ब्लॉगसेतु

                धरती पर आते ही कौवे कमाल करने लगे थे । रोटी पर नजर गड़ाए रखते और मौका मिलते ही झपट कर फरार हो जाते । छीन-झपट कर ले भागना इनका प्रिय धंधा था । वैसे कभी-कभी बिना लूट-पाट के भी रोटी नसीब हो जाती थी । शनि के...
               इस वक्त वह अकेला यात्री था, जो बस स्टॉप पर खड़ा था । कई बसें आईं-गईं, किन्तु किसी में भी उसे चढ़ने नहीं दिया गया । यात्रियों की धक्कम-पेल ने उसे पीछे धकेल दिया । शरीर में तो थोड़ा-बहुत बल था, किन्तु मन बलह...
                       बधाइयों का तांता लगा हुआ था । इधर मोबाइल की घंटी रुकने का नाम नहीं ले रही थी, उधर लोगों के आने का सिलसिला थम नहीं रहा था । सिंह-कुटीर आज अपने शबाब पर था । चारों तरफ फूलों की झाल...
                   साधो, संसद में बाबा को झपकी क्या आई, चमक-सी आ गई मीडिया के चेहरे पर और उसके फ्लैश चमकने लगे । सोता हुआ कैमरामैन जाग उठा । मछली बाजार की तरह संसद के भयानक कोलाहल के बीच भी जिसे गहरी निद्रा आ ग...
                दरबार-ए-खास में आज काफी गहमागहमी है । महाराज सियार के अलावा सारे मातहत मंत्री उपस्थित हैं । इस बात का खास ख्याल रखा गया है कि उन्हीं को इस खास मौके पर बुलाया जाए, जो हर हाल में समाजवाद का झंडा बुलंद रखते...
             ‘आप पत्रकार लोग भी तिल का ताड़ बनाने के उस्ताद होते हैं ।’ उन्होंने मुझे देखते ही ताना मारा ।   ‘पर आतंकवाद को आप तिल कदापि नहीं कह सकते । वह तो कब का ताड़ बन चुका है ।’ मैंने प्रतिवाद करने की कोशिश करत...
   ‘आशीर्वाद दीजिए माता कि मैं आपके चरण-चिह्नों पर बिना भटके चल लकूँ और आपके इशारों को हू-ब-हू समझते हुए उसी के अनुरूप कार्य कर सकूँ ।’ गुरूमाता लोमड़ी के चरणों में सिर रखकर भेड़ ने कहा ।   ‘मेरा आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है । हमारे कार्यों की स...
              उत्तम प्रदेश और उसके पड़ोसी राज्य पाटलीपुत्र में जश्न का सिलसिला जारी है । होना भी चाहिए । लोग दूसरे राज्यों को टेलीस्कोप लेकर दौड़ लगाते हैं रोजगार की तलाश में । ऐसा नहीं है कि इनके अपने राज्यों में रोजगार की व...
              साधो, दिल को आघात पहुँचाने वाली एक घटना अभी हाल ही में घटित हुई है । सोशल मीडिया पर यदि यह वायरल न हुई होती, तो शायद ही कोई जान पाता इस घटना के बारे में । अखबारों में वैसे भी ऐसी घटनाओं के लिए जगह नहीं होती । हा...
                      जंतर-मंतर आश्चर्य से मुँह फाड़े खड़ा था । आँखें बेहिसाब चौड़ी होती गई थीं । जिधर से देखो, उधर से सियार चले आ रहे थे । धरती के अंदर और आसमान को छोड़कर दिशाओं का कोई कोना बाकी नहीं था ।...