ब्लॉगसेतु

                     चूहों की सालाना आम बैठक आहूत की गई थी । तमाम पदाधिकारी और सिविल सोसायटी के चूहे अपने-अपने तर्कों-कुतर्कों के साथ अपने लिए निर्धारित सीटों पर ठसक और कसक के साथ शोभा को प्राप्त हो रहे थे...
                      सिंहासन की ओर देखते-देखते आँखें पथरा गई हैं । युवराज सियार को तो बस खाट का ही सहारा है । खाट की हिमाकत इतनी कि वह उन्हें काट रही है । एक चादर भला कितनी सुरक्षा प्रदान कर सकती है । जिस...
                      नींद नहीं आ रही थी । करवट बदल-बदल कर उसे बुलाने की सारी कोशिशें बेकार गई थीं । अंततः बिस्तर को छोड़ देना ही मुझे उचित जान पड़ा । मैं घर से बाहर निकल आया और धीरे-धीरे सड़क पर बढ़ने लगा...
                      शाम को पार्क में टहलते हुए शुक्ला जी मिल गए । आज रोज की तरह उनकी चाल में वह तेजी नहीं थी । सामना होते ही मैंने पूछा, ‘क्या बात है मान्यवर, आप तो जैसे पैसेन्जर ट्रे...
                            अगले दिन अवकाश होने पर रात को यह दृढ़ संकल्प लेकर सोया कि कल देर तक नींद का सुख लूटूँगा, पर सुबह मुँह अँधेर...
                          उस दिन रात कुछ ज्यादा ही काली और डरावनी थी । झींगुर तक डर के मारे अपने वाद्य यंत्रों को समेट कर इधर-उधर छिप गए थे । कभी...
                          इस वक्त दरबार-ए-खास में महाराज सियार के अलावा कुछ खास मंत्री और खबरी खरगोश ही उपस्थित हैं । पुरानी नौटंकियों की प्रस्तुति का समय, जनता के सामने रखने का ढंग तथा उससे प्रा...
                                              दृश्य-एक   ( स्थान-...
                  जब से राजमाता लोमड़ी ने वानप्रस्थ आश्रम में जाने की तैयारी शुरु की है, तभी से अखिल जंगल दल का समूचा बल युवराज के सिर पर टूट पड़ा है । सत्ता का सुख ही ऐसा होता है कि त्याग की मूर्ति देवी को भी राजमा...
                  जब से राज ज्योतिषी ने अपनी पहली गणना का निष्कर्ष निकाला है, तब से महाराज सियार की रातों की नींद उड़ गई है । दिन में भयानक सपने दिखाई देने लगे हैं । यह सपने नींद की वजह से नहीं, बल्कि खुली आँखों से...