरै,नर उभै कर जोड़ |खांडै परणी नार इक,सती हुई जिण ठोड ||१९६||वीर की तलवार के साथ विवाह करने वाली वीरांगना जिस स्थान पर सती हुई ,वहां आज भी हर पूर्णिमा को मेला भरता है तथा लोग श्रद्धा से खड़े हो उसका अभी-नंदन करते है |घर सामी एक देवरों ,सांझ पड्यां सरमाय...
 पोस्ट लेवल : Dohe Hathilo Rajasthan rajasthani poem
धरती जाती नह रुकै,निबलां नांजोगांह |रजवट बाँधी आ रसा,जावै नह जोगांह ||१९०||निर्बल और योग्य व्यक्तियों के अधिकार से जाती हुई धरती रूकती नहीं है क्योंकि यह धरती योग्य व्यक्तियों के साथ वीरता की रस्सी से बंधी है, अत: उन्हें छोड़कर ये नहीं जा सकती |निबला पासै ना रुकै,अक...
 पोस्ट लेवल : Dohe Hathilo Rajasthan rajasthani poem
लोपण पहलां पाल पर,कोपण पहलां पेख |रोपण चाल्यो आज थूं ,मणधर माथै मेख ||१८४||हे वीर ! तू शत्रु-सेना को देखने से पहले ही क्रुद्ध हो उसे सीमा प्रवेश करने से पूर्व ही ध्वंस करने के चल पड़ | इस प्रकार तू निश्चय ही मणिधर सर्प (शत्रु) के माथे पर (अपने शौर्य या विजय की) मेख...
 पोस्ट लेवल : Dohe Hathilo Rajasthan rajasthani poem
तोपां जाझां ताखड़ी,सीस पडै कट कट्ट |बण ठण बैठा किम सरै,रण माची गहगट्ट ||१७८||वीर पत्नी पति से कहती है - तोपें गरजती हुई गोले बरसा रही है,जिससे शत्रुओं के मुंड कट कट कर गिर रहे है | हे स्वामी ! बन ठन कर बैठने से कैसे काम चलेगा ? देखते नहीं, युद्ध की भयंकर मार काट मच...
 पोस्ट लेवल : Dohe Hathilo Rajasthan rajasthani poem
लेवण आवे लपकता,सेवण माल हजार |माथा देवण मूलकनै,थोडा मानस त्यार ||१७२||मुफ्त में धन लेने के लिए व धन का संग्रह करने के लिए तो हजारों लोग स्वत: ही दौड़ पड़ते है ,किन्तु देश की रक्षा के लिए अपना मस्तक देने वाले तो बिरले ही मनुष्य होते है |मोजां साथो मोकला,बोलण मीठा बो...
 पोस्ट लेवल : Dohe Hathilo Rajasthan rajasthani poem
पेट फाड़ पटकै सिसू ,रण खेतां खूंखार |बगसै माफ़ी बिरियाँ ,सरणाई साधार ||१६६||माता ने अपना पेट चीर कर जो पुत्र उत्पन्न किया ,वह युद्ध क्षेत्र में खूंखार सिद्ध हुआ | वह शरण में आए शत्रुओं को क्षमा प्रदान कर क्षात्र धर्म की मर्यादा निभाता है |बुझियोड़ी सिलगै भलै,इण धरती...
 पोस्ट लेवल : Dohe Hathilo Rajasthan rajasthani poem
ठाणा लीलो ठणकियो,सुण बैरी ललकार |सुत धायो ले सैलड़ो,धव खींची तरवार ||१६०||शत्रु की ललकार सुन कर अस्तबल में बंधा हुआ घोडा भी हिनहिना उठा | उधर,वीर पुत्र अपना भाला लेकर (शत्रु पर आक्रमण करने) दौड़ा और उधर वीर-पति ने म्यान से तलवार सूंत ली |पग चंगों लख पूत नै,भीगौ काजल...
 पोस्ट लेवल : Dohe Hathilo Rajasthan rajasthani poem
जौहर ढिग सुत आवियो,माँ बोली कर प्रीत |लड़णों मरणों मारणों,रजवट रुड़ी रीत ? ||१५४||जौहर में जलती हुई माँ के सम्मुख जब वीर पुत्र आया तो वह बड़े प्रेम से बोली - हे पुत्र ! युद्ध में लड़ना और मरना-मारना; यही राजपूतों की अनोखी परम्परा है ; इसे निवाहना |बैरी लख घर बारणे,क...
 पोस्ट लेवल : Dohe Hathilo Rajasthan rajasthani poem